जयशंकर के सामने उठाएं दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा… भारत आ रहे रुबियो से अमेरिका के 6 सांसदों ने की मांग
अमेरिका के 6 प्रगतिशील डेमोक्रेटिक सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर भारत दौरे के दौरान एस. जयशंकर से छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने की मांग
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आगामी भारत दौरे से ठीक पहले अमेरिका के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामला सामने आया है और अमेरिका के 6 प्रमुख प्रगतिशील डेमोक्रेटिक सांसदों ने मार्को रुबियो को एक आधिकारिक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने यह मांग की है कि जब वे अपनी आगामी भारत यात्रा के दौरान मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करें, तो वे इस दौरान भारत में हो रहे छात्र प्रदर्शनों में अत्यधिक बल प्रयोग और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को विशेष रूप से उनके सामने उठाएं और अमेरिका के इन 6 बड़े नेताओं में प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया शामिल हैं, जिन्होंने मिलकर अपने देश के विदेश मंत्री को यह पत्र भेजा है और इस राजनयिक बैठक में मानवाधिकारों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों पर निगरानी का आरोप
इन अमेरिकी सांसदों ने अपने इस पत्र में केवल घरेलू प्रदर्शनों का ही जिक्र नहीं किया है, बल्कि अमेरिका की धरती पर स्थित राजनयिक मिशनों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और सांसदों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका में स्थित भारतीय दूतावास और अन्य अमेरिकी शहरों में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूतावासों ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी निगरानी करने के लिए अपने फोटोग्राफरों को तैनात किया था। यह मामला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ताओं में एक नया आयाम जोड़ सकता है, क्योंकि इन सांसदों ने सीधे तौर पर अमेरिका में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भारतीय मिशनों की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
शुक्रवार को लिखे गए पत्र में सुरक्षा बलों के दमन पर गहरी चिंता
शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भेजे गए इस पत्र में सांसदों ने लिखा है कि हम दिल्ली और भारत के अन्य इलाकों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे दमन, लोगों को गलत तरीके से हिरासत में लेने और बल के अत्यधिक प्रयोग के पैटर्न को लेकर अपनी गहरी चिंता जाहिर करते हैं। सांसदों का यह दल चाहता है कि अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंधों में लोकतांत्रिक सिद्धांतों को सबसे ऊपर रखा जाए और इस दिशा में अमेरिकी कूटनीति पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभाए। पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते, और नागरिक तथा राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध के पक्षकार होने के कारण, अमेरिका और भारत दोनों का यह साझा दायित्व बनता है कि वे अपने-अपने नागरिकों के सभा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों को बढ़ावा दें और हरसंभव तरीके से उनकी रक्षा करें।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों और मतदाता सूची संशोधन का जिक्र
इस पत्र में केवल छात्र आंदोलन तक ही सीमित न रहकर अन्य प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं का हवाला दिया गया है, और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता के साथ-साथ चुनावी भागीदारी पर इसके संभावित असर को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सांसदों ने इस बात का भी विशेष रूप से जिक्र किया है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान किस प्रकार से लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं और प्रदर्शनों से निपटने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने किस तरह की कार्रवाई की है, जिसकी रिपोर्टें लगातार सामने आती रही हैं।
परीक्षा से जुड़ी शिकायतों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का संज्ञान
अपने पत्र के अंत में अमेरिकी सांसदों ने भारत सरकार की तरफ से उठाए गए कुछ सकारात्मक कदमों की भी चर्चा की है और उसका संज्ञान लिया है। सांसदों ने परीक्षा से जुड़ी चिंताओं के बाद छात्रों की शिकायतों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए पत्र में कहा कि हमने इस बात पर गौर किया है कि भारत सरकार ने परीक्षा लीक से प्रभावित छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल है। अब सबकी निगाहें मार्को रुबियो के भारत दौरे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली उनकी इस उच्चस्तरीय बैठक पर टिकी हैं, जहां इन तमाम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
As the world’s largest democracies, the U.S. and India have an obligation to promote and defend the rights to freedom of assembly and expression. @RepMcGovern and I are urging Secretary of State Marco Rubio to prioritize those freedoms and human rights when he meets with Indian officials in the coming days.— Rep. Pramila Jayapal (@RepJayapal) October 16, 2026
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