एलन मस्क की चेतावनी 2028 में डेमोक्रेट्स जीते तो खत्म हो जाएगा अमेरिकी लोकतंत्र

एलन मस्क ने चेतावनी दी है कि 2028 में डेमोक्रेट्स की जीत से अमेरिका का लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा और देश एकदलीय बन जाएगा।

Oct 30, 2026 - 19:35
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एलन मस्क की चेतावनी 2028 में डेमोक्रेट्स जीते तो खत्म हो जाएगा अमेरिकी लोकतंत्र

अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनाव से पहले दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने एक बड़ा सियासी बयान जारी किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर डेमोक्रेटिक पार्टी ने 2028 के चुनाव में प्रतिनिधि सभा, सीनेट और राष्ट्रपति पद, तीनों पर एक साथ कब्जा कर लिया, तो अमेरिका का राजनीतिक भविष्य पूरी तरह बदल जाएगा। एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका का खेल खत्म हो जाएगा। उन्होंने इसे देश में लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा और गंभीर खतरा बताया है। मस्क के इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में हलचल तेज हो गई है और रिपब्लिकन तथा डेमोक्रेटिक खेमों में बहस छिड़ गई है।

एलन मस्क ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने विस्तार से समझाया कि अगर 2028 में डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा, सीनेट और राष्ट्रपति पद तीनों पर जीत मिलती है, तो वे देश की राजनीतिक संरचना को बदलने के लिए तीन बड़े कदम उठा सकते हैं। मस्क के अनुसार, पहला बड़ा कदम यह होगा कि डेमोक्रेट्स वॉशिंगटन डीसी और प्यूर्टो रिको को आधिकारिक तौर पर अमेरिकी राज्य का दर्जा दे सकते हैं। इस कदम से सीनेट में उनकी राजनीतिक स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी और रिपब्लिकन पार्टी के पास मुकाबला करने का अवसर कम बचेगा।

मस्क द्वारा गिनाए गए दूसरे खतरे के अनुसार, डेमोक्रेट्स देश की सीमाओं को पूरी तरह खोल सकते हैं और अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे सभी लोगों को कानूनी दर्जा प्रदान कर सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें भविष्य में एक स्थायी और बड़ा राजनीतिक बहुमत मिल जाएगा, जिससे विपक्ष का प्रभाव लगभग समाप्त हो जाएगा। तीसरा बड़ा कदम यह हो सकता है कि डेमोक्रेट्स सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में बढ़ोतरी करके तुरंत अपना बहुमत स्थापित कर लेंगे। मस्क का दावा है कि इन सभी दूरगामी कदमों के लागू होने के बाद अमेरिका की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था हमेशा के लिए बदल जाएगी और देश में संतुलन बिगड़ जाएगा।

एलन मस्क ने कड़े शब्दों में दावा किया कि यदि उपरोक्त परिस्थितियां बनती हैं, तो अमेरिका स्थायी रूप से एक ही पार्टी के नियंत्रण वाला देश बनकर रह जाएगा। उन्होंने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि इसका सीधा और अनिवार्य परिणाम यह होगा कि अमेरिका एक स्थायी एकदलीय देश बन जाएगा और लोकतंत्र अपने वास्तविक तथा मूल मायने में पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इस स्थिति से निपटने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए मस्क ने रिपब्लिकन पार्टी के सभी समर्थकों से आगामी चुनाव में एकजुट होकर उसके उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की पुरजोर अपील की है। मस्क का मानना है कि इस विध्वंसक स्थिति को रोकने के लिए वर्ष 2029 में सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास कम से कम 51 सदस्य होने ही चाहिए।

एलन मस्क के ये तीखे सियासी बयान ऐसे महत्वपूर्ण समय पर सामने आए हैं, जब वह अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में अब तक के सबसे बड़े व्यक्तिगत राजनीतिक चंदादाता के रूप में उभरे हैं। आगामी 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले वह रिपब्लिकन उम्मीदवारों और विभिन्न राजनीतिक संगठनों पर कुल मिलाकर 442 मिलियन डॉलर से ज्यादा की भारी-भरकम राशि खर्च कर चुके हैं। द हिल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नए चुनावी फंडिंग दस्तावेजों से यह बात सामने आई है कि मस्क ने पिछले एक महीने के भीतर ही अपने विशेष राजनीतिक संगठन अमेरिका पीएसी को 76 करोड़ 80 लाख रुपये दिए हैं। इससे पहले भी वह रिपब्लिकन उम्मीदवारों और उनसे जुड़े तमाम संगठनों के समर्थन में 366 मिलियन डॉलर खर्च कर चुके थे।

