पाकिस्तान में गहराया संकट: खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन, कराची में धारा 144 लागू
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू। कराची में धारा 144 के तहत रैलियों पर रोक। आतंकवाद और राजनीतिक तनाव के बीच सेना तैनात।
पाकिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक मोर्चे पर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब देश आतंकवाद की नई लहर और राजनीतिक अस्थिरता के दोहरे संकट से जूझ रहा है और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ते हालात को देखते हुए वहां सेना की तैनाती के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं, ताकि कानून व्यवस्था को फिर से बहाल किया जा सके। अफगानिस्तान की सीमा से लगे इस प्रांत में हिंसा की बढ़ती घटनाओं ने सरकार को यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया है।
खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन का ऐलान
रविवार 11 अक्टूबर को पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने की आधिकारिक घोषणा की। इस फैसले के तहत प्रांतीय सरकार के सभी कार्यकारी अधिकार अब गवर्नर के पास चले गए हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस आपातकालीन कदम को अपनी मंजूरी दे दी है। सरकार का तर्क है कि प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और स्थानीय प्रशासन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में केंद्र का साथ नहीं दे रहा है। यह कदम प्रांतीय सरकार की शक्तियों को सीमित करने और केंद्र के सीधे नियंत्रण को स्थापित करने के लिए उठाया गया है।
प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने 11 सदस्यीय सलाहकार परिषद के गठन का भी ऐलान किया है। यह परिषद गवर्नर को महत्वपूर्ण निर्णयों में सलाह देगी। इसके अलावा, प्रांत के 12 जिलों के प्रशासनिक कार्यों को बेहतर ढंग से संभालने के लिए एक अलग सचिवालय स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इन कदमों का उद्देश्य उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना है जो आतंकवाद और हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित हैं। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में तेजी आएगी और प्रशासनिक ढिलाई को दूर किया जा सकेगा।
सेना की तैनाती और सुरक्षा के आंकड़े
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना की तैनाती का आदेश जारी किया। यह अनुच्छेद सरकार को नागरिक शक्ति की सहायता के लिए सशस्त्र बलों को बुलाने का अधिकार देता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताते हुए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उनके मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा में पिछले दो सालों के दौरान करीब 6200 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिनमें लगभग 1200 लोगों की जान चली गई। ये आंकड़े प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं।
रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि प्रांत में पुलिस बल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रांत में करीब 1 लाख 25 हजार पुलिसकर्मी हैं, लेकिन इसके बावजूद 17000 पद खाली पड़े हैं। सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल होने के बाद भी आतंकवाद पर लगाम नहीं लग पा रही है, इसलिए सेना की मदद लेना अनिवार्य हो गया है। सेना की मौजूदगी से आतंकवादियों के नेटवर्क को तोड़ने और आम जनता में सुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
कराची में धारा 144 और सख्त पाबंदियां
खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ पाकिस्तान के आर्थिक केंद्र कराची में भी प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। कराची में 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके तहत पांच से ज्यादा लोगों के एक जगह इकट्ठा होने, किसी भी प्रकार की रैली निकालने और धरना-प्रदर्शन करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम शहर की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
प्रशासन ने इन पाबंदियों के पीछे तर्क दिया है कि लगातार हो रहे प्रदर्शनों से ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ रही थी, जिससे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन प्रदर्शनों के कारण एम्बुलेंस और मरीजों का अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था और सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को निर्बाध रूप से चलाने के लिए 20 अक्टूबर तक किसी भी प्रकार के जमावड़े की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इमरान खान की रिहाई की मांग और राजनीतिक विरोध
इन सुरक्षा उपायों के पीछे एक बड़ा कारण इमरान खान की पार्टी पीटीआई (PTI) द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन भी हैं। पीटीआई ने इमरान खान की रिहाई, संविधान के पालन और कानून के शासन की मांग को लेकर कराची और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की योजना बनाई थी। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से ही उनके समर्थक लगातार सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। पीटीआई ने सरकार के इन फैसलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया है।
पाकिस्तान सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे आतंकवाद पर काबू पाना है और दूसरी तरफ बढ़ते राजनीतिक असंतोष को संभालना है। सेना की तैनाती और प्रदर्शनों पर रोक लगाने से सुरक्षा व्यवस्था में कितना सुधार होता है, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा। लेकिन इन घटनाओं ने पाकिस्तान की स्थिरता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। क्या इन सख्त फैसलों से देश में शांति लौटेगी, या सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और ज्यादा बढ़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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