भीड़, बारिश और भगदड़… कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पंडाल में कैसे हुआ हादसा? 19 की गई जान

कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पंडाल में सप्तमी की शाम बारिश के दौरान मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत और 35 के घायल होने की पूरी खबर पढ़ें।

Oct 18, 2026 - 08:35
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भीड़, बारिश और भगदड़… कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पंडाल में कैसे हुआ हादसा? 19 की गई जान

कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक बड़ा और दहला देने वाला हादसा सामने आया है। कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पंडाल में सप्तमी की शाम को जो कुछ हुआ, उसने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में 19 लोगों की जान चली गई और 35 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद से पूरे शहर में हड़कंप मच गया है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

शाम 7:40 बजे शुरू हुई बारिश और बढ़ा दबाव

घटना शाम के 7 बजकर 40 मिनट की है। सप्तमी की शाम को अचानक तेज बारिश होने लगी। हालांकि मौसम विभाग ने पहले ही बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन इसके बावजूद शहर के बड़े पूजा स्थलों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही थी। कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन में भी पिछले कुछ दिनों से बहुत अधिक भीड़ हो रही थी। जैसे ही बारिश शुरू हुई, तो लोग बारिश से बचने के लिए तेजी से पूजा पंडाल के अंदर घुसने लगे। इसके बाद जो हालात बने, उसने देखते ही देखते एक भीषण भगदड़ का रूप ले लिया, जिसमें 19 लोगों की जान चली गयी और 35 लोग घायल हो गये।

आयोजक का बयान और पंडाल की संरचना

चोरबागान सार्वजनिन के आयोजक प्रीतम सरकार ने इस घटना पर बात करते हुए कहा कि जब बारिश शुरू हुई तो पानी से बचने के लिए लोग बड़ी संख्या में पंडाल में घुसने लगे। एक ही बार में अत्यधिक संख्या में लोगों को अंदर जाने देने के कारण बने भारी दबाव से पंडाल का एक हिस्सा गिर गया। इसके अलावा बारिश की वजह से कम रोशनी थी, जिससे विजिबिलिटी बहुत कम हो गई थी। रोशनी और अंधेरे वाले इलाकों में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था और वह रास्ता भी बहुत ही संकरा था और इस संकरे रास्ते और कम रोशनी के कारण भगदड़ मच गई, लोग भागने लगे और इस दौरान कई लोग कुचल गए।

अपनी आंखों के सामने मां को कुचलते देखा

इस हादसे का शिकार हुए लोगों के परिवारों पर क्या बीत रही है, इसका अंदाजा 25 साल के सोनू पाल के बयान से लगाया जा सकता है, जो घटना के समय अपनी मां के साथ पंडाल में मौजूद था। उसने अपनी आंखों के सामने अपनी मां को कुचलते देखा और उसके चेहरे पर इस घटना का डर अभी भी साफ नजर आ रहा है। उसने कांपते हुए कहा कि शायद वह खुद भी इस हादसे में नहीं बचता। सोनू कुमारटुली का रहने वाला है और वह सप्तमी की शाम को अपनी मां के साथ चोरबागान पंडाल देखने गया था। सोनू के मुताबिक, बाहर लगातार बारिश हो रही थी और कोई भी पंडाल से बाहर नहीं आना चाहता था। इस बीच, बारिश से बचने के लिए दरवाजे पर खड़े लोग अंदर जाने के लिए लगातार धक्का-मुक्की कर रहे थे।

सोनू के मुताबिक, भारी दबाव को न झेल पाने के कारण, पंडाल के अंदर मौजूद सभी लोग गिर पड़े और वे मुंह के बल जमीन पर आ गिरे और सोनू ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह खुद भी बहुत परेशान था और उसने किसी तरह खुद को संभाला। जब उसने अपनी मां को खोजने के लिए वह उनकी तरफ गया, तो उसने देखा कि उसकी मां वहां मौजूद नहीं थीं।

वॉलंटियर कहां थे और भीड़ क्यों नहीं संभली?

घटना के बाद चश्मदीदों और स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मंडप में एंट्री और एग्जिट तथा भीड़ कंट्रोल को लेकर अनाउंसमेंट ठीक से नहीं किए गए थे। इस वजह से मां दुर्गा के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं में भारी कन्फ्यूजन फैल गया और नतीजतन यह भीषण हादसा हो गया। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पंडाल में पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था और केवल वीआईपी गेट पर ही पुलिस तैनात थी। इसके अलावा, स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि घायलों को अस्पताल ले जाने में किसी भी तरह की प्रशासनिक मदद समय पर नहीं दी गई।

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पंडाल में लोगों की भीड़ को संभालने के लिए कई वॉलंटियर ड्यूटी पर तैनात थे, लेकिन अचानक बारिश शुरू होने के दौरान वे सब कहां चले गए थे? पुलिस इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं कर पाई? पूजा संगठन और पुलिस की भूमिका पर लोकल लोगों ने अपना भारी गुस्सा जाहिर किया है।

चोरबागान पंडाल में भगदड़ के बाद मचा हड़कंप

हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में घायल सभी लोगों को तुरंत रेस्क्यू करके कोलकाता मेडिकल कॉलेज यानी एमसीएस भेजा गया। हालात को तुरंत संभालने और राहत कार्य तेज करने के लिए लालबाजार कंट्रोल रूम से अतिरिक्त पुलिस फोर्स, फायर ब्रिगेड, कोलकाता पुलिस डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप यानी डीएमजी और मेडिकल टीम के साथ कई एम्बुलेंस घटनास्थल पर भेजी गईं।

घटना के एक अन्य स्थानीय चश्मदीद ने बताया कि उसने सुना था कि पंडाल का एक हिस्सा गिर गया था, जिसके बाद वहां मौजूद सब लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। लोग एक-दूसरे पर गिर रहे थे, उन्हें कुचला जा रहा था और इस प्रकार उनकी दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने यहां क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट यानी भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि घटनास्थल पर हजारों वॉलंटियर और पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद पहले से कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया गया। इतनी बड़ी घटना उनकी आंखों के सामने घटित हो रही थी, लेकिन कोलकाता पुलिस की गाड़ी वहां खड़ी रहने के बावजूद पुलिस ने कुछ नहीं किया। अंत में सारा राहत और बचाव कार्य स्थानीय लोगों ने खुद ही किया और इस दौरान पूजा कमेटी का कोई भी सदस्य नजर नहीं आया।

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