डी-मार्ट, ब्लिंकिट और बिगबास्केट पर चीनी की राशनिंग शुरू, कीमतों में उछाल के बाद लगी पाबंदी

सप्लाई की कमी और 40 फीसदी मूल्य वृद्धि के कारण डी-मार्ट, ब्लिंकिट और बिगबास्केट ने चीनी की खरीद पर 3-5 किलो की सीमा लगा दी है।

Aug 26, 2026 - 13:35
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डी-मार्ट, ब्लिंकिट और बिगबास्केट पर चीनी की राशनिंग शुरू, कीमतों में उछाल के बाद लगी पाबंदी

भारत में त्योहारों के मुख्य सीजन की शुरुआत से ठीक पहले उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। देश के प्रमुख रिटेलर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे डी-मार्ट (D-Mart), बिगबास्केट (BigBasket), ब्लिंकिट (Blinkit) और स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) ने चीनी की खरीद पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। सप्लाई में भारी कमी और पिछले दो महीनों के भीतर रिटेल कीमतों में हुई 40 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी को देखते हुए इन कंपनियों ने चीनी की राशनिंग शुरू कर दी है। देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतें अब 70 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर गई हैं, जिसके कारण आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ गया है और कंपनियों को यह कदम उठाना पड़ा है।

विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर खरीद की सीमा

चीनी की किल्लत को देखते हुए अलग-अलग कंपनियों ने अपनी सुविधा और स्टॉक के अनुसार सीमाएं तय की हैं। कुछ क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने चीनी की खरीद को अधिकतम 5 किलो तक सीमित कर दिया है, जबकि कुछ अन्य रिटेलर्स ने इसे घटाकर केवल 3 किलो प्रति ग्राहक कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ब्लिंकिट ने मावाना प्रीमियम क्रिस्टल शुगर और धामपुर क्रिस्टल व्हाइट शुगर जैसे लोकप्रिय ब्रांडों के लिए प्रति ट्रांजैक्शन 5 किलो के केवल एक पैक की अनुमति दी है।

पुणे में स्थिति और भी सख्त देखी गई है, जहां ब्लिंकिट ग्राहकों को शॉपिंग कार्ट में 1-1 किलो के केवल तीन पैक जोड़ने की अनुमति दे रहा है। वहीं बिगबास्केट ने कुछ खास ब्रांड्स के लिए 1-1 किलो के पांच पैक तक की खरीद की सीमा तय की है। दिल्ली-एनसीआर में स्विगी इंस्टामार्ट पर सुप्रीम हार्वेस्ट क्रिस्टल शुगर और मधुर शुगर के लिए 1-1 किलो के केवल दो पैक की सीमा तय की गई थी। सुपरमार्केट चेन डी-मार्ट के पुणे स्टोर में भी एक बोर्ड लगाया गया है जिस पर लिखा है कि ग्राहक हर इनवॉइस पर केवल 5 किलो चीनी ही खरीद सकते हैं।

खाद्य उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग पर असर

चीनी की सप्लाई में आई इस कमी का असर केवल आम ग्राहकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पैकेज्ड फूड बनाने वाली कंपनियों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इन कंपनियों के लिए न केवल चीनी बल्कि खाने के तेल की लागत भी बढ़ गई है, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है। आमतौर पर इस सीजन में मांग काफी ज्यादा होती है, लेकिन बढ़ती लागत के कारण मैन्युफैक्चरर्स अब अपनी कीमतें 5 फीसदी से 6 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। एक प्रमुख स्नैक फूड कंपनी के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनके पास कीमतें लगभग 5 फीसदी बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

कीमतों में उछाल और सप्लाई की कमी के कारण

चीनी की कीमतों में इस अचानक उछाल के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। शुरुआती अनुमानों की तुलना में चीनी का उत्पादन कम होना और 8,00,000 टन चीनी का निर्यात किया जाना इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, कुछ बिचौलियों द्वारा कथित तौर पर की जा रही जमाखोरी ने भी स्थिति को बिगाड़ा है। यह भी कहा जा रहा है कि इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) जैसे इंडस्ट्री ग्रुप्स द्वारा दिए गए गलत उत्पादन अनुमानों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा की और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने पिछले हफ्ते 10 लाख टन चीनी के आयात को मंजूरी दी है।

निर्यात पर रोक और मिल कीमतों का गणित

5 मिलियन टन निर्यात किया जाना था। हालांकि, घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ते ही सरकार ने मई में निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी। मिल स्तर पर चीनी की कीमतें जून के पहले हफ्ते में 41 रुपये प्रति किलो थीं, जो बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। सरकारी हस्तक्षेप के बाद इस हफ्ते ये कीमतें घटकर 58 रुपये पर आ गई हैं। रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहारों से पहले पैकेज्ड फूड कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालेंगी।

कंपनियों की रणनीति

AWL एग्रीबिजनेस के एग्जीक्यूटिव डिप्टी चेयरमैन अंगशु मल्लिक ने बताया कि कई रिटेल चेन ने प्रति ग्राहक चीनी के पाउच की संख्या पर सीमा इसलिए लगाई है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को सामान मिल सके। AWL और श्री रेणुका शुगर्स (जिसमें विल्मर इंटरनेशनल की बड़ी हिस्सेदारी है) ने 'मधुर' ब्रांड की चीनी की मार्केटिंग के लिए साझेदारी की है। राशनिंग की यह प्रक्रिया स्टॉक को संतुलित करने और बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही है।

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