यूक्रेन का रूस पर भीषण हमला: 1,000 से अधिक ड्रोन दागे, मॉस्को में भारी तबाही

यूक्रेन ने रूस पर 1,000 से अधिक ड्रोन से हमला किया, जिसमें मॉस्को को निशाना बनाया गया। हमले में 2 की मौत और 20 घायल हुए, तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा।

Sep 20, 2026 - 17:35
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यूक्रेन का रूस पर भीषण हमला: 1,000 से अधिक ड्रोन दागे, मॉस्को में भारी तबाही

यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष में एक बड़ा मोड़ आया है, जहां यूक्रेन ने रूस के विभिन्न हिस्सों पर 1,000 से अधिक ड्रोन दागकर एक भीषण हमला किया है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस हमले में विशेष रूप से राजधानी मॉस्को को निशाना बनाया गया और इसे मॉस्को पर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक माना जा रहा है। इस बड़े पैमाने पर किए गए हमले ने रूसी सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं और यह हमला रूस के लिए एक बड़ी सामरिक चुनौती बनकर उभरा है।

मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा हमला

यह हमला उस समय हुआ जब रूस में संसदीय चुनाव का तीसरा और अंतिम दिन चल रहा था। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने इस हमले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए इसे राजधानी पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला करार दिया और उन्होंने जानकारी दी कि इस हमले के कारण मॉस्को ऑयल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा है। सोबयानिन के अनुसार, यह अभूतपूर्व हमला चल रहे चुनावों में बाधा डालने का एक प्रयास था, लेकिन उन्होंने दावा किया कि दुश्मन अपने इस मकसद में पूरी तरह नाकाम रहा। मॉस्को की ओर अकेले 450 ड्रोन भेजे गए थे, जिससे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

हताहतों की संख्या और नुकसान का विवरण

मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस भीषण ड्रोन हमले में 2 लोगों की जान चली गई और 20 लोग घायल हुए हैं। जान गंवाने वालों में एक 74 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति और एक 44 वर्षीय महिला शामिल हैं। घायलों का इलाज जारी है और राहत कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। हमले का असर केवल जान-माल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मॉस्को ऑयल रिफाइनरी जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा एक रिहायशी इमारत को भी क्षति पहुंची है, जो रिहायशी इलाकों में हमले के खतरे को दर्शाता है।

जेलेंस्की ने दी हमले की जानकारी

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की और बताया कि इसमें यूक्रेन में ही निर्मित फ्लेमिंगो और पेलिकन मिसाइलों सहित विभिन्न प्रकार के ड्रोन का उपयोग किया गया था और जेलेंस्की के अनुसार, इन हमलों का मुख्य लक्ष्य रूस की तेल और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन हमलों का उद्देश्य रूस की युद्ध मशीनरी को आर्थिक रूप से कमजोर करना है। यूक्रेन द्वारा स्वदेशी तकनीक जैसे फ्लेमिंगो और पेलिकन का उपयोग यह दर्शाता है कि वह अब लंबी दूरी के हमलों के लिए आत्मनिर्भर हो रहा है।

रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा और चुनावी माहौल

दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर दावा किया कि उनकी सेना ने देश भर में कुल 1,100 यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराया है। मंत्रालय के अनुसार, इन ड्रोनों में वे ड्रोन भी शामिल थे जो क्रीमिया और काला सागर के ऊपर उड़ान भर रहे थे। यह हमला रूस में चल रहे उन संसदीय चुनावों के दौरान हुआ है, जिन्हें युद्ध शुरू होने के बाद का पहला युद्धकालीन चुनाव कहा जा रहा है। इन चुनावों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नीतियों के खिलाफ विपक्ष की भूमिका बहुत सीमित देखी गई है।

विवादित क्षेत्रों में मतदान और बुचा हमले का संदर्भ

रूस ने यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों में भी मतदान आयोजित किया है, जिन्हें उसने युद्ध के दौरान अपने क्षेत्र में मिलाने का दावा किया था, हालांकि इन क्षेत्रों के सभी हिस्सों पर रूस का पूर्ण नियंत्रण नहीं है और इसके साथ ही 2014 में मिलाए गए क्रीमिया में भी मतदान कराया गया। यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में रूसी चुनाव कराने की प्रक्रिया को पूरी तरह से अवैध करार दिया है और इस बड़े ड्रोन हमले की पृष्ठभूमि में कुछ दिन पहले रूस द्वारा यूक्रेन की राजधानी कीव के पास बुचा जिले में किया गया हमला भी शामिल है, जिसमें 37 लोगों की मौत हो गई थी। यूक्रेन का यह ताजा हमला उसी संघर्ष की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

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