राजनाथ सिंह ने एससीओ में पाकिस्तान को लताड़ा, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड को लेकर दिया कड़ा संदेश

ताजिकिस्तान के दुशांबे में एससीओ बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इसहाक डार की मौजूदगी में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और दोहरे मापदंडों

Oct 20, 2026 - 18:35
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राजनाथ सिंह ने एससीओ में पाकिस्तान को लताड़ा, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड को लेकर दिया कड़ा संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 19 और 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उपप्रधानमंत्री इसहाक डार के सामने आतंकवाद को विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उनके इस स्पष्ट और दो टूक संदेश ने क्षेत्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत के अडिग रुख को एक बार फिर से पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा है, जहां पाकिस्तान के प्रतिनिधि भी सीधे तौर पर मौजूद थे।

बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। आतंकवाद के कारण न केवल निर्दोष लोगों की जान जाती है, बल्कि निवेश और व्यापार भी बड़े पैमाने पर बाधित होते हैं। इसके साथ ही आतंकवाद समाज में कट्टरता फैलाता है और हमारे युवाओं को उन अवसरों से पूरी तरह वंचित रखता है, जिनके वे वास्तविक हकदार हैं। यही कारण है कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में और किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता है, और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट होने की आवश्यकता है।

आतंकवाद के वित्तीय पोषण और सुरक्षित पनाहगाहों पर तीखा प्रहार

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को आर्थिक मदद देने वालों के लिए किसी भी तरह की गुंजाइश न होने पर विशेष रूप से जोर दिया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंक से निपटने में किसी भी प्रकार का कोई डबल स्टैंडर्ड यानी दोहरा मापदंड नहीं हो सकता है। जो लोग आतंकवादियों को आर्थिक मदद देते हैं, उनका समर्थन करते हैं या फिर उन्हें अपने यहां सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराते हैं, उनके लिए दुनिया में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से समाप्त करना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आतंकवाद के इस पूरे नेटवर्क और इसके समर्थकों पर अपनी यह खरी-खरी बातें कह रहे थे, ठीक उसी समय पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार उनके बिल्कुल सामने बैठे हुए थे।

सप्लाई चेन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास की अपील

आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने के साथ-साथ राजनाथ सिंह ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने पर भारत के दृष्टिकोण को एक बार फिर से दोहराया, ताकि पूरे क्षेत्र में स्थायी समृद्धि सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज हम एक ऐसे दौर में रह रहे हैं जहां वैश्विक आर्थिक माहौल पूरी तरह से अनिश्चित बना हुआ है। दुनिया भर में चल रहे संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण सप्लाई चेन यानी आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह बाधित हो रही है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा भी वर्तमान समय में हमारे लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।

नई तकनीक आज तेजी से अर्थव्यवस्थाओं के स्वरूप को बदल रही है और साथ ही नए विभाजन भी पैदा कर रही है और इसलिए शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ का मूल्यांकन इस मुख्य आधार पर किया जाना चाहिए कि क्या यह संगठन कोई साझा आधार खोज पाने में सफल होता है और उस पर मिलकर काम कर पाता है या नहीं। बदलते हुए इस ग्लोबल इकोनॉमिक एनवायरनमेंट में सभी एससीओ देशों को मिलकर रेजिलिएंट सप्लाई चेन्स, बेहतर ट्रेड और इन्वेस्टमेंट तथा टेक्नोलॉजी-ड्रिवन डेवलपमेंट यानी तकनीक आधारित विकास पर मिलकर काम करने की बहुत अधिक आवश्यकता है।

भारत अपने एससीओ पार्टनर्स के साथ सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में यह भी विश्वास दिलाया कि भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर विमेन-लेड डेवलपमेंट यानी महिला-नेतृत्व वाले विकास और क्लीन एनर्जी यानी स्वच्छ ऊर्जा तक, अपने सभी एससीओ पार्टनर्स के साथ अपना अनुभव शेयर करने और मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और भारत का यह दृष्टिकोण क्षेत्र के सभी देशों के साथ आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारी सफलता का सही पैराग्राफ या मापदंड इस बात से होना चाहिए कि हमने अपने युवाओं के लिए कितने नए मौके बनाए हैं, अपने देश के एंटरप्रेन्योर्स यानी उद्यमियों के लिए कौन-कौन से नए मार्केट खोले हैं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच किस प्रकार के मजबूत कनेक्शन स्थापित किए हैं।

उल्लेखनीय है कि शंघाई सहयोग संगठन के शासनाध्यक्षों की परिषद की पिछली बैठक नवंबर 2025 में रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित की गई थी। उस महत्वपूर्ण बैठक में भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया था, जबकि इस बार ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में हो रही 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संभाला है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि भारत हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति को पूरी दृढ़ता के साथ रखता है और क्षेत्रीय शांति तथा आर्थिक विकास के लिए पड़ोसी देशों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब करने से कभी पीछे नहीं हटता है।

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