छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे का मौन व्रत, सरकार से की बातचीत की अपील
अन्ना हजारे ने दिल्ली के छात्रों के समर्थन में अहिल्यानगर में 2 घंटे का मौन व्रत रखा। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर संवाद की अपील की।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में आज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी अपना समर्थन दिया है। अन्ना हजारे ने आज अहिल्यानगर के वाडिया पार्क में दो घंटे का मौन आंदोलन किया और यह आंदोलन दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर डटे छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए किया गया था। आंदोलन के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब छात्रों के दर्द और उनकी समस्याओं का जिक्र करते हुए अन्ना हजारे काफी भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर देश में गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
भावुक हुए अन्ना हजारे
अहिल्यानगर के वाडिया पार्क में जब अन्ना हजारे मौन व्रत पर बैठे थे, तब वहां मौजूद लोगों ने उनके संवेदनशील पक्ष को देखा और छात्रों के संघर्ष और उनके द्वारा झेली जा रही कठिनाइयों को याद करते हुए अन्ना की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने मौन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि लोकतांत्रिक देश में युवाओं की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता और अन्ना हजारे का यह मौन आंदोलन पूरे दो घंटे तक चला, जिसमें उन्होंने बिना कुछ बोले सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने सरकार से पुरजोर अपील की कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ जल्द से जल्द बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाए।
प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
गौरतलब है कि इस मौन आंदोलन से पहले बुधवार को ही अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने दिल्ली में विद्यार्थियों के मौजूदा प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की कार्रवाई पर गहरा दुख व्यक्त किया था। अन्ना ने अपने पत्र में लिखा कि लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री को सुझाव दिया कि सरकार को छात्रों की मांगों को सुनने के लिए आगे आना चाहिए। अन्ना के अनुसार, हिंसा और दमन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकते, बल्कि बातचीत के जरिए ही किसी भी विवाद को सुलझाया जाना चाहिए।
जवाबदेही और शासन में सुधार
प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में अन्ना हजारे ने शासन व्यवस्था और मंत्रियों की जवाबदेही पर भी कड़े विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अगर किसी मुद्दे पर किसी मंत्री का इस्तीफा लिया जाता है, तो इससे सरकार कमजोर नहीं होती। इसके विपरीत, यह कदम दूसरे मंत्रियों को उनकी जवाबदेही के बारे में एक बहुत ही मजबूत संदेश देता है। अन्ना का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से शासन व्यवस्था में सुधार आता है और जनता का सरकार पर भरोसा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को बातचीत की मेज पर लाना ही सबसे सही रास्ता है।
लोकतांत्रिक तरीके से समाधान की मांग
अहिल्यानगर के वाडिया पार्क में आयोजित इस दो घंटे के मौन प्रदर्शन के समापन पर अन्ना हजारे ने एक बार फिर दोहराया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और उन्होंने कहा कि जो छात्र शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अन्ना हजारे के इस समर्थन से दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन को एक नई नैतिक शक्ति मिली है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह टकराव का रास्ता छोड़कर छात्रों के साथ सीधा संवाद स्थापित करे ताकि उनकी समस्याओं का उचित समाधान निकाला जा सके।
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