आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आर्टिकल 21 और खतरनाक कुत्तों को मारने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में आर्टिकल 21 के तहत सुरक्षा का अधिकार दिया है और खतरनाक कुत्तों को मारने की अनुमति दी है।

May 19, 2026 - 18:35
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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आर्टिकल 21 और खतरनाक कुत्तों को मारने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की पीठ ने उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिनमें नवंबर 2025 में जारी किए गए नसबंदी और पुनर्वास संबंधी निर्देशों को वापस लेने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इंसानों को गरिमा के साथ और भयमुक्त वातावरण में रहने का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए कड़े कदम उठाना आवश्यक है।

अनुच्छेद 21 और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का विशेष रूप से उल्लेख किया। न्यायमूर्ति मेहता ने लिखा कि अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को सार्वजनिक स्थानों पर बिना किसी शारीरिक हमले या कुत्ते के काटने जैसी जानलेवा घटनाओं के डर के घूमने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि राज्य इस मामले में मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता। मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) के ऐतिहासिक मामले का संदर्भ देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जीवन का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं है, बल्कि इसमें सुरक्षा और सम्मान के साथ जीना शामिल है। नागरिकों को कुत्तों के खतरों से मुक्त होकर जीवन जीने का पूरा अधिकार है और इसी आधार पर यह फैसला सुनाया गया है।

मामले का घटनाक्रम और कानूनी यात्रा

आवारा कुत्तों का यह मामला 28 जुलाई 2025 को तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों के हमलों से होने वाली रेबीज की मौतों का स्वतः संज्ञान लिया। इसके बाद 11 अगस्त को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के आवासीय क्षेत्रों से कुत्तों को हटाकर 8 हफ्तों के भीतर शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया। इस आदेश के विरोध में कई एनजीओ और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने याचिकाएं दायर कीं। 23 अगस्त को कोर्ट ने निर्देश दिया कि पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी के बाद ही छोड़ा जाए और खूंखार कुत्तों को कैद में रखा जाए। नवंबर 2025 में कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने और सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े निर्देश दिए थे। मंगलवार को आए फैसले ने इन सभी पुराने निर्देशों को बरकरार रखा है।

आंकड़े और खतरनाक कुत्तों के लिए निर्देश

अदालत ने देश में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में 1084 कुत्ते के काटने की घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में लगभग 2 लाख मामले सामने आए। कोर्ट ने आईजीआई हवाई अड्डे और सूरत में जर्मन यात्री पर हुए हमले का भी जिक्र किया। इन तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जो आवारा कुत्ते खतरनाक हैं या गंभीर रूप से बीमार हैं, उन्हें इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। नगर निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण सुनिश्चित करें, और रेबीज से संक्रमित कुत्तों को वापस सार्वजनिक स्थानों पर न छोड़ें।

राज्यों और एनएचएआई को सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी दी है कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ अवमानना और दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। प्रत्येक जिले में कम से कम एक एबीसी (Animal Birth Control) केंद्र स्थापित करना अनिवार्य होगा। एनएचएआई (NHAI) को राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए पुराने परिवहन वाहनों की तैनाती और एक निगरानी ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो अधिकारी इन निर्देशों को लागू करेंगे, उन्हें कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा और उनके खिलाफ सामान्यतः कोई एफआईआर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

डार्विन के सिद्धांत का उल्लेख

अदालत ने एक बहुत ही गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आवारा कुत्तों की समस्या को अनियंत्रित छोड़ दिया गया, तो इसका परिणाम डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत की ओर वापसी जैसा होगा और ऐसी स्थिति में 'योग्यतम की उत्तरजीविता' (Survival of the Fittest) का सिद्धांत सार्वजनिक जीवन को नियंत्रित करने लगेगा, जो एक संवैधानिक लोकतंत्र और विधि के शासन के पूरी तरह खिलाफ होगा। कोर्ट ने कहा कि राज्य का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन की रक्षा करे और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण और रखरखाव करे।

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