नवंबर 2026 से बदले वित्तीय नियम टोल प्लाजा पेंशन और बैंक चार्जेस की पूरी जानकारी
1 नवंबर 2026 से लागू हुए नए वित्तीय नियमों की पूरी जानकारी जानिए पेंशन, जीएसटी, टोल और बैंक चार्जेस पर असर।
1 नवंबर 2026 यानी आज से पर्सनल फाइनेंस से जुड़े कई बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका असर पेंशनर्स, टैक्सपेयर्स, क्रेडिट कार्ड धारकों और सेविंग अकाउंट खाता ग्राहकों पर पड़ेगा। पेंशनर्स को 30 नवंबर तक जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होगा, ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर की डेडलाइन 21 नवंबर है, और नवंबर से नए जीएसटी नियम और एफडी दरों में बदलाव लागू होंगे।
नवंबर 2026 आज से शुरू हो गया है। ऐसे में आज यानी 1 नवंबर से कई प्रमुख फाइनेंशियल नियमों में बदलाव हो गया है, जिसका असर आपके पर्सनल फाइनेंस और जेब यानी पेंशनर्स, इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों, म्यूचुअल फंड निवेशकों और कंज्यूमर्स पर पड़ेगा। सालाना जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की डेडलाइन से लेकर ऑडिट कराने वाले टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फाइल करने की बढ़ी हुई तारीख और जीएसटी नियमों में बदलाव तक, इस महीने कई ऐसे अपडेट आ गए हैं, जिनका आम लोगों और व्यवसायों पर असर पड़ता हुआ दिखाई देगा। निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में होने वाले बदलावों और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए समय से पहले रिडेम्पशन की आने वाली तारीखों पर भी ध्यान देना होगा। आइए आपको भी इन तमाम अपडेट्स के बारे में विस्तार से बताते हैं।
पेंशनर्स को 30 नवंबर तक जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होगा
पेंशन का भुगतान बिना किसी रुकावट के जारी रहे, इसके लिए पेंशनर्स को 30 नवंबर तक अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होगा। 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनर 1 अक्टूबर से ही अपना प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं, जबकि अन्य पेंशनर्स के लिए यह सुविधा 1 नवंबर से शुरू हो गई है। वे अपनी बैंक शाखा में जाकर, आधार-आधारित प्रमाणीकरण के जरिए डिजिटल जीवन प्रमाण सुविधा का उपयोग करके, या जहां उपलब्ध हो, डाक विभाग की डोरस्टेप सर्विस का विकल्प चुनकर अपना प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। जो लोग इस डेडलाइन तक प्रमाण पत्र जमा नहीं कर पाते हैं, उनकी पेंशन का भुगतान अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
ऑडिट कराने वाले टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए, जिन टैक्सपेयर्स को ऑडिट कराने की आवश्यकता होती है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर कर दी है। यह बढ़ी हुई समय-सीमा उन पात्र व्यवसायों, पेशेवरों, फर्मों और अन्य इकाइयों पर लागू होती है, जिन्हें निर्धारित नियमों के तहत ऑडिट कराना ज़रूरी है। हालाँकि, यह समय-सीमा विस्तार सभी करदाताओं के लिए नहीं है। जो व्यक्ति आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फाइल करते हैं, उनके लिए नियमित आईटीआर फाइल करने की समय-सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। जिन लोगों ने अपनी तय समय-सीमा मिस कर दी है, वे अभी भी 31 दिसंबर तक बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी और लेट फीस का भुगतान करना होगा।
1 नवंबर से लागू होंगे जीएसटी के नए नियम
26 अक्टूबर को जारी एक नोटिफिकेशन के बाद, सरकार 1 नवंबर से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के कुछ नियमों में बदलाव लागू करने जा रही है। ये बदलाव बिक्री के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट से जुड़े हैं। साथ ही, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर जहां कच्चे माल पर टैक्स की दर तैयार उत्पाद पर लगने वाले टैक्स से अधिक होती है, वाले व्यवसायों के लिए प्रोविजनल रिफंड की प्रक्रिया को तेज़ करने का प्रावधान भी शामिल है। इन उपायों का उद्देश्य व्यवसायों के लिए अनुपालन को आसान बनाना और कैश फ्लो में सुधार करना है।
ई-कॉमर्स सेलर्स के लिए बदलेंगे नियम
जीएसटी व्यवस्था के तहत छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान बनाने, रिफंड में तेजी लाने और आपूर्ति के बाद दी जाने वाली छूट के नियमों को सरल करने सहित कई सुधार एक नवंबर से लागू होंगे और जीएसटी परिषद की आठ अक्टूबर को हुई 57वीं बैठक में जीएसटी प्रक्रियाओं में कई सुधारों को मंजूरी दी गई थी। इनमें मुख्य रूप से पंजीकरण, रिटर्न और रिफंड से जुड़े बदलाव शामिल हैं। प्रशासनिक प्रक्रियाओं के जरिये लागू होने वाले ये फैसले एक नवंबर, 2026 से चरणबद्ध तरीके से प्रभावी होंगे। नए नियमों के तहत कई राज्यों में सामान बेचने वाले छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता संबंधित राज्य में ई-कॉमर्स मंच के गोदाम को अपना मुख्य कारोबारी स्थल घोषित कर सकेंगे।
