हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद शुद्धिकरण पर FIR, अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज

हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद शुद्धिकरण करने वालों पर FIR दर्ज। पुलिस ने SC/ST एक्ट और BNS की धाराओं में जांच शुरू की।

Sep 8, 2026 - 19:35
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हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद शुद्धिकरण पर FIR, अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के संपन्न होने के बाद वहां किए गए तथाकथित शुद्धिकरण के मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। हल्द्वानी कोतवाली में इस घटना के संबंध में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस प्रशासन ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला सामाजिक और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें एक राष्ट्रीय स्तर के नेता के अपमान और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं।

कानूनी धाराएं और जांच का नेतृत्व

यह कानूनी मामला वकील अंजू द्वारा दी गई एक औपचारिक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) को शामिल किया है। दर्ज की गई शिकायत में मुख्य रूप से जाति-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देने, सामाजिक रूप से अपमानित करने और अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति के प्रति नफरत तथा तिरस्कार की भावना रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हल्द्वानी के SP (क्राइम) डॉ. जगदीश चंद्र को इस पूरी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

घटनाक्रम का पूरा विवरण

पुलिस को सौंपी गई शिकायत के विवरण के अनुसार, घटनाक्रम की शुरुआत 8 अगस्त को हुई थी जब रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का एक बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के दो दिन बाद, यानी 10 अगस्त को, कुछ अज्ञात लोगों ने उसी स्थान पर पहुंचकर तथाकथित शुद्धिकरण की रस्म निभाई। इस पूरी प्रक्रिया के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिससे विवाद और बढ़ गया और शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस रस्म के माध्यम से न केवल जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दिया गया, बल्कि अनुसूचित जाति से आने वाले एक सम्मानित व्यक्ति का सार्वजनिक अपमान भी किया गया।

भ्रामक वीडियो और तकनीकी जांच

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस घटना से जुड़े कुछ भ्रामक और संभवतः एडिट किए गए वीडियो के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक नफरत फैलाने की कोशिश की गई है। पुलिस अब उन अज्ञात लोगों की पहचान करने में जुटी है जो इस शुद्धिकरण की रस्म में प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। साथ ही, उन लोगों की भी तलाश की जा रही है जिन्होंने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार किए गए या छेड़छाड़ किए गए वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। जांच टीम वीडियो के मूल स्रोत का पता लगाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या वीडियो के साथ किसी भी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ की गई थी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अन्य राज्यों में असर

इस घटना का असर केवल हल्द्वानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज देश की संसद तक सुनाई दी। मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वयं राज्यसभा में इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया और शुद्धिकरण की रस्म निभाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और केस दर्ज करने की मांग की। इसके बाद, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, शुद्धिकरण की घटना में शामिल बताए जा रहे दो युवकों ने हल्द्वानी में ही उनके खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत जवाबी मामला दर्ज कराया और इसके अतिरिक्त, 4 सितंबर को कर्नाटक के बेंगलुरु में भी इस मामले से जुड़ी एक जीरो FIR दर्ज की गई। आर और रामप्पा ने दर्ज कराई है, जिसमें बीजेपी नेताओं के खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट, SC/ST एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।

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