मस्क ने वर्ष 2024 के चुनाव के दौरान ही अमेरिका पीएसी नामक राजनीतिक संगठन की स्थापना की थी। बीते अक्टूबर महीने में लगभग एक सप्ताह के भीतर ही उनके इस संगठन को भारी-भरकम नई फंडिंग प्राप्त हुई थी। इससे पहले मस्क 2024 के आम चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और अन्य प्रमुख रिपब्लिकन उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार और समर्थन में 250 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम खर्च कर चुके थे। द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क ने अपने इस विशाल राजनीतिक चंदे का अधिकांश और बड़ा हिस्सा अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रखने के लिए ही खर्च किया है, ताकि पार्टी संसद में मजबूत स्थिति में बनी रहे।

इस बीच राजनीतिक गलियारों में हाल ही में 25 अक्टूबर को जारी सीबीएस न्यूज का एक नया सर्वे भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा के आगामी चुनाव में बढ़त मिलने की संभावना जताई गई है। इस सर्वे के अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में कुल 229 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा कुछ अन्य चुनावी अनुमानों में उनकी कुल सीटों की संख्या 230 के आंकड़े को भी पार कर जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन सबके बावजूद रिपब्लिकन पार्टी के पास भी सदन में अपना बहुमत किसी तरह बनाए रखने का एक सीमित और कड़ा मौका अभी भी बाकी है। रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स की यह बढ़त पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बनी हुई है, लेकिन इसमें कोई बहुत बड़ी या अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है। देश में बढ़ती महंगाई और मौजूदा अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर आम जनता की गहरी चिंताएं मतदाताओं की राजनीतिक पसंद को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही हैं और हालांकि, बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों का यह भी मानना है कि अब तक किसी भी प्रमुख राजनीतिक पार्टी के पास उनकी खराब आर्थिक स्थिति में सुधार लाने की कोई स्पष्ट और ठोस योजना मौजूद नहीं है।

दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी 27 अक्टूबर को अपने एक बयान में स्पष्ट किया कि यदि आगामी मध्यावधि चुनाव पूरी तरह से ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कराए जाते हैं, तो वह उनके सभी परिणामों का पूर्ण सम्मान करेंगे। आपको बता दें कि ट्रंप ने चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की वोट चोरी पकड़वाने वाले व्यक्ति के लिए 10 लाख डॉलर यानी लगभग 9 करोड़ 50 लाख रुपये का भारी नकद इनाम देने का भी ऐलान किया है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि देशहित में आवश्यकता पड़ी, तो वह अपने विशेष वीटो अधिकार का खुलकर इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे। पत्रकारों के साथ हुई एक बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने विस्तार से कहा कि हम इस राजनीतिक स्थिति का कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेंगे। मेरे पास वीटो की बहुत मजबूत और असरदार शक्ति मौजूद है। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस वीटो शक्ति का उपयोग करने की नौबत नहीं आएगी, लेकिन यदि ऐसी परिस्थितियां बनीं, तो इतिहास गवाह है कि ऐसा पहले भी किया जा चुका है और मैं चुनाव के अंतिम नतीजे तभी स्वीकार करूंगा, जब ये चुनाव पूरी ईमानदारी और नियमों के तहत संपन्न कराए जाएंगे।

वर्तमान में अमेरिका में ये सभी मध्यावधि चुनाव ऐसे नाजुक समय पर आयोजित हो रहे हैं, जब मौजूदा ट्रंप प्रशासन को गंभीर आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ जनता के बीच घटती लोकप्रियता का भी कड़ा सामना करना पड़ रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा बीते सितंबर महीने में प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, उनके द्वारा किए गए एक व्यापक सर्वे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई थी और यह लुढ़क कर मात्र 37 फीसदी के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि वर्ष 1990 में इस प्रकार के राजनीतिक सर्वे की शुरुआत होने के बाद से मध्यावधि चुनाव से पहले किसी भी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए दर्ज की गई यह सबसे कम और खराब रेटिंग थी। आगामी 3 नवंबर को होने वाले इन बेहद अहम चुनावों में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों का ही राजनीतिक नियंत्रण पूरी तरह तय हो जाएगा, जो आने वाले वर्षों में देश की दिशा तय करेगा।

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