राम मंदिर चंदा विवाद: अविमुक्तेश्वरानंद ने चंपत राय पर कसा तंज, बताया नाम का अर्थ

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर दान चोरी के आरोपों पर चंपत राय पर तंज कसा और जांच की मांग की। जानें पूरा मामला।

Jun 11, 2026 - 16:35
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राम मंदिर चंदा विवाद: अविमुक्तेश्वरानंद ने चंपत राय पर कसा तंज, बताया नाम का अर्थ

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए आए दान के रुपयों की कथित चोरी को लेकर एक अत्यंत तीखा और विवादित बयान दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम लेते हुए उन पर तंज कसा और उनके नाम का अर्थ समझाते हुए गंभीर आरोप लगाए। शंकराचार्य ने कहा कि चोरी की खबरें कहीं बाहर से नहीं बल्कि वहीं से निकलकर आई हैं। उन्होंने दावा किया कि यह चोरी कोई आज की बात नहीं है बल्कि शिलापूजन के समय से ही निरंतर चली आ रही है। उनके अनुसार अयोध्या में दान की राशि और संसाधनों का दुरुपयोग एक लंबे समय से हो रहा है।

चंपत शब्द का अर्थ और तंज

अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने बयान में चंपत शब्द की भाषाई व्याख्या करते हुए कहा कि चम्प एक धातु है जिससे चंपत शब्द की उत्पत्ति हुई है। उन्होंने विस्तार से समझाते हुए कहा कि चम्प का वास्तविक अर्थ होता है किसी चीज को लेकर भाग जाना या गायब हो जाना। उन्होंने इसी अर्थ को चंपत राय के नाम से जोड़ते हुए तंज कसा कि वे चंपत हो गए यानी लेकर भाग गए और शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि अयोध्या में भूमिपूजन के समय से लेकर आज तक निरंतर चोरी की घटनाएं हो रही हैं और भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

जमीन सौदों और संपत्ति पर सवाल

भ्रष्टाचार के आरोपों को और विस्तार देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या में हुए जमीन के सौदों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां ऐसे हालात देखे गए हैं जहां महज दो-दो मिनट के भीतर लाख-लाख रुपये की कीमत वाले प्लॉट करोड़ों रुपये के हो जाते थे। उन्होंने इन वित्तीय विसंगतियों को चोरी का ही एक रूप बताया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया के दौरान वित्तीय पारदर्शिता का अभाव रहा है जिसके कारण इस तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

महंत कमल नयन दास की मांग

इस पूरे विवाद में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की मांग की है और उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की अच्छे ढंग से जांच होनी चाहिए और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए उसे कठोर दंड मिलना चाहिए। कमल नयन दास ने किसी का नाम लिए बिना उन लोगों पर निशाना साधा जिनकी आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि जिनकी कभी साइकिल पर चलने की हैसियत नहीं थी आज उनके पास बड़ी-बड़ी इमारतें और बिल्डिंग हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईमानदारी पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि मुख्यमंत्री इस मामले में जरूर कड़ा एक्शन लेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन आरोपों से मंदिर की बहुत बदनामी हो रही है इसलिए एक न्यायिक जांच होनी अत्यंत आवश्यक है।

राजनीतिक विवाद और ट्रस्ट का पक्ष

यह मामला तब और गरमा गया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में दावा किया कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का कोई साफ हिसाब-किताब नहीं है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि दान की एक बड़ी राशि गायब हो गई है। इन आरोपों के जवाब में चंपत राय ने स्पष्ट किया था कि ट्रस्ट के सभी लेन-देन पूरी तरह से पारदर्शी हैं और उनका नियमित ऑडिट किया जा रहा है। हालांकि चंपत राय के इस स्पष्टीकरण से विपक्ष और आलोचक संतुष्ट नहीं हैं। राम मंदिर करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है इसलिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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