:अमेरिका ने WHO को कहा अलविदा, जिनेवा मुख्यालय से उतरा अमेरिकी झंडा

अमेरिका ने आधिकारिक रूप से WHO से खुद को अलग कर लिया है। जिनेवा में मुख्यालय से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया है। जानें ट्रंप प्रशासन के इस बड़े फैसले के पीछे की पूर

Jan 23, 2026 - 08:35
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:अमेरिका ने WHO को कहा अलविदा, जिनेवा मुख्यालय से उतरा अमेरिकी झंडा

दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका ने अब आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अपना नाता तोड़ लिया है। यह एक ऐतिहासिक और विवादास्पद कदम है जिसने वैश्विक स्वास्थ्य राजनीति में हलचल मचा दी है। जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडे को उतार दिया। गया है, जो इस अलगाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। अमेरिकी प्रशासन का यह फैसला वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।

जिनेवा में हटा झंडा और आधिकारिक घोषणा

अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) और विदेश विभाग ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस अलगाव की पुष्टि की है। जैसे ही यह घोषणा हुई, जिनेवा में संगठन के मुख्यालय के बाहर फहरा रहे सदस्य देशों के झंडों में से अमेरिकी ध्वज को हटा दिया गया। अब अमेरिका इस संगठन का हिस्सा नहीं है और उसने स्पष्ट कर दिया है। कि वह भविष्य में भी इसका सदस्य बनने का कोई इरादा नहीं रखता है। अधिकारियों ने कहा कि अब से अमेरिका केवल एक सीमित अवधि के लिए सहयोग करेगा ताकि अलगाव की प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा किया जा सके।

ट्रंप का कड़ा फैसला और कोविड-19 का विवाद

इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कोविड-19 महामारी के दौरान WHO अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रहा। अमेरिका ने आरोप लगाया कि संगठन ने चीन के प्रति नरम रुख अपनाया और दुनिया को समय रहते चेतावनी नहीं दी और ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें WHO से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था। अमेरिकी कानून के अनुसार, सदस्यता छोड़ने के लिए एक साल पहले सूचना देना अनिवार्य है, और अब वह समय सीमा पूरी हो चुकी है।

26 करोड़ डॉलर का बकाया और कानूनी पेंच

इस अलगाव के बीच एक बड़ा विवाद बकाया राशि को लेकर है और wHO का दावा है कि अमेरिका पर 2024 और 2025 के लिए लगभग 26 करोड़ डॉलर का सदस्यता शुल्क बकाया है। संगठन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार, किसी भी देश को तब तक पूरी तरह अलग नहीं माना जा सकता जब तक वह अपना बकाया नहीं चुका देता। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अलगाव के लिए बकाया भुगतान कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही WHO को दी जाने वाली सभी फंडिंग रोक दी थी, जिससे संगठन की वित्तीय स्थिति पर गहरा असर पड़ा है।

द्विपक्षीय सहयोग पर जोर

अमेरिका ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका अब बहुपक्षीय संगठनों के बजाय सीधे अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय (Bilateral) समझौतों पर ध्यान केंद्रित करेगा। बीमारियों की निगरानी और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अमेरिका अब अपनी स्वतंत्र प्रणालियों और मित्र देशों के साथ सीधे संपर्क का उपयोग करेगा। अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि वह अब पर्यवेक्षक (Observer) के तौर पर भी WHO की बैठकों में शामिल नहीं होगा। यह अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का एक और बड़ा उदाहरण है।

वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर प्रभाव

विशेषज्ञों ने इस कदम पर चिंता जताई है। जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का बाहर निकलना वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि अमेरिका WHO का सबसे बड़ा वित्तपोषक (Funder) रहा है। फंडिंग रुकने से कई गरीब देशों में चल रहे पोलियो, मलेरिया और अन्य टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। फरवरी में होने वाली WHO की कार्यकारी बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होने की संभावना है, जहां दुनिया भर के नेता इस नए संकट का समाधान खोजने की कोशिश करेंगे।

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