अमेरिकी हमलों से भड़का ईरान, IRGC ने दी UAE को धमकी; नेतृत्व को लेकर क्या बोले रजा पहलवी?
अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर हमला किया है। आईआरजीसी ने यूएई को धमकी दी है और रजा पहलवी ने नेतृत्व के लिए अपनी तत्परता जताई है।
अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित खार्ग द्वीप पर एक बड़ा हमला किया है, जिससे मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के सैन्य ठिकानों को नष्ट करना था। खार्ग द्वीप ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, और इस पर हमले को ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद, ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है, जिसमें जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
खार्ग द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विवरण
अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खार्ग द्वीप पर स्थित ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए सटीक हमले किए गए। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने अपनी गतिविधियों को नियंत्रित नहीं किया, तो अगला निशाना देश का तेल बुनियादी ढांचा हो सकता है। 00% हिस्सा संभालता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगियों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। इस हमले के बाद द्वीप पर स्थित कई महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे क्षतिग्रस्त होने की खबरें हैं।
आईआरजीसी की यूएई को चेतावनी और क्षेत्रीय सुरक्षा
अमेरिकी हमलों के जवाब में, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक कड़ा बयान जारी किया है। आईआरजीसी ने सीधे तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को धमकी देते हुए कहा है कि वहां स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब ईरान के लिए वैध लक्ष्य हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी भी पड़ोसी देश की धरती का उपयोग ईरान के खिलाफ हमले के लिए किया जाता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस धमकी के बाद संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर जैसे खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और हवाई क्षेत्र की निगरानी तेज कर दी गई है।
रजा पहलवी का नेतृत्व और सत्ता परिवर्तन का संदेश
ईरान के भीतर और बाहर जारी उथल-पुथल के बीच, निर्वासन में रह रहे पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश जारी किया है। पहलवी ने घोषणा की है कि वह ईरान में एक संभावित संक्रमणकालीन चरण (Transition Phase) के दौरान नेतृत्व संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से ईरान के भीतर और बाहर ऐसे सक्षम व्यक्तियों और विशेषज्ञों की पहचान कर रहे हैं जो एक नई व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकें। पहलवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के भीतर आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण असंतोष की खबरें मिल रही हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी ईरान के लोकतांत्रिक भविष्य का समर्थन करने का आह्वान किया है।
खाड़ी देशों में सुरक्षा अलर्ट और तेल बुनियादी ढांचे पर संकट
खार्ग द्वीप पर हमले और आईआरजीसी की धमकियों के बाद वैश्विक तेल बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। खाड़ी क्षेत्र के देशों ने अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों की तैनाती की है। अधिकारियों के अनुसार, ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक गश्त बढ़ा दी गई है ताकि तेल टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे और सऊदी अरब और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने भी अपनी सीमाओं पर सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया के कच्चे तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है।
अमेरिकी प्रशासन का रुख और भविष्य की चेतावनी
वाशिंगटन में अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं को सीमित करने के लिए अपनी 'अधिकतम दबाव' की नीति को जारी रखेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने की अनुमति नहीं देगा। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, कूटनीतिक रास्ते अभी भी खुले हैं, लेकिन सैन्य विकल्प मेज पर बने हुए हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या ईरान सीधे तौर पर अमेरिकी ठिकानों पर हमला करता है या अपने प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से प्रतिक्रिया देता है। क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ भी सक्रिय हो गए हैं, हालांकि वर्तमान स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है।
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