भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अतिरिक्त टैरिफ समाप्त, द्विपक्षीय व्यापार को बड़ी राहत

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में भारी कटौती की गई है। भारत $500 अरब का सामान खरीदेगा।

Feb 7, 2026 - 10:35
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अतिरिक्त टैरिफ समाप्त, द्विपक्षीय व्यापार को बड़ी राहत

भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) के ढांचे को सार्वजनिक किया है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैक्स को 50% से घटाकर 18% करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, रूस से कच्चे तेल के आयात को लेकर भारत पर लगाया गया 25% का अतिरिक्त टैरिफ भी तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। यह कदम भारतीय निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की ओर कदम

दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 को शुरू हुई भारत-अमेरिका व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 18 लाख करोड़) के विशाल बाजार के द्वार खोलेगा। इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, व्यापारिक बाधाओं को कम करना और बाजार तक पहुंच को सुगम बनाना है। 30 लाख करोड़) मूल्य के उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।

गैर-टैरिफ बाधाओं और मानकों का सरलीकरण

समझौते का एक प्रमुख हिस्सा गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को दूर करने पर केंद्रित है। अमेरिकी चिकित्सा उपकरण कंपनियों को भारत में मूल्य निर्धारण और पंजीकरण प्रक्रियाओं में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था, भारत ने उन्हें हल करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा। एक महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत, भारत अगले 6 महीनों में चुनिंदा क्षेत्रों में अमेरिकी मानकों और परीक्षण परिणामों को मान्यता देने की संभावना पर विचार करेगा। इससे दोहरी टेस्टिंग की आवश्यकता कम होगी, जिससे व्यापार की लागत घटेगी और समय की बचत होगी।

क्षेत्रवार लाभ और निर्यात को प्रोत्साहन

इस समझौते से भारतीय जेनेरिक दवाओं, रत्न एवं आभूषण, और विमान के पुर्जों पर टैरिफ पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इससे MSME क्षेत्र, किसानों और मछुआरों को सीधा लाभ होगा। विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, हस्तशिल्प और ऑर्गेनिक केमिकल्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने की संभावना है। अमेरिका ने सेक्शन 232 के तहत विमान के पुर्जों पर छूट देने और कुछ ऑटो घटकों के लिए टैरिफ रेट कोटा प्रदान करने पर भी सहमति व्यक्त की है। यह भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कृषि और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा

भारत ने अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि और डेयरी को इस समझौते के तहत पूरी तरह सुरक्षित रखा है। वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री और दूध जैसे उत्पादों पर अमेरिका को कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। हालांकि, भारत ने सूखे मेवे, ताजे फल, सोयाबीन तेल और वाइन जैसे कुछ विशिष्ट अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने पर सहमति जताई है और डिजिटल व्यापार के मोर्चे पर, दोनों देश ई-कॉमर्स और डेटा प्रवाह में आने वाली बाधाओं को कम करने के लिए सहयोग करेंगे, जिससे भारतीय आईटी स्टार्टअप्स को अमेरिकी बाजार में विस्तार करने में मदद मिलेगी।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और निष्कर्ष

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता न केवल व्यापारिक घाटे को संतुलित करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक रणनीति का भी हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि $500 अरब की खरीद प्रतिबद्धता में ऊर्जा उत्पाद, कोकिंग कोल और उच्च तकनीक वाले उपकरण शामिल होने से भारत की औद्योगिक क्षमता में वृद्धि होगी। संयुक्त बयान में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि भविष्य में कोई देश टैरिफ नियमों में बदलाव करता है, तो दूसरा पक्ष भी अपने वादों में संशोधन करने का अधिकार रखेगा। यह समझौता भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक धरातल पर और अधिक सुदृढ़ बनाने की क्षमता रखता है।

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