रांची विधानसभा घेराव मामला: 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज, 100 लोग नामजद
रांची में 10 अगस्त को हुए विधानसभा घेराव के मामले में 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने 100 लोगों को नामजद किया है। झड़प में 14 पुलिसकर्मी घायल हुए।
झारखंड की राजधानी रांची में विधानसभा घेराव के दौरान हुई हिंसक झड़प और हंगामे के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। रांची पुलिस ने इस मामले में कुल 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन 600 लोगों में से 100 प्रदर्शनकारियों को नामजद किया गया है, जबकि अन्य 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। यह पूरी कार्रवाई 10 अगस्त सोमवार को हुए विधानसभा घेराव मार्च के दौरान हुई घटनाओं के मद्देनजर की गई है, जहां छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी।
प्राथमिकी और कानूनी धाराएं
विधानसभा थाना में दर्ज की गई इस प्राथमिकी में अज्ञात उपद्रवियों और नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर और सुसंगत धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस प्रशासन अब उन 100 नामजद आरोपियों की तलाश में जुट गया है, साथ ही प्रदर्शन के दौरान हुए उपद्रव में शामिल रहे अन्य 500 अज्ञात लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वालों और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
10 अगस्त को हुआ था विधानसभा घेराव
रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच, प्रदर्शनकारियों ने 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की थी। इस दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने छात्रों को आगे बढ़ने से रोका। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, पानी की बौछारें (वॉटर कैनन) छोड़ीं और आंसू गैस के गोले भी दागे। पुलिस की यह कार्रवाई जगन्नाथपुर मंदिर के पास हुई, जैसे ही प्रदर्शनकारी विधानसभा भवन की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया।
झड़प में घायल हुए लोग और पुलिसकर्मी
इस विरोध प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वे पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस के कारण घायल हो गए हैं। दूसरी ओर, रांची पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि इस झड़प के दौरान 14 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई इस भिड़ंत ने शहर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने अब कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।
बीजेपी का झारखंड बंद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज और बल प्रयोग के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मंगलवार को झारखंड बंद का ऐलान किया था और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि सोमवार को रांची में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा पानी की बौछार करने, आंसू गैस के गोले दागने और लाठीचार्ज करना छात्रों के खिलाफ अत्याचार है। बीजेपी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों की जायज शिकायतों का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ दमनकारी नीतियों और बल का प्रयोग कर रही है।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का बयान
विधानसभा घेराव मार्च का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने पुलिसिया कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है और यह अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। " उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि यह सरकार हमारी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है और इसके लिए वॉटर कैनन व आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पूरी तरह से निंदनीय है। महतो ने सरकार को 'कायर' बताते हुए कहा कि सरकार छात्रों की ताकत से डरी हुई है।
25 जुलाई से जारी है छात्रों का आंदोलन
उल्लेखनीय है कि छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 25 जुलाई से ही लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के कामकाज के तरीके में सुधार करना शामिल है। इसके अलावा, छात्र कई विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इन मामलों की जांच सीबीआई (CBI) से कराई जाए या फिर झारखंड से बाहर के किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
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