:रक्षा बजट 2026: क्या 20% की भारी बढ़ोतरी करेगी सरकार? जानें एक्सपर्ट्स की बड़ी भविष्यवाणी
Defence Budget 2026: जानें क्यों एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि इस बार रक्षा बजट में 20% की वृद्धि हो सकती है। स्वदेशीकरण और एआई तकनीक पर रहेगा जोर।
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026 का बजट पेश करने वाली हैं। इस बार सबकी निगाहें रक्षा मंत्रालय के आवंटन पर टिकी हैं और वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए, रक्षा बजट में एक बड़ी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार रक्षा बजट में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती है, जो भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
पिछले बजट की तुलना और वर्तमान स्थिति
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने रक्षा मंत्रालय को 6,81,210. 27 करोड़ रुपये आवंटित किए थे और यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 9. 5% अधिक थी। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि जिस तरह से भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार कर रहा है और चीन-पाकिस्तान सीमा पर चौकसी बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए 9. 5% की वृद्धि पर्याप्त नहीं है। यही कारण है कि बजट 2026 में 20% की वृद्धि की उम्मीद की जा। रही है ताकि पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।
स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भर भारत पर फोकस
बजट 2026 में रक्षा को रणनीतिक रूप से मुख्य केंद्र में रखने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का बजट 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ी छलांग होगा और सरकार का मुख्य जोर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने पर रहेगा। डिफेंस विजन 2047 फ्रेमवर्क के तहत स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष फंड आवंटित किए जा सकते हैं और इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में भी उभरेगा।
युद्ध का बदलता स्वरूप और नई तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में युद्ध के बदलते स्वरूप की झलक दिखनी चाहिए। अब पारंपरिक युद्ध के बजाय एआई-सक्षम सिस्टम (AI-enabled systems), ड्रोन, ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म और साइबर सुरक्षा का महत्व बढ़ गया है। रक्षा योजनाकारों का कहना है कि इन तकनीकों को अब हाशिये पर नहीं रखा जा सकता। इन्हें खरीद, परीक्षण और कॉन्ट्रैक्टिंग मॉडल का मुख्य हिस्सा बनाना होगा। बजट में डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया और साइबर रेजिलिएंस के लिए अलग से प्रावधान होने की संभावना है।
इंडस्ट्री की मांगें और भविष्य की राह
रक्षा क्षेत्र की कंपनियां केवल बजट आवंटन में बढ़ोतरी ही नहीं चाहतीं, बल्कि वे प्रक्रियात्मक सुधारों की भी उम्मीद कर रही हैं और उद्योग जगत का कहना है कि तेजी से कॉन्ट्रैक्टिंग, बौद्धिक संपदा (IP) पर कानूनी स्पष्टता और निर्यात अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन क्षेत्रों में स्वदेशी सामग्री की जरूरतों के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है जहां भारत अभी भी विदेशी सबसिस्टम पर निर्भर है। यदि सरकार इन मांगों को पूरा करती है, तो भारत की रक्षा क्षमताएं वैश्विक स्तर पर और भी मजबूत होंगी।
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