BSE Share Price: नए नियमों और ब्रोकरेज की रेटिंग कटौती से लुढ़के बीएसई के शेयर

बीएसई के शेयरों में गिरावट का दौर जारी है। जेफरीज और नुवामा ने रेटिंग घटाई है। जानें क्लोजिंग ऑक्शन सेशन और आरबीआई के नियमों का बीएसई पर क्या असर हुआ।

Aug 18, 2026 - 15:35
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BSE Share Price: नए नियमों और ब्रोकरेज की रेटिंग कटौती से लुढ़के बीएसई के शेयर

देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज बीएसई के शेयरों में लगातार दूसरे दिन गिरावट का दौर देखा जा रहा है। 18 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक बीएसई के शेयर 1 दशमलव 5 प्रतिशत टूटकर 3,283 रुपये 10 पैसे पर कारोबार कर रहे थे। बाजार में आई यह गिरावट किसी सामान्य उतार-चढ़ाव का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे नुवामा और जेफरीज जैसी बड़ी ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों की ताजा रिपोर्ट्स हैं। इन विश्लेषकों ने बीएसई स्टॉक की रेटिंग और इसके भविष्य के लक्ष्य मूल्य दोनों में बड़ी कटौती की है, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है।

ब्रोकरेज फर्म्स ने घटाई रेटिंग और टारगेट प्राइस

बीएसई के शेयरों पर दबाव तब और बढ़ गया जब ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस स्टॉक को अंडरपरफॉर्म की श्रेणी में डाल दिया और इसके लक्ष्य मूल्य में 16 प्रतिशत की कमी कर दी। इसके तुरंत बाद नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भी अपना रुख बदलते हुए बीएसई स्टॉक की रेटिंग को बाय यानी खरीदें से घटाकर होल्ड यानी बनाए रखें कर दिया है। नुवामा ने नए टारगेट प्राइस में 21 प्रतिशत की भारी कटौती करते हुए इसे 3,240 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एक्सचेंज की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। इसी कारण वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए कंपनी की प्रति शेयर आय यानी ईपीएस के अनुमान में क्रमशः 6 दशमलव 3 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की कटौती की गई है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से बढ़ी अनिश्चितता

इस पूरे बदलाव के पीछे एक बड़ा कारण क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को माना जा रहा है और पहले ऑप्शन ट्रेडिंग में एक्सपायरी के करीब आने पर प्रीमियम के कम होने का एक निश्चित पैटर्न होता था, जिससे ट्रेडर्स अपनी रणनीति आसानी से बना लेते थे। लेकिन नए क्लोजिंग सेशन के आने से अंतिम सेटलमेंट प्राइस को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है। अब प्रीमियम किस तरह से घटेगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, इस अनिश्चितता के कारण ट्रेडर्स का उत्साह कम हुआ है और एक्सपायरी वाले दिन के कॉन्ट्रैक्ट्स में 33 दशमलव 2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसका सीधा असर बीएसई के औसत दैनिक प्रीमियम टर्नओवर पर पड़ा है, जो जनवरी 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर 18,100 करोड़ रुपये पर आ गया है। जुलाई के मुकाबले एक्सचेंज का मार्केट शेयर भी 130 बेसिस पॉइंट गिरकर 36 दशमलव 3 प्रतिशत रह गया है।

आरबीआई की सख्ती और अन्य चुनौतियां

ट्रेडिंग के नए नियमों के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंक गारंटी के नियमों में की गई सख्ती भी बीएसई के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इन कड़े नियमों के कारण बिचौलियों को अब अधिक पूंजी की आवश्यकता होगी, जिससे उन हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग रणनीतियों पर बुरा असर पड़ेगा जो कॉन्ट्रैक्ट वॉल्यूम में सबसे बड़ा योगदान देती हैं। जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि बीएसई के कुल टर्नओवर का लगभग आधा हिस्सा घरेलू प्रोपराइटरी ट्रेडर्स से आता है। ऐसे में बढ़ा हुआ सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स, आरबीआई के नए नियम और ऑक्शन सेशन में हुआ बदलाव सीधे तौर पर एक्सचेंज की कमाई को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अगस्त महीने में अब तक बीएसई के ऑप्शन ट्रेडिंग का औसत दैनिक टर्नओवर 12 प्रतिशत तक गिर चुका है।

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