नेपाल में तिब्बत से आई बाढ़ का तांडव: 22 की मौत और 1000 लोगों के बहने की आशंका

तिब्बत से आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के रसुवा में भारी तबाही मचाई है। 22 लोगों की मौत और 1000 के लापता होने की आशंका के बीच सेना का बचाव अभियान जारी है।

Aug 26, 2026 - 18:35
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नेपाल में तिब्बत से आई बाढ़ का तांडव: 22 की मौत और 1000 लोगों के बहने की आशंका

तिब्बत की ओर से अचानक आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे बाजार क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है और लेन्दे खोला जिसे भोटेकोशी के नाम से भी जाना जाता है, उसमें आई इस विनाशकारी बाढ़ से रसुवा सीमा नाके पर बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। स्थानीय अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, टिमुरे सहित आसपास के दो प्रमुख बाजार इस बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह से तहस-नहस हो गए हैं। बाढ़ का वेग इतना तीव्र था कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते पूरा इलाका जलमग्न हो गया।

हताहतों की संख्या और लापता होने की आशंका

इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 22 लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, तबाही का मंजर इससे कहीं अधिक भयावह होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय सूत्रों और प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इस विनाशकारी बाढ़ में लगभग 1000 लोगों के बहने की आशंका है। हालांकि, इस आंकड़े की अभी तक आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन राहत और बचाव कार्यों में जुटे दल इस बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बना रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन नदी का जलस्तर और बहाव अभी भी चुनौती बना हुआ है।

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की आपात बैठक

नेपाल में अचानक आई इस भीषण बाढ़ और उससे हुई भारी तबाही को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की एक आपात बैठक बुलाई है। प्रधानमंत्री के सलाहकार असीम शाह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री शाह स्वयं स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। वे सीधे प्रभावित क्षेत्रों के प्रमुख जिलाधिकारियों के संपर्क में हैं और हर पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और सरकार का मुख्य ध्यान इस समय फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने पर है।

बाजार और कस्टम कार्यालय को भारी क्षति

रसुवा के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने बताया कि बाढ़ ने न केवल रिहायशी इलाकों बल्कि व्यावसायिक और प्रशासनिक क्षेत्रों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ का पानी रसुवा भन्सार यानी कस्टम कार्यालय क्षेत्र में घुस गया, जिससे वहां खड़े बड़ी संख्या में वाहन और अन्य कीमती सामान बह गए। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को भी बड़ी चोट पहुंची है और पिछले साल की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए स्थान पर हाल ही में बनाया गया नया पुल भी इस बाढ़ के प्रचंड वेग को नहीं झेल सका और पूरी तरह बह गया। इससे क्षेत्र में आवाजाही और संपर्क पूरी तरह कट गया है।

बुधवार सुबह शुरू हुआ तबाही का सिलसिला

जिला पुलिस कार्यालय रसुवा के अनुसार, यह आपदा बुधवार सुबह करीब 9 बजे शुरू हुई जब अचानक आई भीषण बाढ़ ने टिमुरे बाजार की बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेन्द्र परियार ने जानकारी दी कि अचानक आई इस बाढ़ से निचले तटीय क्षेत्रों में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। कई बस्तियों में बाढ़ का पानी घुसने से लोग बेघर हो गए हैं और अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने को मजबूर हुए हैं।

पुलिस कार्यालयों और अन्य जिलों पर प्रभाव

तिब्बत की ओर से आई इस बाढ़ का असर सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। पुलिस प्रधान कार्यालय के अनुसार, रसुवा जिले में नेपाल पुलिस के तीन कार्यालयों को भारी क्षति पहुंची है और इनमें इलाका प्रहरी कार्यालय टिमुरे, प्रहरी चौकी स्याफ्रुबेसी और प्रहरी चौकी रसुवागढ़ी शामिल हैं। बाढ़ का पानी अब रसुवा से आगे बढ़कर नुवाकोट जिले तक पहुंच गया है और जिला प्रशासन कार्यालय नुवाकोट के सूचना अधिकारी रूपेश प्रसाद नेपाल ने इस बात की पुष्टि की है कि बाढ़ का खतरा अब उनके जिले में भी मंडरा रहा है।

यातायात पर प्रतिबंध और सुरक्षा उपाय

रसुवा में बाढ़ की स्थिति और संभावित जोखिमों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं। काठमांडू से रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिङ की ओर जाने वाले सभी वाहनों को काठमांडू में ही रोक दिया गया है। काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के एसपी नरेशराज सुवेदी ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इन जिलों की ओर जाने वाली सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। लोगों से अपील की गई है कि वे स्थिति सामान्य होने तक इन मार्गों पर यात्रा करने से बचें।

सेना के हेलीकॉप्टर और बचाव अभियान

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य को गति देने के लिए नेपाली सेना के दो हेलीकॉप्टर रसुवा के लिए रवाना किए गए हैं। नेपाली सेना के प्रवक्ता एवं ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत ने बताया कि दोनों हेलीकॉप्टर प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के कार्य में जुट गए हैं। भोटेकोशी नदी में आई इस भीषण बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने निजी हेलीकॉप्टर कंपनियों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनकी सेवाएं भी तत्काल ली जा सकें।

पांच जिलों में हाई अलर्ट और गृह मंत्री की अपील

भोटेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रसुवा, नुवाकोट, धादिङ, गोरखा और चितवन जिलों के नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की गई है और गृह मंत्री सुदन गुरुङ की मौजूदगी में मानसून प्रतिकार्य कमान्ड पोस्ट की आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। गृह मंत्री ने एक अत्यावश्यक सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के तटीय क्षेत्र मुग्लिन तक उच्च जोखिम में हैं। उन्होंने इन क्षेत्रों के परिवारों से अगले आदेश तक सुरक्षित स्थानों पर रहने का अनुरोध किया है।

हेल्पलाइन नंबर और यात्रा चेतावनी

सरकार ने प्रभावितों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1234 जारी किया है। किसी भी प्रकार की सहायता या खोज एवं बचाव की आवश्यकता होने पर नागरिक इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। इसके साथ ही, गृह मंत्री ने लोगों से पृथ्वी राजमार्ग, गल्छी–नुवाकोट–रसुवा–स्याफ्रुबेसी सड़क और मुग्लिन–नारायणगढ़ सड़क पर यात्रा न करने का आग्रह किया है। इन मार्गों पर आवागमन को फिलहाल पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

पुरानी यादें और पिछला अनुभव

यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र ने ऐसी आपदा का सामना किया है और इससे पहले 8 जुलाई 2025 को भी रसुवा के रासुवागढ़ी-टिमुरे इलाके में तिब्बत की ओर से आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस समय कम से कम 9 लोगों की मौत हुई थी और 19 अन्य लोग लापता हो गए थे। वर्तमान बाढ़ की तीव्रता और उससे होने वाला नुकसान पिछले अनुभवों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक नजर आ रहा है, जिसने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है।

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