SIR पर कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का पलटवार: मदन राठौड़ ने गहलोत से उनके नेताओं के आचरण पर मांगा जवाब

राजस्थान में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर भाजपा का कांग्रेस को जवाब। मदन राठौड़ ने अशोक गहलोत और राहुल गांधी के आचरण पर उठाए सवाल।

Oct 11, 2026 - 08:35
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SIR पर कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का पलटवार: मदन राठौड़ ने गहलोत से उनके नेताओं के आचरण पर मांगा जवाब

जयपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपना जवाबी हमला तेज कर दिया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर कड़ा पलटवार किया है। राठौड़ ने कहा कि गहलोत को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सलाह पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी ही पार्टी के नेताओं के आचरण और व्यवहार पर आत्ममंथन करना चाहिए। यह विवाद अब राजस्थान की राजनीति में एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।

संस्थागत प्रक्रिया बनाम शक्ति प्रदर्शन

भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयुक्त से मुलाकात करने और अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। उन्होंने कांग्रेस के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि किसी शिकायत को लेकर सैकड़ों लोगों के साथ पहुंचना और शक्ति प्रदर्शन करना उचित नहीं है। राठौड़ के अनुसार, कांग्रेस नेताओं को समय लेकर एक सीमित प्रतिनिधिमंडल के साथ निर्वाचन आयुक्त के समक्ष अपने तथ्य और तर्क रखने चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कांग्रेस को यही सलाह दी थी और राठौड़ ने बताया कि कांग्रेस कभी 240 तो कभी 400 लोगों के साथ आयोग से मिलने की बात करती है, जबकि शिकायतों के समाधान के लिए संस्थागत मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है।

नेताओं के आचरण पर उठाए सवाल

मदन राठौड़ ने SIR और निर्वाचन आयोग के मुद्दे से आगे बढ़ते हुए राहुल गांधी के आचरण और जेएनयू प्रकरण को भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया। उन्होंने अशोक गहलोत से सीधा सवाल किया कि वे राहुल गांधी के उस कथित व्यवहार पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, जिसे भाजपा महिला पुलिसकर्मी के प्रति अभद्रता बता रही है। राठौड़ ने कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है और नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप ही आचरण होना चाहिए। इसके अलावा, जेएनयू से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए राठौड़ ने कांग्रेस सांसद एवं प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल अकॉइजाम पर छात्राओं से संबंधित लगे गंभीर आरोपों पर भी कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान के मामलों में राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट रखना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ये अभी आरोप हैं और मामले में दोष तय करने का आधार कानूनी प्रक्रिया और जांच होगी।

SIR को बताया लोकतंत्र के लिए जरूरी

भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मन्नालाल रावत ने SIR का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि एक विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने तर्क दिया कि मतदाता सूची के शुद्धीकरण की इस प्रक्रिया को राजनीतिक अविश्वास के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। रावत ने याद दिलाया कि मतदाता सूची का शुद्धीकरण कोई नई व्यवस्था नहीं है और पंडित जवाहरलाल नेहरू के शासनकाल में भी ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई गई थीं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहा है और रावत ने कांग्रेस की आपत्तियों को दुखद बताते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए भरोसेमंद मतदाता सूची का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने खुद पहले मतदाता सूची में सुधार की मांग की थी, इसलिए अब SIR पर सवाल उठाने के बजाय इसके तथ्यों पर चर्चा होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की वैधता और केरल का उदाहरण

मन्नालाल रावत ने अपने तर्कों को मजबूती देने के लिए केरल का उदाहरण दिया, जहां SIR की प्रक्रिया के बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को किसी एक विशेष राजनीतिक दल के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश करना पूरी तरह से गलत है। रावत ने यह दावा भी किया कि देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी SIR की प्रक्रिया को वैध माना है। भाजपा के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का यह मुद्दा अब केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच एक बड़े राजनीतिक युद्ध का मैदान बन चुका है।

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