शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1750 अंक टूटा, इन 6 कारणों से डूबे निवेशकों के 4 लाख करोड़
भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट से निवेशकों को 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जानें सेंसेक्स और निफ्टी के गिरने के 6 मुख्य कारण।
भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से मंदी का माहौल बना हुआ है और शुक्रवार को भी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के लिए यह सप्ताह काफी नुकसानदेह साबित हो रहा है क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट देखी गई है। इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक तनाव और घरेलू बाजार की परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। लगातार तीन दिनों की इस गिरावट में सेंसेक्स 1750 अंकों से भी ज्यादा टूट चुका है। बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध जैसी स्थितियों ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है, जिससे वे अपनी पूंजी सुरक्षित करने के लिए बिकवाली कर रहे हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी के ताजा आंकड़े
शुक्रवार को बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 813 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 74,764 और 23 पॉइंट्स पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 204 अंकों की गिरावट के साथ 23,431 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट की वजह से बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कम होकर 484 लाख करोड़ रुपये रह गया है। अगर पिछले तीन दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सेंसेक्स में 2 और 29 पैसे प्रतिशत की गिरावट आई है। 4 सितंबर को सेंसेक्स 76,515 और 43 पॉइंट्स पर था, जो अब घटकर 74,764 और 23 पॉइंट्स पर आ गया है। इसका मतलब है कि तीन दिनों में सेंसेक्स 1,751 और 2 पॉइंट्स गिर चुका है। इसी तरह निफ्टी में भी 1 और 95 पैसे प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 4 सितंबर के 23,897 और 70 पॉइंट्स के स्तर से 466 और 2 पॉइंट्स नीचे गिर गया है। इन तीन दिनों में निवेशकों को कुल 4,08,424 करोड़ 76 लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
बाजार को गिराने वाले 6 मुख्य कारण
शेयर बाजार की इस दुर्दशा के पीछे 6 बड़े कारण बताए जा रहे हैं जिन्हें बाजार के लिए हैवान माना जा रहा है। पहला सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतें हैं जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। दूसरा कारण ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के शहरों पर किए गए हमलों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के तेल टैंकरों पर हमला किया और जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने खाड़ी में अमेरिका के दो जहाजों और आठ तेल टैंकरों पर हमला किया है क्योंकि वे होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित इलाके से गुजर रहे थे।
आईपीओ की बाढ़ और आईटी शेयरों का दबाव
तीसरा बड़ा कारण प्राइमरी मार्केट में आईपीओ की धूम है। बुधवार को रेंटोमोजो, करमतारा इंजीनियरिंग, एलसीसी प्रोजेक्ट्स, स्टीमहाउस इंडिया, मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस और एसेट रिकंस्ट्रक्शन जैसे 6 बड़े आईपीओ खुले हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार के अनुसार, इन आईपीओ की वजह से सेकेंडरी मार्केट से कैश यानी लिक्विडिटी बाहर निकल रही है और चौथा कारण आईटी सेक्टर के शेयरों में आई भारी गिरावट है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया है। कोफोर्ज के शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट आई क्योंकि कंपनी के चेयरपर्सन ओम प्रकाश भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा इंफोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में भी 2 से 5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली
पांचवां कारण भारतीय रुपये की गिरती कीमत है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 95 रुपये 10 पैसे के स्तर पर पहुंच गया है। एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। छठा कारण खुद एफआईआई की बिकवाली है और मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने 123 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि यह राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन लगातार बिकवाली से बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। इस महीने के 6 सत्रों में से 4 में विदेशी निवेशक नेट सेलर रहे हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतनी चाहिए और आईपीओ में निवेश करते समय भी समझदारी दिखानी चाहिए क्योंकि बाजार का मौजूदा रुख काफी अनिश्चित बना हुआ है।
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