ज्ञानेश कुमार पर सार्वजनिक महाभियोग की तैयारी, खरगे के आवास पर सजेगा मंच
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन 30 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सार्वजनिक महाभियोग आयोजित करेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन अब सड़क से आगे बढ़कर एक ऐसा राजनीतिक मंच तैयार करने जा रहा है, जिसकी पटकथा संसद की महाभियोग प्रक्रिया से प्रेरित होगी। इस बार न संसद होगी, न लोकसभा अध्यक्ष और न ही राज्यसभा के सभापति, बल्कि पूरा कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित किया जाएगा। आगामी 30 अक्टूबर को होने वाले इस कार्यक्रम को सार्वजनिक महाभियोग का नाम दिया गया है।
इस कार्यक्रम में करीब डेढ़ से दो सौ सांसदों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। आयोजन स्थल पर टेंट लग रहा है, लाइटिंग हो रही है, मंच तैयार किया जा रहा है और कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के लिए मल्टी-कैमरा सेटअप भी लगाया जा रहा है। इस पूरे आयोजन की पटकथा को लेकर शुरुआत में कई तरह के विचार सामने आए थे, जिनमें मॉक पार्लियामेंट और मॉक कोर्ट शामिल थे, लेकिन अंत में एक अलग राजनीतिक कार्यक्रम का स्वरूप तय किया गया।
खरगे के घर पर सजेगा सियासी मंच
कार्यक्रम की तिथि 30 अक्टूबर, शुक्रवार तय की गई है और इसका समय दोपहर बाद साढ़े तीन बजे का रखा गया है। यह आयोजन दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सरकारी आवास, 10 राजाजी मार्ग पर होगा। यहीं INDIA गठबंधन के सांसद और नेता जुटेंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग जैसा आयोजन करना है।
पहले इस कार्यक्रम के लिए दूसरे स्थानों पर आयोजन की कोशिश की गई थी, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें उन जगहों की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद खरगे के आवास को कार्यक्रम के लिए अंतिम रूप से तय किया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए इसे पब्लिक इम्पीचमेंट यानी सार्वजनिक महाभियोग कहा था। कार्यक्रम शाम साढ़े तीन बजे शुरू होकर करीब छह बजे तक चलने की तैयारी है और इसके बाद नाश्ते का कार्यक्रम रखा गया है। इस दौरान गठबंधन के करीब 150 से 200 सांसदों के पहुंचने की संभावना है।
मॉक पार्लियामेंट और मॉक कोर्ट के विचारों पर चर्चा
इस कार्यक्रम की रूपरेखा को तैयार करने से पहले INDIA गठबंधन के भीतर कई तरह के विचार सामने आए थे। सूत्रों के अनुसार, सबसे पहले मॉक पार्लियामेंट यानी संसद की नकल पर आधारित कार्यवाही का विचार आया था। इसका खाका यह था कि एक तरफ सत्ता पक्ष और दूसरी तरफ विपक्ष होगा, बीच में स्पीकर की कुर्सी होगी और सामने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका निभाने वाला कोई व्यक्ति होगा। अलग-अलग नेता प्रधानमंत्री, स्पीकर और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे किरदार निभाते, लेकिन इस विचार पर गठबंधन के कुछ नेताओं ने सवाल उठाए और उनका तर्क था कि संसद पूरे देश में एक ही है और बाहर हूबहू संसद जैसा सेटअप तैयार करने से राजनीतिक विवाद पैदा हो सकता है, जिसे भाजपा संसद के अपमान के तौर पर पेश कर सकती है।
दूसरा विचार यह आया कि संसद की नकल करने के बजाय अदालत की तरह कार्यवाही आयोजित की जाए और इस मॉडल में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप पढ़े जाते और पक्ष-विपक्ष के वकीलों की तरह नेता अपनी दलीलें रखते। बहस के बाद एक निष्कर्ष या राजनीतिक फैसला सुनाने का विचार था, लेकिन इस विकल्प पर भी सवाल उठे और कुछ नेताओं का मानना था कि अदालत जैसी कार्यवाही का मंचन करना न्यायिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाने जैसा दिखाई दे सकता है। इसके अलावा, ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दे अदालतों में विचाराधीन होने के कारण सावधानी बरतने की बात कही गई, जिससे मॉक कोर्ट वाला विचार भी खारिज हो गया।
तीसरा विकल्प और मीरा कुमार की अध्यक्षता
अंत में तीसरे विकल्प पर सबसे ज्यादा सहमति बनी। सूत्रों के मुताबिक, यह तय हुआ कि कार्यक्रम संसद की कार्यवाही से प्रेरित तो हो, लेकिन उसकी हूबहू नकल न हो और एक अध्यक्षीय व्यवस्था के तहत अलग-अलग पक्षों के नेता अपनी बात रख सकेंगे और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से जुड़ा प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस पूरी कार्यवाही की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी। विपक्ष यह नहीं चाहता कि संसद का किसी भी तरह से मजाक बने, इसलिए इसे मॉक पार्लियामेंट कहने के बजाय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनता द्वारा महाभियोग कहा जा रहा है।
इस कार्यक्रम में सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि और एसआईआर के पीड़ित भी शामिल होंगे और हर पार्टी से एक व्यक्ति अपनी बात रखेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रस्ताव पेश करेंगे, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चार्जशीट रखी जाएगी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सबसे आखिर में अपना संबोधन देंगे।
प्रियंका गांधी के हाथ में कमान और राजनीतिक मायने
इस पूरे आयोजन की कमान प्रियंका गांधी के हाथों में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम को केवल भाषणों तक सीमित रखने के बजाय व्यवस्थित और दृश्यात्मक बनाने की पूरी तैयारी की गई है। इस आयोजन के जरिए INDIA गठबंधन चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर अपनी राजनीतिक मुहिम को आगे बढ़ाना चाहता है। विपक्ष का गंभीर आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जाना चाहिए।
हालांकि, यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या इस सार्वजनिक महाभियोग से ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जा सकता है? इसका सीधा जवाब है कि नहीं, यह कार्यक्रम अपने आप में संवैधानिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड 5 के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जिन आधारों और प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जिसके लिए संसद की औपचारिक प्रक्रिया और दोनों सदनों की भूमिका अनिवार्य होती है।
What's Your Reaction?