India-US Tariff Deal:भारत-अमेरिका के बीच क्या खत्म होगा टैरिफ? BTA मीटिंग में होगा फैसला

India-US Tariff Deal: अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच शून्य-से-शून्य शुल्क संभव हो सकता है क्योंकि दोनों ही विकसित और उन्नत राष्ट्र हैं. जबकि भारत और US

Apr 14, 2025 - 06:00
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India-US Tariff Deal:भारत-अमेरिका के बीच क्या खत्म होगा टैरिफ? BTA मीटिंग में होगा फैसला

India-US Tariff Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) को लेकर हाल ही में चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। दोनों देशों के अधिकारी मार्च से इस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, और इस वर्ष सितंबर-अक्टूबर तक पहले चरण को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। उद्देश्य साफ़ है—191 अरब डॉलर के मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना। लेकिन इस दिशा में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या "शून्य-के-लिए-शून्य शुल्क रणनीति" जैसी पहल इन दो देशों के बीच संभव है?

आर्थिक असमानता बन रही है बाधा

भारत और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं विकास के अलग-अलग स्तर पर हैं। अमेरिका जहां एक विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था है, वहीं भारत एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है जो अभी भी कई क्षेत्रों में संरचनात्मक विकास और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा की राह पर है। यही कारण है कि विशेषज्ञों का मानना है कि शून्य-के-लिए-शून्य शुल्क नीति, यानी दोनों पक्ष एक-दूसरे की आयातित वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करें, फिलहाल एक व्यवहारिक विकल्प नहीं है।

भारत की रणनीतिक स्थिति

कुछ व्यापार विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भारत, अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्कों से निपटने के लिए अमेरिका के समक्ष यह प्रस्ताव रख सकता है कि चुनिंदा उत्पादों के लिए "शून्य-के-लिए-शून्य शुल्क" लागू किया जाए। इससे भारत को लाभ हो सकता है यदि समझौता वस्तुओं और सेवाओं के क्षेत्र के हिसाब से संतुलित रूप से डिजाइन किया जाए।

एक अधिकारी ने स्पष्ट किया, "यह ज़रूरी नहीं कि यदि अमेरिका इलेक्ट्रॉनिक्स पर शुल्क हटाए तो भारत भी वही करे। व्यापार समझौते हमेशा क्षेत्र-विशिष्ट और परस्पर सहमति पर आधारित होते हैं।"

अमेरिका-ईयू समझौते की तुलना

जहां भारत-अमेरिका के बीच यह रणनीति जटिल लगती है, वहीं अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच "शून्य-से-शून्य" शुल्क नीति की संभावना ज़्यादा मजबूत दिखती है। इसका कारण दोनों की समान आर्थिक स्थिति और उच्च औद्योगिक आधार है। ऐसे राष्ट्रों के बीच शुल्क मुक्त व्यापार अपेक्षाकृत आसान होता है, जबकि भारत जैसे देश के लिए यह नीति घरेलू उद्योगों के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

आगे की राह

भारत और अमेरिका ने आने वाले हफ्तों में क्षेत्र-विशिष्ट वार्ताओं को अंजाम देने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मार्च के अंतिम सप्ताह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चार दिवसीय वार्ता के बाद लिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ताएं वस्त्र, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में की जाएंगी।

भारत की व्यापार वार्ता क्षमता की सराहना करते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भारत आज व्यापार समझौते पर बातचीत करने के मामले में अन्य देशों की तुलना में कहीं आगे है।"

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