JF-17 Fighter Jets:भारत से संघर्ष के बाद JF-17 फाइटर जेट्स की मांग बढ़ी: पाकिस्तान का दावा, 6 मुस्लिम देशों से चल रही बात

पाकिस्तान का दावा है कि भारत से संघर्ष के बाद उसके JF-17 फाइटर जेट्स की मांग बढ़ी है। बांग्लादेश, सऊदी अरब, लीबिया सहित 6 मुस्लिम देशों से बिक्री की बात चल रही है। जानें JF-17 की खूबियां और खामियां।

Jan 15, 2026 - 22:35
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JF-17 Fighter Jets:भारत से संघर्ष के बाद JF-17 फाइटर जेट्स की मांग बढ़ी: पाकिस्तान का दावा, 6 मुस्लिम देशों से चल रही बात

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में दावा किया है कि भारत के साथ पिछले साल मई में हुए संघर्ष के बाद पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की वैश्विक मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रेडियो पाकिस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बुधवार को यह बयान दिया कि कई देश पाकिस्तानी फाइटर जेट्स खरीदने के लिए बातचीत कर रहे हैं और हालांकि, उन्होंने विशेष रूप से यह नहीं बताया कि किन लड़ाकू विमानों की मांग बढ़ी है, लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि कई देश पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट्स में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह दावा पाकिस्तान के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने की उसकी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, खासकर क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि में।

JF-17 थंडर में बढ़ती वैश्विक रुचि

JF-17 थंडर फाइटर जेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है। जिन देशों के JF-17 खरीदने में दिलचस्पी दिखाने की खबरें हैं, उनमें बांग्लादेश, सूडान, लीबिया, सऊदी अरब, इराक और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देश शामिल हैं। यह सूची पाकिस्तान के लिए एक विस्तृत संभावित बाजार को इंगित करती है, जो अपने रक्षा उद्योग को मजबूत करने और वैश्विक हथियारों के बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इन देशों के साथ बातचीत पाकिस्तान के लिए न केवल आर्थिक लाभ का स्रोत। हो सकती है, बल्कि भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का एक तरीका भी हो सकती है।

प्रमुख सौदे और चल रही बातचीत

पाकिस्तान कई देशों के साथ JF-17 थंडर फाइटर जेट्स की बिक्री के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री ने 12 जनवरी को पाकिस्तान के वायुसेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की और लगभग 40 JF-17 विमानों की खरीद पर चर्चा की। यह एक बड़ा संभावित सौदा है जो इंडोनेशिया की वायुसेना की क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है और इसी तरह, बांग्लादेश के अखबार डेली स्टार के मुताबिक, पाकिस्तान बांग्लादेश को भी JF-17 फाइटर जेट बेचेगा, और इस संबंध में दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों के बीच पहले ही बातचीत हो चुकी है, जो सौदे के उन्नत चरणों का संकेत देता है।

सऊदी अरब और लीबिया के साथ रणनीतिक सौदे

रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने 7 जनवरी को सऊदी अरब को JF-17 बेचने के संबंध में बातचीत की है और यह सौदा सऊदी अरब से पाकिस्तान को मिले 2 अरब डॉलर के ऋण के बदले में होने की संभावना है, जो एक रणनीतिक आर्थिक और रक्षा विनिमय को दर्शाता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना ने अभी तक लीबिया या सऊदी अरब के साथ इन समझौतों को लेकर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, और बांग्लादेश ने भी पाकिस्तान के साथ किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जो इन वार्ताओं की प्रारंभिक प्रकृति को दर्शाता है और अल-जजीरा के अनुसार, इससे पहले दिसंबर 2025 में, पाकिस्तान ने लीबिया के विद्रोही गुट, लीबियाई नेशनल आर्मी (LNA) को 4 अरब डॉलर में एक दर्जन से अधिक JF-17 फाइटर जेट बेचने का सौदा किया था, जिसे पाकिस्तान के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी हथियारों की डील कहा जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान सूडान के साथ भी 12,500 करोड़ रुपये की रक्षा डील करने वाला है, जिसमें JF-17 फाइटर जेट भी शामिल हैं, जो एक व्यापक रक्षा सहयोग का संकेत है।

