ईरान को जंग रोकने के लिए खाड़ी देशों का बड़ा ऑफर, 200 अरब डॉलर और 20 हजार नौकरियां
खाड़ी देशों ने ईरान को युद्ध रोकने के लिए 200 अरब डॉलर और दुबई में 20 हजार नौकरियों का बड़ा ऑफर दिया है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए खाड़ी देशों ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। खाड़ी के देशों ने ईरान के सामने एक विशाल आर्थिक पैकेज का प्रस्ताव रखा है। यदि ईरान युद्ध रोकने पर सहमत होता है, तो ये देश उसे 2 अरब डॉलर की शुरुआती सहायता और फिर कुल 200 अरब डॉलर की भारी सहायता देने के लिए तैयार हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में युद्ध के विस्तार को रोकना है, क्योंकि मौजूदा संघर्ष ने खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
200 अरब डॉलर की सहायता और नौकरियों का प्रस्ताव
इस शांति प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने एक विशेष प्रस्ताव दिया है जिसके तहत दुबई में 20 हजार ईरानियों के लिए नौकरियों के रास्ते खोले जाएंगे। यह कदम ईरान के नागरिकों को सीधे आर्थिक लाभ पहुँचाने और तनाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके अलावा, खाड़ी के 4 देशों ने अमेरिका के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान के साथ किसी भी तरह के युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये देश ईरान को तुरंत प्रभाव से 200 अरब डॉलर देने के लिए तैयार हैं ताकि युद्ध को आगे बढ़ने से रोका जा सके। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी ईरान को नियंत्रण देने की तैयारी की जा रही है ताकि वहां से व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रूप से चल सकें।
अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत
अमेरिकी आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ने वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में सऊदी के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे ईरान के साथ युद्ध को बढ़ाना नहीं चाहते हैं और सऊदी अरब के अलावा यूएई, ओमान और कतर भी पूरी तरह से शांति के पक्ष में हैं। कतर इस पूरे मामले में आधिकारिक तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता साफ कर रहा है और खाड़ी के इन 4 देशों का मानना है कि अगर पैसा देकर युद्ध को रोका जा सकता है, तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
शांति प्रस्ताव के पीछे के आर्थिक कारण
खाड़ी देशों द्वारा ईरान को इतना बड़ा ऑफर देने के पीछे गहरे आर्थिक कारण छिपे हैं। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण इन देशों का तेल कारोबार लगभग ठप हो चुका है। पिछली बार युद्ध के दौरान सऊदी अरब लाल सागर के रास्ते अपना तेल व्यापार कर पा रहा था, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने घेराबंदी कर दी है, जिससे व्यापारिक जहाजों का निकलना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, सऊदी अरब पर कताइब और हूती विद्रोही एक साथ हमले कर रहे हैं और उनके निशाने पर सऊदी के प्रमुख तेल प्लांट हैं। यूएई भी जंग के कारण अपना तेल कारोबार नहीं कर पा रहा है। वहीं, होर्मुज के बंद होने की वजह से कतर की गैस सप्लाई भी पूरी तरह ठप हो गई है। इसी को देखते हुए ओमान ने भी प्रस्ताव दिया है कि अगर ईरान उसकी सीमा से गुजरने वाले जहाजों पर हमला नहीं करता है, तो ओमान की खाड़ी में ईरान के टैंकरों को भी निशाना नहीं बनाया जाएगा। इन देशों ने ईरान पर से प्रतिबंध हटाने की भी पैरवी की है।
What's Your Reaction?