:ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा: बंगाल एसआईआर मुद्दे पर चुनाव आयोग से मुलाकात।

ममता बनर्जी ने दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची विवाद को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

Feb 2, 2026 - 15:35
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:ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा: बंगाल एसआईआर मुद्दे पर चुनाव आयोग से मुलाकात।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और उससे जुड़ी कथित अनियमितताओं के विरोध में है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन्हें बंग भवन में अपने ही लोगों और एसआईआर प्रक्रिया के पीड़ितों से मिलने से रोक रही है। उन्होंने इस स्थिति को 'अत्याचार' करार देते हुए कहा कि वह उन परिवारों को न्याय दिलाने आई हैं जिन्होंने इस प्रक्रिया के दौरान अपने परिजनों को खोया है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और मुख्यमंत्री का विरोध

बंग भवन पहुंचने पर ममता बनर्जी ने वहां तैनात सुरक्षा बलों और दिल्ली पुलिस की उपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की एक बस वहां तैनात की गई है जो उनके समर्थकों और पीड़ितों को मिलने से रोक रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका यह दौरा आधिकारिक है और उन्होंने चुनाव आयोग से औपचारिक समय लिया है और उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री बंगाल आते हैं तो उन्हें 'रेड कार्पेट' स्वागत मिलता है, लेकिन जब बंगाल की मुख्यमंत्री दिल्ली आती हैं तो उन्हें 'ब्लैक कार्पेट' या विरोध का सामना करना पड़ता है।

एसआईआर प्रक्रिया और 150 मौतों का दावा

मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए और उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के कारण लगभग 150 लोगों की जान गई है। बनर्जी ने दावा किया कि कई जीवित मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने के लिए उन्हें 'मृत' घोषित कर दिया गया, जिससे उन परिवारों में भारी तनाव और मानसिक प्रताड़ना की स्थिति पैदा हुई। वह अपने साथ 30 से अधिक ऐसे परिवारों को दिल्ली लाई हैं जिनके सदस्यों की कथित तौर पर इस प्रक्रिया के दौरान मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों और राष्ट्रीय मीडिया को यह जानने की जरूरत है कि बंगाल के लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और कानूनी कदम

इस मामले को कानूनी स्तर पर ले जाते हुए ममता बनर्जी ने भारत के चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है। यह कानूनी कदम सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ होने वाली उनकी बैठक से ठीक पहले उठाया गया है। बनर्जी इस बैठक में 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित लोग और उनके परिजन शामिल होंगे।

राजनीतिक विश्लेषण और भविष्य की रणनीति

विश्लेषकों के अनुसार, ममता बनर्जी का यह कदम आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग के साथ होने वाली बैठक के नतीजे तृणमूल कांग्रेस की भविष्य की रणनीति तय करेंगे। यदि बैठक के परिणाम संतोषजनक नहीं रहे, तो मुख्यमंत्री ने अपने सांसदों और पीड़ितों के साथ दिल्ली में धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संवैधानिक संस्थाओं जैसे न्यायपालिका और चुनाव आयोग में अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगी।

निष्कर्ष के तौर पर, ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि वह कल बंग भवन में एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी संघर्ष से उपजी है और वह बंगाल के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ना जारी रखेंगी। दिल्ली में उनकी सक्रियता ने न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है।

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