JF-17 के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटर

JF-17 थंडर फाइटर जेट पहले से ही कुछ देशों के सैन्य बेड़े का हिस्सा है और रॉयटर्स की 9 जनवरी को जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों में कई देशों ने पाकिस्तान का JF-17 थंडर फाइटर जेट खरीदने की इच्छा जताई है। नाइजीरिया, म्यांमार और अजरबैजान के सैन्य बेड़े में पहले से ही यह जेट शामिल है, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और परिचालन क्षमता का प्रमाण है। इन देशों में JF-17 की उपस्थिति पाकिस्तान के लिए एक मजबूत बिक्री बिंदु प्रदान करती है, क्योंकि यह संभावित खरीदारों को विमान के सिद्ध प्रदर्शन का आश्वासन देती है।

JF-17 थंडर की उत्पत्ति और विकास

पाकिस्तान सरकार के अनुसार, JF-17 थंडर एक मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है जिसे। पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर जून 2007 में तैयार किया था। इसका डिजाइन और टेक्नोलॉजी चीन की चेंगड़ू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (CAC) ने तैयार की है, जबकि पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) ने इसकी अंतिम असेंबलिंग की है। इस संयुक्त परियोजना में लगभग 58% हिस्सा पाकिस्तान का है और 42% हिस्सा। चीन का है, जो दोनों देशों के बीच गहरे रक्षा सहयोग को दर्शाता है। यह विमान पाकिस्तान की वायुसेना की रीढ़ है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा। चुनौतियों का सामना करने के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है।

रूसी इंजन पर निर्भरता

JF-17 थंडर की एक खास बात यह है कि इसका इंजन रूस में बना है। इसमें क्लिमोव RD-93 इंजन और नए ब्लॉक 3 में लगा RD-93 MA इंजन रूस में निर्मित है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस समय चीन और पाकिस्तान के पास आधुनिक फाइटर-जेट इंजन उपलब्ध नहीं थे और रूस ये इंजन चीन के जरिए पाकिस्तान को मुहैया कराता है, जो इस विमान की आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय निर्भरता को उजागर करता है। यह निर्भरता भू-राजनीतिक परिवर्तनों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से प्रभावित हो सकती है, जैसा कि हाल के रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में देखा गया है।

JF-17 की तकनीकी क्षमताएं और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ

JF-17 थंडर को 4. 5 पीढ़ी का लाइट-वेट मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट माना जाता है। इसकी तुलना भारत के तेजस विमान, अमेरिका के F-16 और रूस के MiG-29 जैसे अन्य समकालीन लड़ाकू विमानों से की जाती है। इन तीनों की तुलना में, JF-17 को सबसे सस्ता माना जाता है, जो इसकी बढ़ती मांग का एक प्रमुख कारण है। यह उन देशों के लिए एक आकर्षक विकल्प प्रस्तुत करता है जो आधुनिक लड़ाकू क्षमताओं की तलाश में हैं लेकिन जिनके पास सीमित रक्षा बजट है। इसकी मल्टी-रोल क्षमता इसे हवाई श्रेष्ठता, जमीनी हमले और टोही मिशनों सहित विभिन्न प्रकार के अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है।

JF-17 की ज्ञात कमियां और चुनौतियां

ग्लोबल डिफेंस कॉर्प की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का JF-17 रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स के लिए चीन पर निर्भर है। यह निर्भरता आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियां पैदा कर सकती है और इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इसमें लगने वाले रूसी इंजन की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है, जिससे इसके परिचालन में चुनौतियां आ सकती हैं। JF-17 एक स्टेल्थ फाइटर नहीं है, जिसका अर्थ है कि यह दुश्मन देश के रडार सिस्टम को चकमा नहीं दे पाता और निशाना बन सकता है, जो आधुनिक युद्ध के मैदान में एक महत्वपूर्ण कमी है।

