इमरान खान को बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट ने जेल से अस्पताल भेजने और इलाज का दिया आदेश
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को अदियाला जेल से अस्पताल भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड के गठन और साप्ताहिक पारिवारिक मुलाकातों की अनुमति दी है।
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान को एक बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इमरान खान, जो पिछले 3 साल से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं, उन्हें तुरंत शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक उन्हें अस्पताल में ही रखा जाए ताकि उनका उचित इलाज और आवश्यक मेडिकल जांच सुनिश्चित की जा सके।
मेडिकल बोर्ड का गठन और सुरक्षा के कड़े निर्देश
तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए अधिकारियों को इमरान खान के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री को जेल से अस्पताल ले जाते समय सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं। इसके साथ ही, प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि अस्पताल के बाहर कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रित रहे और किसी भी प्रकार की अशांति न फैले ताकि अस्पताल के अन्य मरीजों को परेशानी न हो।
मेडिकल रिकॉर्ड और स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता
सुनवाई के दौरान जस्टिस शाहिद वहीद ने इमरान खान के मेडिकल रिकॉर्ड को लेकर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अदालत को अब तक उनका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड क्यों नहीं दिया गया है। जस्टिस वहीद ने टिप्पणी की कि अब तक जो जानकारी दी गई है, वह केवल मेडिकल रिपोर्ट का सारांश है, न कि विस्तृत रिपोर्ट। अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई से पहले इमरान खान का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड जमा किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार रिकॉर्ड अदालत में पेश होने के बाद उसे गोपनीय नहीं रखा जाएगा।
जस्टिस नईम अख्तर अफगान ने मेडिकल रिपोर्ट में सुझाई गई एंजियोग्राफी के बारे में सवाल किया कि क्या यह जेल के भीतर संभव है। इस पर इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल ने बताया कि यह प्रक्रिया जेल के बाहर किसी अस्पताल में ही की जा सकती है। जस्टिस शाहिद वहीद ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए चिंता जताई कि इमरान खान की नब्ज और दिल की हालत सामान्य नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया है, जिसके लिए तत्काल विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता है।
पारिवारिक मुलाकातें और मीडिया पर प्रतिबंध
अदालत ने इमरान खान और उनकी बहनों के बीच मुलाकातों पर लगी पाबंदियों पर भी नाराजगी जताई। जजों ने कहा कि अपने परिवार के सदस्यों से मिलना किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और उन्होंने सवाल किया कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट द्वारा पहले दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। एडवोकेट जनरल ने अदालत को सूचित किया कि पिछले 3 सालों में इमरान खान अपनी बहनों से 48 बार मिल चुके हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी मुलाकातों और उनके बच्चों के साथ हुई बातचीत का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
पीटीआई के वकील उज़ैर भिंडारी ने अदालत से अनुरोध किया कि इमरान खान को उनकी बहनों और डॉक्टरों से मिलने की अनुमति दी जाए और शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में उनकी पूरी जांच हो। अदालत ने हफ्ते में एक बार परिवार से मिलने की इजाजत तो दी, लेकिन साथ ही यह शर्त भी रखी कि इन मुलाकातों को लेकर मीडिया में कोई बयानबाजी नहीं होगी। जजों ने कहा कि पीटीआई और परिवार को एक हलफनामा देना होगा कि मुलाकातों के बाद मीडिया से कोई बातचीत नहीं की जाएगी। जस्टिस नईम अख्तर अफगान ने जोर देकर कहा कि इमरान खान की सेहत और उनके इलाज को किसी भी तरह से राजनीतिक गतिविधि का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
कानूनी मामले और अस्पताल का खर्च
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के खिलाफ चल रहे सभी मामलों की विस्तृत जानकारी भी मांगी है। इसमें उन मामलों की संख्या पूछी गई है जिनमें वह विचाराधीन कैदी हैं, जिनमें उन्हें दोषी ठहराया गया है और जिनमें उनकी सजा पर रोक लगी हुई है। अदियाला जेल के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पिछले 3 सालों में हुई सभी मुलाकातों का रिकॉर्ड पेश करें।
जब निजी अस्पताल के खर्च का मुद्दा उठा, तो जस्टिस शाहिद वहीद ने पूछा कि याचिकाकर्ता उन्हें निजी अस्पताल में ही क्यों ले जाना चाहते हैं। वकील उज़ैर भंडारी ने बताया कि खान को अक्सर इलाज के लिए पिम्स (PIMS) ले जाया जाता था, लेकिन अब शिफा इंटरनेशनल में बेहतर इलाज की जरूरत है। उज़मा खान के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि निजी अस्पताल में इलाज का सारा खर्च पीटीआई और उनका परिवार खुद उठाएगा।
राजनीतिकरण पर रोक और अगली सुनवाई
अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मेडिकल रिपोर्ट का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और पीटीआई महासचिव सलमान अकरम राजा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि पार्टी मेडिकल रिपोर्ट का राजनीतिकरण नहीं करेगी और यह मामला केवल खान, उनके डॉक्टरों और परिवार के बीच रहेगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि इलाज के दौरान डॉक्टर फैसल सुल्तान और उज़मा खान उनके साथ रहेंगे। अब इस मामले की अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद 16 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें अदियाला जेल के अधिकारियों को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
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