Putin-Trump Meeting:पहले राउंड में पुतिन पड़े ट्रंप पर भारी! इन 5 लोगों ने दिलाई 'जीत'
Putin-Trump Meeting: हफ्ते भर से चर्चा में रही डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की अलास्का बैठक खत्म हो गई है. मुलाकात में पुतिन, ट्रंप पर हावी दिखाई दिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप का तीन मिनट बोलना चर्चा का विषय बन गया. पुतिन की इस बढ़त पर उन पाँच
Putin-Trump Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में हुई मुलाकात से वैश्विक मंच पर बड़ी उम्मीदें थीं। दुनिया की नजरें इस ऐतिहासिक बैठक पर टिकी थीं, मगर तीन घंटे की बंद कमरे की बातचीत के बाद कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया। नतीजा? यह बैठक फीकी और निराशाजनक रही। दोनों नेता जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बाहर निकले, तो महज 12 मिनट तक बोले। सबसे ज्यादा हैरानी ट्रंप के सिर्फ 3 मिनट 20 सेकंड के संक्षिप्त भाषण ने दी, जिसने कई सवाल खड़े किए।
वहीं, पुतिन की पूरी तैयारी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उनके कॉन्फिडेंस का राज थी उनकी डेलीगेशन टीम के वो पांच धुरंधर, जो इस मीटिंग में पूरी रणनीति और तैयारी के साथ उतरे थे। इस टीम में शामिल थे अनुभवी कूटनीतिज्ञ, आर्थिक रणनीतिकार और पुतिन के सबसे भरोसेमंद लोग। यही वजह थी कि अलास्का की इस बैठक में पुतिन, ट्रंप की तुलना में कहीं ज्यादा तैयार और प्रभावी नजर आए। आइए, इन पांच शख्सियतों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिन्होंने इस मुलाकात में रूस की ताकत को बखूबी दर्शाया।
1. सर्गेई लावरोव - रूस की विदेश नीति का लोहे का स्तंभ
1950 में मॉस्को में जन्मे सर्गेई लावरोव आधुनिक रूस के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली विदेश मंत्रियों में शुमार हैं। 2004 से इस पद पर काबिज लावरोव ने वैश्विक मंच पर रूस की छवि को आक्रामक और दमदार बनाया है। खासतौर पर यूक्रेन युद्ध को पश्चिमी देशों की प्रॉक्सी के रूप में पेश करने की उनकी रणनीति ने दुनिया का ध्यान खींचा। उनकी सख्त और बेबाक भाषा पुतिन की विदेश नीति की पहचान बन चुकी है। अलास्का में उनकी मौजूदगी ने रूस के कूटनीतिक दबदबे को और मजबूत किया।
2. किरिल दिमित्रिएव - पाबंदियों को चकमा देने वाला मास्टरमाइंड
किरिल दिमित्रिएव रूस के सॉवरेन वेल्थ फंड (RDIF) के 2011 से प्रमुख रहे हैं और पुतिन के भरोसेमंद सिपहसालारों में से एक हैं। पश्चिमी पाबंदियों को चकमा देने की उनकी रणनीतियों ने रूस को आर्थिक तौर पर टिकाए रखा। 2025 में उन्हें विदेशी निवेश और आर्थिक सहयोग के विशेष दूत की जिम्मेदारी सौंपी गई। स्टैनफोर्ड से पढ़ाई करने वाले दिमित्रिएव ने रूस के लिए नए आर्थिक रास्ते खोले, जिसका असर अलास्का की इस बैठक में उनकी रणनीतिक मौजूदगी में साफ दिखा।
3. आंद्रे बेलोउसॉव - अर्थशास्त्री से बने युद्ध मंत्री
2024 में रूस के रक्षा मंत्री बने 66 वर्षीय आंद्रे बेलोउसॉव पेशे से अर्थशास्त्री हैं। पुतिन ने उन्हें इसलिए चुना ताकि रूस की युद्ध मशीनरी को आर्थिक अनुशासन और दक्षता के साथ चलाया जा सके। पहले आर्थिक सलाहकार और उप-प्रधानमंत्री रह चुके बेलोउसॉव अब रूस की सेना को तकनीकी और वित्तीय प्रबंधन के साथ मजबूत कर रहे हैं। उनकी रणनीतिक सोच ने अलास्का में रूस के पक्ष को और मजबूती दी।
4. एंटोन सिलुआनोव - युद्धकाल में अर्थव्यवस्था की रीढ़
2011 से रूस के वित्त मंत्री रहे एंटोन सिलुआनोव ने युद्धकालीन परिस्थितियों में रूस की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाई। बजट प्रबंधन और खर्च नियंत्रण में उनकी सख्ती ने उन्हें पुतिन के सबसे भरोसेमंद साथियों में शुमार किया। युद्ध के बावजूद रूस की आर्थिक स्थिरता का श्रेय काफी हद तक सिलुआनोव को जाता है। अलास्का में उनकी मौजूदगी ने रूस के आर्थिक पक्ष को मजबूत आधार दिया।
5. यूरी उशाकोव - परदे के पीछे का मास्टर डिप्लोमैट
78 वर्षीय यूरी उशाकोव को रूस का बैकस्टेज डिप्लोमैट कहा जाता है। 1999 से 2008 तक अमेरिका में रूस के राजदूत रहे उशाकोव 2012 से पुतिन के शीर्ष विदेश नीति सलाहकार हैं। उनका काम है पुतिन की मुलाकातों की रणनीति तैयार करना, संदेश गढ़ना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस की छवि को मजबूत करना। उनके शांत स्वभाव और चतुर दांव-पेच पश्चिमी देशों के लिए अक्सर सिरदर्द बन जाते हैं। अलास्का में उनकी रणनीतिक उपस्थिति ने पुतिन को कूटनीतिक बढ़त दिलाई।
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