दिल्ली हाई कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं की याचिका पर सुनवाई, एसईएम कोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती
दिल्ली हाई कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट में आज कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों नेता इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं और उनके ये मामले अभी तक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट यानी SEM कोर्ट में चल रहे थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर आज ही तत्काल सुनवाई करने पर अपनी सहमति जताई थी, जिसके बाद इस अहम मामले पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इन दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने के लिए स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किए गए आदेश को सीधे तौर पर चुनौती दी है और याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देते हुए अदालत से तुरंत राहत की मांग की है, जिस पर आज सुनवाई की जा रही है।
सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच कर रही है दो मामलों की सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट के जज सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच आज मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रही है। इसमें पहला मामला सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई का है। वहीं दूसरा मामला नेहा बोरा की ओर से स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड और श्योरिटी लाने के लिए कहा गया था। अदालत इन दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए पक्षों की दलीलें सुन रही है।
मंगलवार को हाई कोर्ट का किया गया था रुख
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए बीते दिन मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। दास और रांका की ओर से हाई कोर्ट में रात के समय भी इस मामले पर सुनवाई किए जाने का विशेष अनुरोध किया गया था। चूंकि दशहरा के पावन अवसर पर मंगलवार को हाई कोर्ट में आधिकारिक तौर पर छुट्टी थी, इसलिए तात्कालिक सुनवाई नहीं हो पाई थी। अब इसी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट आज निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनवाई कर रहा है।
न्यायिक हिरासत बढ़ाने का दिया गया था आदेश
मंदिर मार्ग पुलिस थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बीते सोमवार को दोनों नेताओं को पेश किए जाने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत को दो दिन और बढ़ाने का आधिकारिक आदेश दिया था। इससे पहले दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लगाई गई पाबंदियों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के बाद 13 अक्टूबर को शुरुआती तौर पर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसी शुरुआती और बाद की कार्यवाहियों को कानूनी रूप से चुनौती दी गई है।
जमानत की कार्यवाही में जानबूझकर देरी का गंभीर आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को रोकने के लिए इस पूरे मामले में जमानत की कार्यवाही में जानबूझकर देरी की जा रही है। अपनी मुख्य याचिका में दास और रांका ने विशेष मजिस्ट्रेट के उस आदेश को पुरजोर तरीके से चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें दो दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उन्होंने अपनी दलील में यह बात कही है कि यह पूरा आदेश देश की कानूनी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन करता है। इसके साथ ही यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को मिले उनके मौलिक अधिकार यानी स्वतंत्रता के अधिकार का भी सीधा हनन करता है।
पिछले 6 दिन से हिरासत में हैं रांका और दास
याचिका में इस विशेष आदेश को पूरी तरह से अवैध और मनमाना बताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि आवश्यक जमानतदारों को कई बार अदालत और संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेश किए जाने के बावजूद सौरव दास और आशुतोष रांका पिछले 6 दिनों से लगातार हिरासत में जीवन बिता रहे हैं। जानकारी के अनुसार दास और रांका को सबसे पहले 14 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा पांच दिन की न्यायिक हिरासत के लिए भेजा गया था। अदालत इस पूरी स्थिति और कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि न्यायिक हिरासत और जमानत प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ है या नहीं।
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