नीदरलैंड ने लौटाई चोल काल की 1000 साल पुरानी ऐतिहासिक निशानियां

नीदरलैंड ने 11वीं शताब्दी के चोल कालीन शिलालेख पीएम मोदी को सौंपे। जानें इन 1000 साल पुराने ऐतिहासिक अवशेषों का महत्व और भारत-नीदरलैंड के बीच हुए नए समझौते।

May 17, 2026 - 09:35
 0  2
नीदरलैंड ने लौटाई चोल काल की 1000 साल पुरानी ऐतिहासिक निशानियां

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, नीदरलैंड ने चोल काल के लगभग 1000 साल पुराने तांबे के शिलालेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिए हैं। पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान वापस किए गए इन शिलालेखों को विरासत के सम्मान और एक बड़ी सांस्कृतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। ये शिलालेख 11वीं शताब्दी के हैं, जिन्हें सदियों पहले डच ईस्ट इंडिया कंपनी अपने साथ नीदरलैंड ले गई थी। इन अमूल्य सांस्कृतिक आकृतियों की वापसी के लिए भारत लंबे समय से राजनयिक प्रयास कर रहा था, जो अब सफल हुए हैं।

चोल शिलालेखों की खासियत और इतिहास

नीदरलैंड द्वारा लौटाए गए इन ऐतिहासिक अवशेषों में 21 बड़े और 3 छोटे तांबे के शिलालेख शामिल हैं। इनमें से अधिकांश शिलालेख दुनिया की सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषाओं में से एक, तमिल भाषा में उत्कीर्ण हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया और ये शिलालेख सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम को उनके पिता राजाराजा चोल प्रथम से मौखिक रूप से मिली प्रतिज्ञा को औपचारिक रूप देते हैं। ये चोल साम्राज्य की महिमा, उनकी प्रशासनिक व्यवस्था और उनके गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण हैं।

लीडेन यूनिवर्सिटी का योगदान और पीएम मोदी का आभार

प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड सरकार और विशेष रूप से लीडेन यूनिवर्सिटी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है। लीडेन यूनिवर्सिटी ने 19वीं शताब्दी के मध्य से इन तांबे के शिलालेखों को अत्यंत सुरक्षित तरीके से संरक्षित रखा था। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तमिल भाषा में अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि भारतीय होने के नाते हमें चोलों की संस्कृति और उनकी महान नौसैनिक शक्ति पर अपार गर्व है और यह कार्यक्रम नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन और मार्क रुट्टे की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आपसी सम्मान को दर्शाता है।

सेमीकंडक्टर और तकनीक के क्षेत्र में बड़े समझौते

पीएम मोदी की यह यात्रा केवल सांस्कृतिक धरोहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें भविष्य की तकनीक पर भी जोर दिया गया। अपनी 5 देशों की यात्रा के दूसरे पड़ाव पर नीदरलैंड पहुंचे पीएम मोदी के नेतृत्व में निवेश, सेमीकंडक्टर और तकनीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को गति देने के लिए नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी एएसएमएल (ASML) और भारत की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

भारत-नीदरलैंड संबंधों का नया अध्याय

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, पीएम मोदी ने भारत और नीदरलैंड के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास के महत्व को रेखांकित किया। चोल शिलालेखों की वापसी ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। यह न केवल अतीत की विरासत का सम्मान है, बल्कि भविष्य की तकनीकी और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने का एक जरिया भी है। इन समझौतों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से यह स्पष्ट है कि भारत और नीदरलैंड के संबंध अब एक नए और अधिक प्रगाढ़ दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow