मिडिल ईस्ट तनाव और यूरोप की मांग से भारत का तेल निर्यात 1 साल के उच्चतम स्तर पर

जुलाई 2026 में भारत का रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट 1.53 मिलियन बैरल प्रति दिन के साथ एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। जानें रिलायंस और नायरा एनर्जी का योगदान।

Aug 4, 2026 - 14:35
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मिडिल ईस्ट तनाव और यूरोप की मांग से भारत का तेल निर्यात 1 साल के उच्चतम स्तर पर

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल और पश्चिमी देशों में ईंधन की भारी किल्लत के बीच भारतीय तेल रिफाइनिंग सेक्टर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जुलाई 2026 में भारत का कुल फ्यूल एक्सपोर्ट बढ़कर एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, और रूस द्वारा डीजल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वैश्विक बाजारों में रिफाइनिंग मार्जिन में भारी उछाल देखा गया है और इस स्थिति का लाभ उठाते हुए भारतीय रिफाइनरीज ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की है और दुनिया के प्रमुख स्विंग सप्लायर के रूप में उभरी हैं।

निर्यात के आंकड़ों में भारी उछाल

53 मिलियन बैरल प्रति दिन रिफाइंड फ्यूल का निर्यात किया। यह मात्रा पिछले 12 महीनों के औसत निर्यात की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक है। उल्लेखनीय है कि 2017 में जब से Kpler ने डेटा रिकॉर्ड करना शुरू किया है, तब से किसी भी जुलाई महीने में दर्ज किया गया यह सबसे अधिक निर्यात स्तर है। इस निर्यात वृद्धि में डीजल की मुख्य भूमिका रही है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसकी मांग और मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। भारत से यूरोप को लगभग 40 लाख से 50 लाख बैरल और ब्राजील को 28 लाख बैरल डीजल भेजा गया है।

वैश्विक संघर्ष और बदलता व्यापार मार्ग

पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे युद्धों ने वैश्विक ईंधन व्यापार के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरीज पर किए गए हमलों के कारण मॉस्को को पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी है और इसके परिणामस्वरूप, रूस को अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत जैसे देशों से आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है। Kpler के लीड एनालिस्ट निखिल दुबे के अनुसार, तुर्की जैसे देश जो पहले रूस से ईंधन खरीदते थे, अब भारतीय कार्गो को प्राथमिकता दे रहे हैं। यूरोप में डीजल की भारी कमी है और वहां की सप्लाई सीमित होने के कारण भारतीय रिफाइनरीज को रिकॉर्ड डीजल क्रैक का फायदा मिल रहा है।

निजी रिफाइनरीज का शानदार प्रदर्शन

भारत के इस रिकॉर्ड निर्यात में निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और नायरा एनर्जी का सबसे बड़ा योगदान रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की भारत के कुल रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट में लगभग तीन-चौथाई हिस्सेदारी है। निर्यात में इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की भरपूर उपलब्धता भी रही है। अमेरिका और ईरान के बीच थोड़े समय की शांति के दौरान रुके हुए कार्गो के आने से रिफाइनरीज को पर्याप्त कच्चा तेल मिला और इसके अलावा, रिलायंस और नायरा एनर्जी की रिफाइनरियों में मेंटेनेंस का काम समय पर पूरा होने से वे अधिक मात्रा में कच्चे तेल की प्रोसेसिंग कर पाईं। रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी ने पिछले महीने रूस को भी ईंधन भेजा है, जो वैश्विक बाजार की बदलती परिस्थितियों को दर्शाता है। मानसून के दौरान भारत में घरेलू मांग कम होने का भी रिफाइनरीज ने फायदा उठाया और अपना ध्यान पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय निर्यात पर केंद्रित किया।

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