CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई कड़ी फटकार, कहा छात्रों को है शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नालसार छात्रों के खिलाफ बीसीआई के आदेश पर नाराजगी जताई और कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है।

Aug 14, 2026 - 15:35
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CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई कड़ी फटकार, कहा छात्रों को है शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने नालसार (NALSAR) लॉ विश्वविद्यालय के विवादास्पद आदेश पर अत्यंत कड़ी और सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि छात्रों को प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है और वे देश के किसी भी कोने में शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं और मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को इस मामले में दखल देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इस स्थिति को अपने और छात्रों के बीच का मामला बताया।

BCI के आदेश पर CJI की नाराजगी

शुक्रवार 14 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बीसीआई के उस आदेश पर गहरी नाराजगी जाहिर की, जिसमें साल 2026 बैच के नालसार लॉ विश्वविद्यालय के छात्रों के वकील के रूप में पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) पर रोक लगाने की बात कही गई थी। इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए सीजेआई ने कहा कि यह उनके और छात्रों के बीच का मामला है और इसमें बीसीआई को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बीसीआई की इस कार्रवाई को अनावश्यक करार दिया।

CJI ने मांगा जवाब और छात्रों को दी सुरक्षा

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, सुनवाई के दौरान सीजेआई ने इस पूरे प्रकरण में बीसीआई से औपचारिक जवाब मांगा है। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि नालसार लॉ विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र या प्रोफेसर के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि ऐसा करना नियमों के खिलाफ होगा। इस निर्देश से छात्रों और संकाय सदस्यों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि उन पर प्रशासनिक कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा था।

BCI के सर्कुलर का पूरा विवाद

हाल ही में कानूनी शिक्षा और वकीलों की नियति तय करने वाली संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक ऐसा आदेश जारी किया था, जिससे कानूनी जगत में हलचल मच गई थी। बीसीआई की ओर से जारी इस आदेश में सभी राज्यों की बार काउंसिल को निर्देश दिया गया था कि वे हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय से पास होने वाले छात्रों को वकील के रूप में नामांकित (इनरोल) न करें। हालांकि, इस आदेश का व्यापक स्तर पर विरोध हुआ, जिसके बाद इसे वापस लेना पड़ा।

CJI ने साझा किया अपना अनुभव

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई ने मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बीसीआई का हस्तक्षेप बिल्कुल अनावश्यक था। उन्होंने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा, "मैं खुद भी एक छात्र था जो विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल रहा हूं। " उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं और उन्हें इसकी अनुमति मिलनी चाहिए।

BCI ने वापस लिया अपना आदेश

सुप्रीम कोर्ट की इन सख्त टिप्पणियों के बाद, बीसीआई की ओर से पेश हुए वकील ने बेंच को सूचित किया कि संबंधित सर्कुलर को वापस ले लिया गया है। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिस जारी किया और यह सुनिश्चित किया कि नालसार के छात्रों या फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम न उठाया जाए। सीजेआई ने मौखिक रूप से मामला उठाए जाने के दौरान भी छात्र गतिविधियों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और लोकतांत्रिक अधिकारों के महत्व को रेखांकित किया।

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