भारत न तो फ्रांस है और न ही बांग्लादेश, विपक्ष पर भड़के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर भारत में हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। जानिए इस पूरी राजनीतिक बहस और रिजिम चेंज विवाद की पूरी खबर।

Oct 18, 2026 - 22:35
 0  0
भारत न तो फ्रांस है और न ही बांग्लादेश, विपक्ष पर भड़के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को विपक्ष पर एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भारत में हिंसा भड़काने की साजिश करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि बांग्लादेश और फ्रांस में देखी गई अशांति जैसी अशांति भारत में फैलाने की कोशिश की जा रही है। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से, किरेन रिजिजू ने यह आरोप लगाया कि भारत विरोधी गैंग और कुछ नेताओं ने देश के युवाओं को भड़काने और सड़कों पर हिंसा भड़काने के लिए गहरी मिलीभगत की है और इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है और पक्ष-विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

अपनी बात को विस्तार देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बांग्लादेश में हुई हिंसक घटना और फ्रांस में हुए दंगे, आगजनी और लूटपाट जैसी घटनाएं ठीक वैसी ही थीं, जैसी खतरनाक साजिश भारत के लिए भी रची गई थी। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी गिरोहों और कुछ राजनेताओं ने मिलकर युवाओं को भड़काने और हमारी सड़कों पर हिंसा फैलाने की योजना बनाई थी। उनका यह बयान दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इलेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं और स्टूडेंट एक्टिविस्ट द्वारा सरकार बदलने का जिक्र किया गया था, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में रिजिम चेंज को लेकर भारी सियासी घमासान मचा हुआ है।

देश में सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर बात करते हुए किरेन रिजिजू ने बहुत कड़े शब्दों में कहा कि लेकिन जिन्होंने यह खतरनाक साजिश रची, वे यह भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। भारत में शासन परिवर्तन बिल्कुल संभव है, लेकिन यह केवल और केवल चुनावों के जरिए हो सकता है, किसी बाहरी ताकतों या सोरोस के जरिए नहीं। केंद्रीय मंत्री ने अपने इस दावे के समर्थन में कुछ ठोस सबूत पेश करने की कोशिश करते हुए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा और देश के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है और इस साझा किए गए वीडियो में वे खुले तौर पर शासन परिवर्तन की वकालत करते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके बाद से विवाद और अधिक गहरा गया है।

दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद के केंद्र में आए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सरकार और सत्ता पक्ष के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशांत भूषण ने सरकार के उस कथित आरोप को पूरी तरह बकवास बताया है जिसमें यह कहा जा रहा था कि यह आंदोलन विपक्ष की लीडरशिप में सरकार बदलने की कोई सोची-समझी साजिश या ऑपरेशन था। अपनी सफाई पेश करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि यह सरकार लगातार कहती रहती है कि यह विपक्ष का सरकार बदलने का ऑपरेशन है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ इस देश में चुनावी प्रजातंत्र को बचाने की पुरजोर अपील कर रहे हैं। अगर देश में इसी तरह की बर्बरता जारी रही, तो निश्चित रूप से लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलेगी।

अपने बयान को और आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सवालिया लहजे में कहा कि हम सभी देश में सरकार बदलना चाहते हैं, तो क्या इसमें कुछ भी गलत है? उन्होंने तर्क दिया कि सरकार बदलना हर एक देश के नागरिक का मौलिक प्रजातांत्रिक अधिकार है। इसके अलावा, सरकार के खिलाफ असंतोष या नाराजगी पैदा करना कोई भी कानूनी जुर्म नहीं है। इसके बावजूद देश में रिजिम चेंज की इस पूरी बहस को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों तरफ से लगातार तीखे बयान सामने आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के इन आरोपों ने एक बार फिर से देश की राजनीति में कानून व्यवस्था, छात्र आंदोलनों और चुनावी प्रक्रियाओं की पवित्रता को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow