अडानी एंटरप्राइजेज की बड़ी छलांग: क्या फिर बनेगी शेयर बाजार की सबसे ताकतवर कंपनी?

अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 2026 में 34 प्रतिशत की तेजी आई। 4 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप इजाफे के साथ गौतम अडानी फिर बने एशिया के सबसे अमीर।

Aug 18, 2026 - 13:35
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अडानी एंटरप्राइजेज की बड़ी छलांग: क्या फिर बनेगी शेयर बाजार की सबसे ताकतवर कंपनी?

गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह की प्रमुख कंपनी, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, भारतीय इक्विटी बाजार में एक बार फिर अपनी पुरानी स्थिति में लौट आई है। कंपनी अब उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां वह तीन साल से भी ज्यादा समय पहले समूह पर आए संकट से ठीक पहले थी। अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में जबरदस्त रिकवरी देखी गई है और यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी 50 इंडेक्स पर साल का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर बनने की राह पर है। कई बड़ी चुनौतियों का सामना करने के बाद अब निवेशकों का भरोसा इस कंपनी पर लगातार बढ़ रहा है।

2026 में शेयरों की जबरदस्त रफ्तार

मौजूदा साल 2026 में अब तक अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 34 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की गई है। इस बढ़त के साथ यह कंपनी एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स पर साल की सबसे ज्यादा बढ़त वाली कंपनी बनने की ओर अग्रसर है। इससे पहले साल 2022 के अंत में कंपनी के पास यह स्थान था, जो जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च की शॉर्ट-सेलर रिपोर्ट आने से कुछ हफ्ते पहले की बात है। उस रिपोर्ट के कारण बाजार में भारी बिकवाली हुई थी, जिससे एक समय इस पावर-से-पोर्ट्स ग्रुप की मार्केट वैल्यू 150 बिलियन डॉलर से ज्यादा घट गई थी। अब कंपनी ने उस नुकसान की भरपाई करते हुए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

क्यों आई कंपनी के शेयरों में इतनी तेजी?

अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में यह तेजी द कैपिटल ग्रुप, गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक और एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड जैसे बड़े निवेशकों द्वारा शेयर खरीदने के कारण आई है। समूह अब शॉर्ट-सेलर के हमले, अमेरिकी अधिकारियों द्वारा गौतम और सागर अडानी पर लगाए गए रिश्वतखोरी के आरोपों और भारत के मार्केट रेगुलेटर की जांच के बाद निवेशकों का भरोसा फिर से हासिल कर रहा है। जून के महीने में मॉर्गन स्टेनली ने अडानी एंटरप्राइजेज को 'ओवरवेट' रेटिंग दी थी और वॉल स्ट्रीट बैंक ने इस स्टॉक पर अपनी कवरेज शुरू की थी। इस वापसी से अडानी समूह पर निवेशकों का ध्यान फिर से केंद्रित हो रहा है, जिसे भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर बूम का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। निवेशक अब समूह के पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स और पावर बिजनेस में बड़े पैमाने पर पैसा लगा रहे हैं। इसके साथ ही विदेशी लेंडर भी निवेश करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। समूह के डेटा-सेंटर जॉइंट वेंचर, अडानीकनेक्स प्राइवेट लिमिटेड (एजकनेक्स के साथ) ने हाल ही में अपने विस्तार कार्यों के लिए लगभग 800 मिलियन डॉलर का लोन हासिल किया है।

अडानी समूह पर निवेशकों के भरोसे का कारण

वेंचुरा सिक्योरिटीज में रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा कि अडानी असल में इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत की ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ा रहे हैं और उन्होंने साल 2022 से ही इस मुख्य कंपनी पर 'बाय' रेटिंग बनाए रखी है। उनके अनुसार, बहुत कम बिजनेस ऐसे हैं जो 20 से 30 साल की भविष्य की स्पष्टता दे सकते हैं, जैसा कि अडानी के इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस दे सकते हैं। पिछले हफ्ते इस रिकवरी को और भी ज्यादा बढ़ावा मिला जब एक अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज ने अडानी परिवार पर लगे सिक्योरिटीज फ्रॉड के आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया। इससे साल 2024 का वह मामला खत्म हो गया जो लंबे समय से ग्रुप पर मंडरा रहा था। इसके अलावा, इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI इंक की हालिया समीक्षा में कई अडानी कंपनियों के फ्री-फ्लोट फैक्टर बढ़ाए गए हैं, जिससे इसके इंडेक्स में उनका वेटेज बढ़ गया है। इन बदलावों से उन पैसिव फंड्स की तरफ से खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है जो इंडेक्स को ट्रैक करते हैं।

विदेशी हिस्सेदारी और भविष्य की चुनौतियां

हालांकि रिकवरी तेज है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें अभी और समय लग सकता है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू वाली भारतीय कंपनियों में से अडानी एंटरप्राइजेज को सिर्फ 4 ब्रोकरेज कवर करते हैं, जो कि सबसे कम है। वहीं, प्राइम इन्फोबेस के डेटा के मुताबिक, जून में कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी। विदेशी हिस्सेदारी में इस गिरावट की एक वजह यह भी है कि ग्लोबल फंड्स ने इस साल की शुरुआत में भारतीय इक्विटी में अपना निवेश कम कर दिया था। इस कारोबार में लंबे समय के जोखिम भी जुड़े हुए हैं। मॉर्गन स्टेनली ने जून के अपने नोट में कहा था कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से रिटर्न मिलने में कई साल लग सकते हैं, जिससे अडानी समूह रीफाइनेंसिंग के जोखिम और रेगुलेटरी बदलावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।

ग्रुप के मार्केट कैप में 4 लाख करोड़ रुपये का इजाफा

इन चुनौतियों के बावजूद, यह ग्रुप उन निवेशकों के लिए एक बड़ा जरिया बना हुआ है जो भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर कहानी पर दांव लगाना चाहते हैं और ज्यादा जोखिम उठाने को तैयार हैं। इसी दिलचस्पी की वजह से इस साल ग्रुप के शेयरों की मार्केट वैल्यू में 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी ने गौतम अडानी को एशिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में फिर से टॉप पर पहुंचने में मदद की है। दुबई में आर्केवियम कैपिटल के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर मैक्सेंस विसेउ ने कहा कि भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर साइकिल कमाई का बेहतरीन मौका देता है। उन्होंने बताया कि अडानी में लौटने वाले निवेशक कानूनी स्थिति सामान्य होने, फंडिंग मिलने और प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने पर दांव लगा रहे हैं। कैपिटल ग्रुप, कतर होल्डिंग और दूसरे संस्थानों का बड़े ब्लॉक ट्रेड के जरिए निवेश करना इस भरोसे की शुरुआती पुष्टि है।

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