कच्चे तेल की कीमतों में 40 डॉलर तक की गिरावट का अनुमान, स्कॉट बेसेंट का बड़ा दावा
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का दावा है कि ईरान विवाद खत्म होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 40 डॉलर तक गिर सकती हैं, जिससे महंगाई कम होगी।
दुनिया भर की नजरें फिलहाल ईरान विवाद पर टिकी हैं और इस भू-राजनीतिक संकट ने ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक ऐसा दावा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार के विशेषज्ञों को चौंका दिया है। उनका मानना है कि जैसे ही ईरान के साथ सैन्य संघर्ष समाप्त होगा, कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की जाएगी। बेसेंट के मुताबिक, तेल की कीमतें गिरकर 40 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे आ सकती हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
ओवरसप्लाई के कारण कीमतों में आएगी भारी कमी
कच्चे तेल का बाजार वर्तमान में काफी दबाव में है, लेकिन स्कॉट बेसेंट भविष्य में एक बिल्कुल अलग तस्वीर देख रहे हैं। स्टीव बैनन को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान संकट के समाधान के बाद बाजार में कच्चे तेल की भारी ओवरसप्लाई यानी अत्यधिक आपूर्ति होने वाली है। बेसेंट का तर्क है कि बहुत सारा तेल उत्पादन लाइन में आने के लिए तैयार है, जो युद्ध खत्म होते ही बाजार में आ जाएगा। इससे कीमतों में 40 से 50 डॉलर तक की गिरावट आ सकती है। अगर वर्तमान स्थिति की बात करें, तो ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 91 डॉलर के आसपास बना हुआ है। कीमतों का यह स्तर जुलाई के बाद से सबसे ऊंचा है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमले और तनाव हैं।
महंगाई और ब्याज दरों पर पड़ेगा सीधा असर
कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली किसी भी बड़ी गिरावट का सीधा और सकारात्मक असर वैश्विक महंगाई पर पड़ता है। बेसेंट ने विस्तार से बताया कि ब्याज दरों और तेल की कीमतों के बीच अब तक का सबसे गहरा संबंध देखा जा रहा है और वर्तमान में 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 2023 के बाद अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है, जो बाजार की घबराहट को दर्शाता है। बेसेंट का कहना है कि ईरान विवाद खत्म होने के बाद जब तेल सस्ता होगा, तो हेडलाइन महंगाई में भी भारी कमी आएगी। इससे वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में गिरावट आने की पूरी संभावना है, जिससे आम लोगों और व्यवसायों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, उन्होंने युद्ध के खत्म होने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई है, लेकिन अमेरिकी संसद की सशस्त्र सेवा समिति के एक रिपब्लिकन सांसद ने वर्तमान सैन्य स्थिति को फिलहाल ठहरा हुआ बताया है।
नॉर्वे के निवेश फैसले और अमेरिकी अर्थव्यवस्था
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी ऋण और निवेश को लेकर भी कई चर्चाएं चल रही हैं। हाल ही में नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड ने अपनी ट्रेजरी होल्डिंग्स में 75 अरब डॉलर तक की कटौती करने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी प्रमुख स्कॉट बेसेंट ने इस कदम को लेकर अधिक चिंता नहीं जताई है और उनका मानना है कि नॉर्वे का फंड केवल अन्य अमेरिकी संपत्तियों के माध्यम से अपना मुनाफा या यील्ड बढ़ाना चाहता है। बेसेंट ने कहा कि अगर वे फैनी मॅई, फ्रेडी मैक या गिन्नी मॅई जैसी सरकारी चार्टर्ड होम लेंडिंग कंपनियों के पेपर्स खरीदना चाहते हैं, तो अमेरिका इसका स्वागत करेगा। ये कंपनियां आमतौर पर ट्रेजरी की तुलना में ज्यादा प्रीमियम देती हैं और नॉर्वे की यह खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी फेडरल कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, जो वैश्विक वित्तीय जगत के लिए एक बड़ा आंकड़ा है।
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