ईरान ने होर्मुज खोलने से किया इनकार, अमेरिका की शर्तों को बताया नाकाफी
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर अमेरिका के जवाब को नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि सभी 7 शर्तें पूरी होने तक यह मार्ग बंद रहेगा।
ईरान ने सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में अमेरिका द्वारा दिए गए जवाब को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। तेहरान ने अमेरिकी रुख को नाकाफी बताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान द्वारा रखी गई सभी 7 शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए बंद रहेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है। हालांकि अमेरिका ने ईरान की कुछ शर्तों को स्वीकार किया है, लेकिन तेहरान का मानना है कि बाकी प्रमुख मुद्दों पर अमेरिका का रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है।
सात शर्तों पर अड़ा ईरान
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने रविवार को इस स्थिति पर अपना वक्तव्य जारी किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका का जवाब समझौते के लिए पर्याप्त नहीं है। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, रेजाई ने जोर देकर कहा कि अब अमेरिका को उन शेष शर्तों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी जिन पर उसने अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है और उन्होंने यह भी कहा कि ईरान फिलहाल अमेरिका को कोई नया जवाब देने का इरादा नहीं रखता है और अब आगे की कार्रवाई की जिम्मेदारी वाशिंगटन पर है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि होर्मुज को खोलने का निर्णय पूरी तरह से उन 7 शर्तों की पूर्ति पर निर्भर करता है जो पहले ही अमेरिका को सौंपी जा चुकी हैं।
कतर की मध्यस्थता और इस्लामाबाद समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच इस कूटनीतिक संवाद में कतर एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका ने कतर के माध्यम से ही अपना जवाब तेहरान तक पहुँचाया था। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र जून में हुए इस्लामाबाद समझौते के एक बेहतर संस्करण पर लौटना है। यह समझौता कुछ समय के लिए युद्ध जैसी स्थितियों को रोकने में सफल रहा था और इसमें होर्मुज के साथ-साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल थे। हालांकि, इन शर्तों को लागू करने को लेकर एक बड़ा विवाद बना हुआ है। पिछले हफ्ते रॉयटर्स को दी गई एक जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच असली विवाद शर्तों की प्रकृति को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर है कि कौन सी शर्त पहले पूरी की जाएगी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं कि समझौते की शर्तों को लागू करने की शुरुआत कौन करेगा।
परमाणु कार्यक्रम और निरीक्षण पर स्पष्टीकरण
समुद्री विवाद के साथ-साथ ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर भी अपनी स्थिति साफ कर दी है। ईरान ने कहा है कि वह फिलहाल इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने टिप्पणी की कि अमेरिका के प्रस्तावों में ज्यादातर वही पुरानी मांगें शामिल हैं जो परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हैं। बघाई ने उन खबरों का भी खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि ईरान प्रतिबंधों को हटाने के बदले संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी को जांच की अनुमति देने के लिए तैयार है। उन्होंने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि अभी ईरान की सर्वोच्च प्राथमिकता होर्मुज में सुरक्षा बहाल करना है। अमेरिका चाहता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं, लेकिन ईरान उसकी कुछ शर्तों को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं। फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों से पहले, दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का निरंतर खतरा बना हुआ है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने 4 अक्टूबर को इस कड़े रुख को दोहराते हुए कहा था कि जब तक जून के इस्लामाबाद समझौते पर आधारित सभी 7 शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक होर्मुज अमेरिका के लिए बंद रहेगा। गलीबाफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका अपनी एकतरफा मांगों के जरिए बातचीत को लंबे समय तक नहीं खींच सकता। फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है और स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
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