पाक इकोनॉमी की लाइफलाइन: विदेश से आए रिकॉर्ड 41 अरब 60 करोड़ डॉलर, एक्सपोर्ट को भी पछाड़ा

पाकिस्तान को वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 41 अरब 60 करोड़ डॉलर की रेमिटेंस मिली है जो देश के कुल निर्यात से भी अधिक है और अर्थव्यवस्था के लिए लाइफलाइन बनी है।

Jul 10, 2026 - 09:35
 0  0
पाक इकोनॉमी की लाइफलाइन: विदेश से आए रिकॉर्ड 41 अरब 60 करोड़ डॉलर, एक्सपोर्ट को भी पछाड़ा

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। देश के केंद्रीय बैंक यानी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष 2026 में जो 30 जून को समाप्त हुआ है पाकिस्तान को विदेशों में काम करने वाले अपने नागरिकों से रिकॉर्ड 41 अरब 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रेमिटेंस प्राप्त हुई है। यह राशि पाकिस्तान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि यह उसी अवधि के दौरान देश द्वारा किए गए कुल निर्यात से भी कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विदेशी मुद्रा भंडार पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक लाइफलाइन साबित हो रहा है। जब से पाकिस्तान की इकोनॉमी को सुधारने के लिए आईएमएफ सामने आया है और नए रिफॉर्म लागू करने की सिफारिशें दी हैं तब से आंकड़ों के लिहाज से स्थिति में सुधार देखा जा रहा है।

रेमिटेंस ने बनाया नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2026 में श्रमिकों द्वारा भेजी गई रेमिटेंस 41 अरब 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर रही है। अगर इसकी तुलना पिछले वित्त वर्ष 2025 से की जाए तो उस समय यह आंकड़ा 38 अरब 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। इस प्रकार एक साल के भीतर रेमिटेंस में 8 दशमलव 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने इस आंकड़े को पाकिस्तान के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक रेमिटेंस करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों के अटूट भरोसे का प्रमाण है। उनके अनुसार इससे पाकिस्तान के बाहरी क्षेत्र को मजबूती मिली है और विदेशी मुद्रा का एक मजबूत बफर तैयार हुआ है जिससे देश के मैक्रो इकोनॉमिक फंडामेंटल में सुधार हो रहा है।

इन देशों से आया सबसे ज्यादा पैसा

सलाहकार ने इस आमद को एक रिकॉर्ड उपलब्धि बताया और पिछले तीन सालों में हुई बढ़ोतरी को असाधारण कहा जो दुनिया भर में रहने वाले लाखों मेहनती पाकिस्तानियों की वजह से संभव हुई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जून के महीने में रेमिटेंस आने के सबसे बड़े स्रोत सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात रहे हैं। सऊदी अरब से 829 मिलियन 6 लाख अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए जबकि संयुक्त अरब अमीरात से 792 मिलियन 3 लाख अमेरिकी डॉलर आए। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम का नंबर आता है जहां से 514 मिलियन 9 लाख अमेरिकी डॉलर भेजे गए और संयुक्त राज्य अमेरिका से 296 मिलियन 8 लाख अमेरिकी डॉलर की प्राप्ति हुई। अन्य देशों में इटली से 121 मिलियन 1 लाख अमेरिकी डॉलर और ओमान से 110 मिलियन 8 लाख अमेरिकी डॉलर की आमद दर्ज की गई। हालांकि रेमिटेंस में 8 दशमलव 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन यह पिछले वर्षों की तुलना में कम है क्योंकि वित्त वर्ष 2025 में 26 दशमलव 6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2024 में 10 दशमलव 7 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई थी।

कुल निर्यात से भी ज्यादा रही रेमिटेंस की कमाई

इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि रेमिटेंस से आई रकम देश के कुल एक्सपोर्ट से भी काफी ज्यादा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो रेमिटेंस की 41 अरब 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि नेट एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई जो कि 30 अरब 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर थी उससे कहीं अधिक है। वहीं पाकिस्तान को इस दौरान लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर का ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा हुआ जिसकी भरपाई काफी हद तक वर्कर्स द्वारा भेजी गई इस रेमिटेंस से हुई है। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में विदेशी मुद्रा की कमाई का यह सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए यह पैसा किसी लाइफलाइन से कम नहीं है क्योंकि यह विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने और अंतरराष्ट्रीय भुगतानों को प्रबंधित करने में मदद कर रहा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow