अबू धाबी के बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट पर ड्रोन हमला, जनरेटर रूम में लगी आग

अबू धाबी के बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद जनरेटर रूम में आग लग गई। सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं, हालांकि प्लांट के सभी सिस्टम सुरक्षित बताए गए हैं।

May 17, 2026 - 17:35
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अबू धाबी के बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट पर ड्रोन हमला, जनरेटर रूम में लगी आग

संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट में ड्रोन हमले के बाद हड़कंप मच गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी हिस्से में ड्रोन स्ट्राइक हुई, जिसके बाद वहां आग लगने की खबर सामने आई। इस घटना ने प्लांट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। ड्रोन हमले के कारण न्यूक्लियर पावर प्लांट की बाहरी परिधि में स्थित एक जनरेटर रूम में आग भड़क उठी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

आग पर पाया गया काबू और सुरक्षा स्थिति

अबू धाबी मीडिया कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ड्रोन स्ट्राइक की वजह से इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की आंतरिक सुरक्षा परिधि के ठीक बाहर स्थित एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में आग लग गई थी और घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा और दमकल विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया, जिससे प्लांट के मुख्य ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

किसी के हताहत होने की सूचना नहीं

राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी के भी हताहत होने या घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है। यूएई की फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने इस मामले में आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि प्लांट के सभी जरूरी और महत्वपूर्ण सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और नियामक संस्था ने यह भी साफ किया कि इस हमले का रेडियोलॉजिकल सुरक्षा स्तरों पर कोई असर नहीं पड़ा है और वातावरण पूरी तरह सुरक्षित है। प्लांट की सुरक्षा प्रणालियां पूरी तरह सक्रिय हैं और किसी भी प्रकार के विकिरण का खतरा नहीं है।

हमले के स्रोत की जांच जारी

यूएई के अधिकारियों ने इस गंभीर घटना की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन हमले के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर यह ड्रोन कहां से आया था। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालातों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं और यूएई प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि देश के ऊर्जा और परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत और अभेद्य बनाया जा रहा है। अभी तक इस ड्रोन हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन या समूह ने नहीं ली है। यूएई की ओर से जारी आधिकारिक बयान में भी फिलहाल किसी भी पक्ष को इस हमले के लिए सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया गया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्लांट का महत्व

वियना स्थित संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) से जब इस संबंध में समाचार एजेंसी एपी ने टिप्पणी करने का अनुरोध किया, तो उनकी ओर से तत्काल कोई जवाब नहीं दिया गया। बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट यूएई के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 20 अरब डॉलर की भारी-भरकम लागत से तैयार हुए इस प्लांट को यूएई ने दक्षिण कोरिया की तकनीकी मदद से बनाया था। यह प्लांट साल 2020 में पूरी तरह चालू हो गया था। उल्लेखनीय है कि यह अरब प्रायद्वीप पर स्थित पहला और एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र है, जो क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

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