अमेरिका का नया वीजा बॉन्ड नियम लागू 50 देशों पर शर्त भारत को राहत

अमेरिका ने 50 देशों के लिए वीजा बॉन्ड नियम को स्थायी बनाया। 3 अगस्त से बी-1 और बी-2 वीजा के लिए 20000 डॉलर तक का बॉन्ड देना होगा। भारत इस सूची में शामिल नहीं है।

Aug 2, 2026 - 12:35
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अमेरिका का नया वीजा बॉन्ड नियम लागू 50 देशों पर शर्त भारत को राहत

संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार ने वीजा बॉन्ड कार्यक्रम को अब एक स्थायी नीति के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम अमेरिकी आव्रजन और यात्रा नियमों में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है और इस नए और स्थायी नियम के तहत अब 50 विशिष्ट देशों के नागरिकों को अमेरिका में व्यापार या पर्यटन के उद्देश्य से प्रवेश करने के लिए एक बड़ी सुरक्षा राशि यानी बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। यह नियम मुख्य रूप से उन आवेदकों के लिए है जो बी-1 बिजनेस वीजा और बी-2 टूरिस्ट वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं। अमेरिकी सरकार द्वारा फेडरल रजिस्टर में जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह नया नियम 3 अगस्त से प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा।

वीजा बॉन्ड की शर्तें और वित्तीय विवरण

आधिकारिक अधिसूचना के विवरण के अनुसार इस वीजा बॉन्ड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी आगंतुक अपनी वीजा शर्तों का पूरी तरह पालन करें और वीजा की अवधि समाप्त होने से पहले अमेरिका से वापस लौट जाएं। इस नियम के तहत वीजा अधिकारियों को यह विवेकाधीन शक्ति दी गई है कि वे किसी भी पात्र आवेदक से वीजा जारी करने से पहले बॉन्ड की मांग कर सकते हैं और इस बॉन्ड की राशि 20000 डॉलर तक हो सकती है जो भारतीय मुद्रा में लगभग 17 लाख रुपये के बराबर है। सरकार का मानना है कि यह वित्तीय सुरक्षा उन लोगों को रोकेगी जो वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से अमेरिका में रुक जाते हैं।

भारत की स्थिति और पड़ोसी देशों पर प्रभाव

भारतीय यात्रियों के लिए इस खबर में एक बड़ी राहत की बात यह है कि भारत को उन 50 देशों की सूची में शामिल नहीं किया गया है जिन पर यह वीजा बॉन्ड नियम लागू होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि भारतीय नागरिकों को बी-1 और बी-2 वीजा के लिए आवेदन करते समय फिलहाल कोई सुरक्षा बॉन्ड जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि आवश्यकता महसूस हुई तो अन्य देशों को भी इस योजना के दायरे में लाया जा सकता है। भारत के लिए राहत के बावजूद उसके पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल और भूटान को इस सूची में रखा गया है। इन देशों के नागरिकों को अब अमेरिका जाने के लिए इस नई वित्तीय शर्त को पूरा करना होगा।

पायलट प्रोजेक्ट से स्थायी नीति तक का सफर

वीजा बॉन्ड की यह योजना अचानक नहीं आई है बल्कि इसकी शुरुआत साल 2025 में एक पायलट प्रोजेक्ट यानी प्रायोगिक परियोजना के रूप में की गई थी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि क्या बॉन्ड लेने से वीजा ओवरस्टे यानी अवधि से अधिक रुकने की घटनाओं में कमी आती है और अमेरिकी सरकार ने इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों का गहन विश्लेषण किया और पाया कि इसके नतीजे सकारात्मक रहे हैं। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे एक अस्थायी प्रयोग के बजाय एक स्थायी कानून के रूप में स्थापित कर दिया गया है।

डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा

इस फैसले को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। जब यह योजना पायलट चरण में थी तब बॉन्ड की राशि 5000 डॉलर, 10000 डॉलर और 15000 डॉलर के स्तर पर रखी गई थी। लेकिन अब जब इसे स्थायी बनाया गया है तो 5000 डॉलर वाले विकल्प को पूरी तरह से हटा दिया गया है और अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 20000 डॉलर कर दिया गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन अब आव्रजन नियमों को लेकर और भी अधिक कठोर रुख अपना रहा है।

नियम के उद्देश्य और विशेषज्ञों की राय

अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि इस नियम के लागू होने से लोग वीजा की समय सीमा का सम्मान करेंगे और तय समय के बाद अमेरिका में अवैध रूप से नहीं ठहरेंगे। सरकार का लक्ष्य वित्तीय जवाबदेही के माध्यम से कानून का पालन सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर आव्रजन विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से उन वास्तविक यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा जो केवल घूमने या व्यापार के सिलसिले में अमेरिका जाना चाहते हैं और इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने पहले ही कई वीजा श्रेणियों की फीस में बढ़ोतरी कर दी है और आवेदकों के सोशल मीडिया खातों की जांच को भी पहले से कहीं अधिक सख्त बना दिया है।

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