मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप का जनता की जेब में पैसे डालने वाला ऐलान, फ्रॉड की जानकारी देने पर मिलेगा इनाम
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 25 मिलियन डॉलर के फ्रॉड व्हिसलब्लोअर इंसेंटिव प्रोग्राम की घोषणा की है, जिससे सरकारी धोखाधड़ी की जानकारी देने वालों को इनाम मिलेगा।
अमेरिकी राजनीति और शासन प्रणाली में एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले कदम के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 25 मिलियन डॉलर यानी 23 करोड़ 68 लाख 30 हजार रुपये के एक बड़े कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसे फ्रॉड व्हिसलब्लोअर इंसेंटिव प्रोग्राम नाम दिया गया है। यह घोषणा ऐसे समय पर सामने आई है जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं, जिन पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं और इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को अमेरिकी सरकार में होने वाले संभावित धोखाधड़ी के मामलों की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि फेडरल प्रोग्राम और सरकारी फंड के दुरुपयोग को पूरी तरह से रोका जा सके। अमेरिकी सरकार की यह बड़ी घोषणा चुनाव से ठीक पहले हुई है, और राजनीतिक विश्लेषकों तथा जानकारों के बीच इस बात को लेकर चर्चा गर्म है कि ट्रंप प्रशासन ने यह कदम आम जनता की जेब में सीधे पैसा डालने और उन्हें इस प्रक्रिया का हिस्सेदार बनाने के उद्देश्य से उठाया है।
व्हाइट हाउस की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नए फ्रॉड व्हिसलब्लोअर इंसेंटिव प्रोग्राम के तहत यदि कोई भी आम नागरिक या व्यक्ति ऐसी पुख्ता जानकारी मुहैया कराता है जिसके आधार पर धोखाधड़ी के मामले में किसी दोषी को सजा मिलती है या फिर कोई बड़ी फेडरल कार्रवाई अमल में लाई जाती है, तो वह व्यक्ति 30,000 डॉलर यानी 30 हजार अमेरिकी डॉलर तक की नकद राशि पाने का पूरी तरह से हकदार होगा। इस पूरे और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का संचालन सीधे तौर पर अमेरिका का न्याय विभाग यानी जस्टिस डिपार्टमेंट करेगा, जो देश में कानून और व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी धन के सही इस्तेमाल की निगरानी भी करता है।
जब्त धोखाधड़ी रकम का मिलेगा एक फीसदी हिस्सा
इस नई योजना और घोषणा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया और अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया कि व्हिसलब्लोअर को दी जाने वाली पुरस्कार राशि उस कुल धोखाधड़ी की रकम का ठीक 1 फीसदी कमीशन होगी, जिसका खुलासा उस व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से संभव हो पाया है। ट्रंप ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि अगर किसी विशेष मामले में एक से अधिक लोग उस जानकारी को देने का दावा करते हैं और श्रेय मांगते हैं, तो वे खुद यह तय करेंगे कि आखिरकार इनाम की वास्तविक रकम किसे दी जानी चाहिए।
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अपने ठीक पीछे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खड़े होकर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इन सभी फैसलों और विवादों में अंतिम मध्यस्थ केवल और केवल मैं रहूंगा। यह एक पूरी तरह से बाध्यकारी मध्यस्थता होगी, जिसे टाला नहीं जा सकेगा। ट्रंप ने यह भी मजाक या गंभीरता के लहजे में कहा कि पत्रकार भी इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल हो सकते हैं और इसका लाभ उठा सकते हैं।
सरकारी धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए आक्रामक टास्क फोर्स
रिपब्लिकन पार्टी से ताल्लुक रखने वाले राष्ट्रपति ट्रंप ने देश की सरकार और प्रशासन तंत्र में हो रही धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए एक बेहद आक्रामक और कड़ी पहल शुरू की है। इस विशेष दिशा में काम करने के लिए उन्होंने इसी साल मार्च के महीने में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया था और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस महत्वपूर्ण टास्क फोर्स का प्रमुख या नेतृत्वकर्ता नियुक्त किया था। हालांकि दूसरी तरफ, विपक्षी दलों और आलोचकों ने लगातार ट्रंप और उनके परिवार पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि वे अपने विभिन्न बिजनेस वेंचर्स और व्यापारिक उपक्रमों के जरिए राष्ट्रपति पद का नाजायज फायदा उठा रहे हैं और अपने निजी हितों को साध रहे हैं और इसके जवाब में व्हाइट हाउस का हमेशा से यही कहना रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप जो कुछ भी करते हैं, वह पूरी तरह से पारदर्शी होता है और अमेरिका के आम लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखकर ही कोई कदम उठाया जाता है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस खुद अपने इस टास्क फोर्स का नेतृत्व करने के काम को बेहद मजेदार और चुनौतीपूर्ण बता रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि अमेरिकी नागरिकों के टैक्स का मुश्किल से कमाया गया पैसा इस प्रकार चुराया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि सरकारी धन की इस लूट को हर हाल में रुकना चाहिए और मौजूदा समय में यह रुक भी रही है और उन्होंने देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आप इस वित्तीय हेराफेरी और भ्रष्टाचार को रोकने में हमारी मदद करना चाहते हैं, तो आपको भी इसके बदले मिलने वाले आर्थिक फायदों में बराबर का हिस्सा मिलेगा।
इन्फ्लुएंसर को 10 हजार डॉलर देने का वादा
इस पूरे प्रकरण के बीच व्हाइट हाउस ने पहले यह भी कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप, निक शर्ली नाम के एक व्यक्ति को 10,000 डॉलर का चेक प्रदान करेंगे। आपको बता दें कि निक शर्ली एक दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर हैं, जिन्होंने पिछले साल सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था और उस वायरल वीडियो में शर्ली ने यह बड़ा दावा किया था कि मिनेसोटा राज्य के सोमाली समुदाय के लोग अमेरिकी फेडरल सब्सिडी और सरकारी मदद पाने के लिए फर्जी चाइल्डकेयर सेंटर चला रहे हैं। हालांकि, जब मीडिया और पत्रकारों की मौजूदगी का मौका आया, तो शर्ली को कोई भी चेक मौके पर नहीं दिया गया।
महज 24 साल के युवा निक शर्ली द्वारा बनाए गए इस वीडियो ने सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। हालांकि, मामले की जांच करने वाले सरकारी निरीक्षकों का यह कहना था कि ये चाइल्डकेयर सेंटर पूरी तरह से नियमों और उम्मीद के मुताबिक ही संचालित किए जा रहे थे। इसके बावजूद वीडियो के वायरल होने के बाद देश भर में गहन जांच-पड़ताल का दौर शुरू हुआ, कई जगहों पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा तलाशी ली गई और इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी दर्ज की गईं, जिससे यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया।
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