इसके लिए विक्रेता को कम-से-कम एक राज्य में वास्तविक उपस्थिति रखनी होगी। वहां भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण पूरा होने के बाद अन्य राज्यों में ई-कॉमर्स मंच की सहमति से पंजीकरण कराया जा सकेगा। इस व्यवस्था से करीब 9 लाख 50 हजार छोटे विक्रेताओं को फायदा होने की संभावना है। इसके लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की सीमा 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति माह तक होगी। जीएसटी विभाग ने एक नवंबर से पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों और सूचनाओं को भी स्पष्ट किया है। जीएसटी पोर्टल पर आवेदन के लिए आसान प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाएगी।
पीएनबी ने क्रेडिट कार्ड के शुल्क में बदलाव किया
पंजाब नेशनल बैंक ने 1 नवंबर 2026 से अपने वीज़ा और रूपे क्रेडिट कार्डों पर लगने वाले सर्विस चार्ज में बदलाव किया है। 5% या 400 रुपये (जो भी ज़्यादा हो) शुल्क लगेगा। 5% या 500 रुपये (जो भी ज़्यादा हो) शुल्क लिया जाएगा।
बैंक ने बकाया राशि के आधार पर लेट पेमेंट फीस में भी बदलाव किया है। पहले, 1 हजार रुपये या उससे कम के बकाया पर कोई शुल्क नहीं लगता था, जबकि 10 हजार रुपये से ज्यादा के बकाया पर अधिकतम 750 रुपये का शुल्क लगता था। अब 1 नवंबर से, 500 रुपये तक के बकाया पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि 50 हजार रुपये से ज्यादा के बकाया पर अधिकतम शुल्क बढ़कर 1 हजार 200 रुपये हो जाएगा।
इसके अलावा, पीएनबी ने यूटिलिटी बिल जैसे बिजली, पानी, गैस आदि के भुगतान पर भी शुल्क लागू किया है। अगर एक बिलिंग साइकिल में कुल यूटिलिटी भुगतान 50 हजार रुपये से ज्यादा होता है, तो उस पर 1% का शुल्क लगेगा प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 2 हजार रुपये तक। पहले ऐसा कोई शुल्क नहीं लगता था। इन क्रेडिट कार्डों से जुड़े अन्य बदलावों में चेक रिटर्न होने पर लगने वाला शुल्क और ऑटो-डेबिट फेल होने पर लगने वाला शुल्क शामिल है।
इंडसइंड बैंक ने सेविंग्स अकाउंट के फेल ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू किया
1 नवंबर से, इंडसइंड बैंक अपने कुछ सेविंग्स अकाउंट्स जैसे इंडस डिलाइट, इंडस डिजी-स्टार्ट, इंडस ऑनलाइन-मिनिमम बैलेंस रिक्वायर्ड और इंडी के ग्राहकों के लिए कुछ फेल ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाएगा। अगर खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण कोई पीओएस ट्रांजैक्शन कार्ड स्वाइप करके किया गया भुगतान फेल हो जाता है, तो उस पर 25 रुपये का शुल्क लगेगा।
इसी तरह, पर्याप्त बैलेंस न होने के कारण इंडसइंड बैंक के एटीएम से किया गया ट्रांजैक्शन फेल होने पर भी 25 रुपये का शुल्क लगेगा। अगर कोई चेक वित्तीय कारणों जैसे फंड की कमी के अलावा किसी अन्य वजह से रिटर्न होता है, तो प्रति चेक 50 रुपये का शुल्क लगेगा। इन शुल्कों में जीएसटी शामिल नहीं है। पहले, इन तीनों तरह के फेल ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगता था।
डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान अब डिफॉल्ट ऑनलाइन विकल्प होंगे
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे के अनुसार, 1 नवंबर से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान डिफॉल्ट विकल्प बन जाएंगे। जो निवेशक रेगुलर प्लान चुनते हैं, उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि इनका एक्सपेंस रेशियो अधिक होता है। डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर कम होता है क्योंकि इनमें डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल नहीं होता, जबकि रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूशन सेवाएं शामिल होती हैं।
टोल प्लाजा को लेकर बदले नियम
टोल प्लाजा के आसपास रहने वालों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने टोल नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वालों को सालाना पास सस्ते में मिलेगा। सड़क परिवहन मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को जीएआर 917(ई) नोटिफिकेशन जारी किया है, जो 1 नवंबर 2026 से लागू हो गए हैं। नए नियम के तहत अगर आपका निजी वाहन है, उस पर वैध फास्टैग लगा है और आप टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के भीतर रहते हैं, तो आप लोकल वार्षिक पास ले सकते हैं। अगर टोल प्लाजा नगर पालिका क्षेत्र से बाहर है तो सालाना फीस 1 हजार 500 रुपये होगी। और अगर टोल शहर के अंदर है तो 3 हजार रुपये सालाना देने होंगे। ये पास सिर्फ एक ही टोल प्लाजा के लिए वैध होगा। लेकिन ये सुविधा उन हाईवे पर नहीं मिलेगी जहां क्लोज्ड सिस्टम से टोल लिया जाता है, या जहां सर्विस रोड मौजूद है।
नवंबर 2026 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का समय से पहले रिडेम्पशन
जिन निवेशकों के पास सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड हैं, उन्हें नवंबर 2026 में चार पात्र सीरीज को समय से पहले रिडीम करने का मौका मिलेगा। इनमें 2020-21 सीरीज II शामिल है, जिसका रिडेम्पशन 19 नवंबर को होना है, और 2020-21 सीरीज VIII, जिसका रिडेम्पशन 18 नवंबर को होना है। बाकी दो में 2021-22 सीरीज I शामिल है, जिसे 25 नवंबर को रिडीम किया जा सकता है, और 2021-22 सीरीज VII, जिसका रिडेम्पशन 2 नवंबर को होना है।
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