तिब्बत और चीन में भूकंप का भारी झटका, रिक्टर स्केल पर 7 तीव्रता से कांपा इलाका और गहराया बड़ा खतरा
तिब्बत और चीन में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया है। केंद्र जमीन से 173 किलोमीटर नीचे था। जानिए पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
तिब्बत और चीन के एक बड़े हिस्से में भूकंप के बेहद तेज झटके महसूस किए गए हैं जिससे स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल बन गया है। 0 मापी गई है जो कि अपने आप में एक बहुत बड़ा पैमाना माना जाता है और इस तरह के भूकंप बड़े पैमाने पर तबाही लाने की क्षमता रखते हैं। इस भूकंप के आने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर भूवैज्ञानिक और आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हो गई हैं और स्थिति पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी संभावित बड़े नुकसान से निपटा जा सके।
भूकंप का समय और गहराई
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार तिब्बत और चीन में यह शक्तिशाली भूकंप गुरुवार रात को आया। इस भूकंप के आने का सटीक समय रात के करीब 8 बजकर 3 मिनट पर दर्ज किया गया। 0 थी। इसके साथ ही इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इस शक्तिशाली भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से 173 किलोमीटर नीचे स्थित था। इतनी गहराई में भूकंप का केंद्र होने के कारण इसके झटके दूर-दूर तक महसूस किए गए और इसने भूवैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
क्षेत्र का संवेदनशील इतिहास और पिछली आपदाएं
यह वही विशेष इलाका है जहां पर पहले भी भयानक प्राकृतिक आपदाएं आ चुकी हैं। अतीत में इसी क्षेत्र में एक ग्लेशियर के अचानक फट जाने के कारण तिब्बत और नेपाल के विशाल इलाकों में भीषण और भयंकर बाढ़ आ गई थी और उस भयंकर आपदा के दौरान हजारों बेकसूर लोगों की जान चली गई थी और संपत्ति का भी भारी नुकसान हुआ था। उस समय की वह त्रासदी आज भी लोगों के जेहन में ताजा है और इस नए भूकंप के आने के बाद एक बार फिर से उस पुराने जख्म और खतरे की यादें ताजा हो गई हैं, जिससे स्थानीय आबादी की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों और चीनी शोधकर्ताओं की बड़ी चेतावनी
इस ताजा भूकंप के आने के बाद विशेषज्ञों और चीनी शोधकर्ताओं ने बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण छिंगहाई-तिब्बत पठार पर मौजूद ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं। इस प्रकार तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण इस बेहद संवेदनशील और नाजुक इलाके में भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कई गुना अधिक बढ़ गया है और वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि इस तरह की भूगर्भीय हलचलें और जलवायु परिवर्तन के मिले-जुले प्रभाव इस पूरे क्षेत्र को एक बड़े संकट की ओर धकेल रहे हैं।
प्रमुख नदियों का स्रोत और निचले इलाकों पर मंडराता खतरा
यह महत्वपूर्ण पठार क्षेत्र ब्रह्मपुत्र सहित दुनिया की कई अन्य प्रमुख और बड़ी नदियों का मुख्य स्रोत भी माना जाता है। ये नदियां केवल इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं बल्कि यहाँ से निकलकर कई अलग-अलग देशों से होकर बहती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में हो रहे लगातार पर्यावरणीय बदलाव केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि इन नदियों के निचले इलाकों में रहने वाले लाखों-करोड़ों लोगों के लिए भी बहुत बड़ी चिंता का गंभीर विषय बन चुके हैं। भूवैज्ञानिक और पर्यावरणविद् लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते इनर पर्यावरणीय बदलावों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में इसके परिणाम बेहद विनाशकारी साबित हो सकते हैं।
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