बीएलए ने 7 पाकिस्तानी सैनिकों को बनाया बंधक, रिहाई के लिए अल्टीमेटम।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने 7 पाकिस्तानी सैनिकों को बंधक बनाकर 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। जानें पूरी खबर और बीएलए की मांगें।

Feb 15, 2026 - 11:35
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बीएलए ने 7 पाकिस्तानी सैनिकों को बनाया बंधक, रिहाई के लिए अल्टीमेटम।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी चुनौती देते हुए सात पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों को बंधक बनाने का दावा किया है। बीएलए द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन सैनिकों को एक विशेष अभियान के दौरान पकड़ा गया है। संगठन ने इन सैनिकों को 'युद्धबंदी' (प्रिजनर्स ऑफ वॉर) करार दिया है और इनके बदले पाकिस्तान सरकार के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही तस्वीरों और वीडियो में पाकिस्तानी सैनिकों को घुटनों के बल बैठे हुए दिखाया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तानी सेना के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी के रूप में देखा जा रहा है।

बीएलए की मांगें और सात दिनों की समय सीमा

बीएलए के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान सरकार और सैन्य नेतृत्व के पास इन सैनिकों को सुरक्षित वापस पाने के लिए केवल सात दिनों का समय है। संगठन की मुख्य मांग बलूच राजनीतिक कैदियों और उन व्यक्तियों की रिहाई है जिन्हें 'जबरन गायब' (एनफोर्स्ड डिसएपियरेन्स) की श्रेणी में रखा गया है। बीएलए ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो इन सैनिकों का मामला 'बलूच नेशनल कोर्ट' में भेजा जाएगा। वहां उन पर मुकदमा चलाने के बाद उन्हें मृत्युदंड दिया जा सकता है। यह अल्टीमेटम पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य प्रशासन पर भारी दबाव डाल रहा है।

वीडियो संदेश और बंधक सैनिकों की अपील

घटना के बाद बीएलए ने एक वीडियो फुटेज जारी किया है जिसमें बंधक बनाए गए सैनिक अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दे रहे हैं। वीडियो में सैनिक अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों, विशेष रूप से सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील करते हुए दिखाई दे रहे हैं और वे सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि बीएलए की मांगों को स्वीकार कर लिया जाए ताकि उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित हो सके। सैनिकों का कहना है कि उनकी जान अब सरकार के फैसले पर निर्भर है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पाकिस्तान में सुरक्षा प्रोटोकॉल और खुफिया तंत्र की विफलता पर सवाल उठ रहे हैं।

बलूचिस्तान में संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बलूचिस्तान में अलगाववादी संघर्ष दशकों पुराना है, जहां बीएलए जैसे संगठन पाकिस्तान से पूर्ण स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। इन समूहों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना बलूच संसाधनों का दोहन कर रही है और स्थानीय आबादी का दमन कर रही है। बीएलए का दावा है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं और निर्दोष नागरिकों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में ले रहे हैं। हाल के वर्षों में बीएलए ने अपने हमलों की तीव्रता बढ़ाई है, जिसमें चीनी परियोजनाओं और पाकिस्तानी सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाया गया है। यह ताजा घटना इसी लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का एक नया और गंभीर अध्याय है।

पूर्ववर्ती घटनाएं और सुरक्षा चुनौतियां

यह पहली बार नहीं है जब बीएलए ने इस तरह का दुस्साहस दिखाया है। इससे पहले 2025 में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक करने की घटना में भी संगठन ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उस समय सैकड़ों यात्रियों को बंधक बनाया गया था और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की गई थी और हालांकि उस समय पाकिस्तानी सेना ने 'ऑपरेशन ग्रीन बोलन' के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित करने का दावा किया था, लेकिन बीएलए ने कई बंधकों को मारने की बात कही थी। वर्तमान स्थिति में पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सैन्य सूत्रों के अनुसार संभावित बचाव अभियान या बातचीत के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

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