पाकिस्तान में सियासी भूचाल: खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू, इमरान की पीटीआई सरकार निलंबित
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू। इमरान खान की पीटीआई सरकार निलंबित और मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी गिरफ्तार। जानिए क्या है पूरा मामला।
पाकिस्तान में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आधिकारिक तौर पर इमरजेंसी यानी आपातकाल लागू कर दिया है। इस बड़े फैसले के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की प्रांतीय सरकार के अधिकारों को निलंबित कर दिया गया है। संघीय सरकार ने आरोप लगाया है कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में जानबूझकर पीछे हट रही थी, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
राष्ट्रपति जरदारी की मंजूरी और कैबिनेट का फैसला
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने संघीय कैबिनेट की सिफारिशों को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित की गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, इस बैठक में देश और विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा के सुरक्षा हालातों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रांतीय सरकार की कार्यप्रणाली राष्ट्रीय सुरक्षा के मानकों के अनुरूप नहीं थी। हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इमरजेंसी लागू होने के बाद प्रांत का प्रशासनिक कामकाज किस तरह से चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पीटीआई ने दावा किया है कि खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को अगवा कर लिया गया है। पार्टी के अनुसार, केवल मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती और पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर खान को भी हिरासत में लिया गया है। पीटीआई का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान नेशनल और प्रांतीय असेंबली के उनके कई सदस्यों को भी इसी तरह निशाना बनाया गया है। पार्टी ने इन गिरफ्तारियों को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है।
संवैधानिक प्रावधान और प्रांतीय शक्तियों पर प्रभाव
पाकिस्तान का संविधान संघीय सरकार को यह विशेष अधिकार देता है कि वह इमरजेंसी के दौरान किसी भी प्रांतीय सरकार के कुछ या सभी कामकाज अपने हाथ में ले सकती है। इस फैसले के बाद इमरान खान की पार्टी की प्रांतीय सरकार की शक्तियां पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। केंद्र सरकार अब प्रांत के प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप कर सकती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पीटीआई अपने नेता इमरान खान की रिहाई के लिए इस्लामाबाद तक एक बड़े मार्च की तैयारी कर रही है।
इमरान खान की रिहाई के लिए मार्च और सुरक्षा इंतजाम
इमरान खान पिछले 3 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। उनकी रिहाई की मांग को लेकर पीटीआई ने पहले 27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च का आह्वान किया था, लेकिन सरकार और पार्टी नेतृत्व के बीच बातचीत की संभावनाओं को देखते हुए इसे 4 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया गया था। अब इमरजेंसी लागू होने के बाद इस मार्च पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रदर्शनकारी को राजधानी में प्रवेश नहीं करने देगी। इसके लिए इस्लामाबाद के प्रमुख रास्तों पर बड़े-बड़े शिपिंग कंटेनर लगाकर बैरियर तैयार किए गए हैं।
पीटीआई की प्रतिक्रिया और भविष्य की आशंकाएं
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई के प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी लगाने के इस फैसले से देश में और ज्यादा खून-खराबा, अस्थिरता और नुकसान हो सकता है और बुखारी का मानना है कि सरकार के पास बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने की गुंजाइश थी, लेकिन इस फैसले से यह साफ हो गया है कि सरकार संवाद की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी। इस स्थिति ने पाकिस्तान की राजनीति में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
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