इंजन की शक्ति और हथियार ले जाने की क्षमता में सीमाएं

JF-17 फाइटर जेट में कुछ अन्य खामियां भी हैं। विमान में एक ही RD-93 इंजन होने की वजह से इसका थ्रस्ट कम। है, जिससे भारी हथियार ले जाते समय इसकी गति कम हो जाती है। यह इसकी गतिशीलता और प्रतिक्रिया समय को प्रभावित कर सकता है, खासकर उच्च-तीव्रता वाले हवाई युद्ध में। इसके अलावा, JF-17 लगभग 3. 6 टन हथियार ही ले जा सकता है, जिसका अर्थ है कि यदि अधिक हथियार ले जाने हों, तो ईंधन कम करना पड़ता है, जिससे इसकी रेंज और मिशन की अवधि सीमित हो जाती है। यह इसकी परिचालन लचीलेपन को प्रभावित करता है।

एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की कमजोरियां

JF-17 का एवियोनिक्स सिस्टम, जो विमान को उड़ाने, रास्ता तय करने और युद्ध लड़ने में मदद करने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं, आउटडेटेड माना जाता है। इससे इसे नेविगेशन और कम्युनिकेशन करने के साथ-साथ हथियारों को नियंत्रित करने में परेशानी होती है, जो इसकी समग्र युद्धक क्षमता को कम करता है और इसका इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी सामान्य है, जिसका जैमिंग और सेंसर सिस्टम खतरे को पहचानने और विमान की सुरक्षा करने में सीमित क्षमता रखता है। आधुनिक हवाई युद्ध में, उन्नत एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम निर्णायक होते हैं, और इन क्षेत्रों में JF-17 की कमजोरियां इसे एक नुकसान में डाल सकती हैं।

JF-17 बनाम भारत का तेजस विमान

भारतीय वायुसेना का अभिन्न अंग कहे जाने वाला तेजस फाइटर जेट पाकिस्तान के JF-17 से कई मायनों में बेहतर है। तेजस में आधुनिक AESA रडार, बेहतर सेंसर-फ्यूजन और डिजिटल कॉकपिट है, जिससे लक्ष्य पहचान और हमला अधिक सटीक होता है। तेजस का इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी JF-17 से बेहतर है, जो। इसे दुश्मन के रडार और मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, तेजस में बड़ी मात्रा में ऐसे मटेरियल इस्तेमाल हुए हैं, जिससे इसका वजन और रडार। सिग्नेचर कम है, जो इसे JF-17 की तुलना में कुछ हद तक स्टेल्थ क्षमता प्रदान करता है। ये विशेषताएं तेजस को एक अधिक सक्षम और आधुनिक लड़ाकू विमान बनाती हैं।

हवाई संघर्ष के दावे और विरोधाभासी बयान

भारत और पाकिस्तान के बीच हवाई संघर्षों को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। जियो न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि भारत के साथ मई 2025 में हुई झड़प के दौरान पाकिस्तान ने दुनिया के सामने अपनी सैन्य क्षमता दिखाई थी। वहीं, पाकिस्तान के वायु सेना प्रमुख जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने भी अगस्त 2025 में। दिए एक बयान में JF-17 की मदद से भारतीय जेट्स गिराने का दावा किया था। हालांकि, भारतीय वायु सेना चीफ अमर प्रीत सिंह ने 8 अक्टूबर 2025 को एक कार्यक्रम में इन दावों का खंडन किया था। उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर कई ठिकानों को तबाह किया और कुल 5 पाकिस्तानी फाइटर जेट्स गिराए, जिनमें JF-17 भी शामिल थे। ये विरोधाभासी बयान दोनों देशों के बीच जारी सैन्य प्रतिद्वंद्विता और सूचना युद्ध को दर्शाते हैं।

पाकिस्तान की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाएं और चुनौतियां

पाकिस्तान JF-17 थंडर को एक लागत प्रभावी और सक्षम लड़ाकू विमान के रूप में पेश करके अपने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इसकी कुछ तकनीकी सीमाएं और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता चुनौतियां पेश करती हैं। भारत के साथ हवाई संघर्षों के बारे में विरोधाभासी दावे इस विमान की वास्तविक युद्धक क्षमता पर सवाल उठाते हैं। फिर भी, कई मुस्लिम देशों द्वारा इसमें दिखाई गई रुचि पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती। है, जिसे वह अपने भू-राजनीतिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भुनाने की कोशिश कर रहा है।

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