ईरान की करेंसी में ऐतिहासिक गिरावट: एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल पहुंची
मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर। एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल के पार पहुंची।
ईरान की मुद्रा रियाल में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरानी रियाल मंगलवार को एक बार फिर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। तेहरान के विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबारियों ने एक अमेरिकी डॉलर के बदले 2500000 से अधिक रियाल का विनिमय किया। यह गिरावट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्रीय संघर्ष ने ईरान की आर्थिक स्थिति को किस हद तक कमजोर कर दिया है।
महज 27 दिनों में टूटा पिछला रिकॉर्ड
ईरानी मुद्रा के मूल्य में गिरावट की गति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इससे पहले 2 सितंबर को रियाल 2200000 रियाल प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गया था, जिसे उस समय का सबसे निचला स्तर माना गया था। हालांकि, महज 27 दिनों के भीतर ही मुद्रा ने एक और नया रिकॉर्ड बना दिया है। जब से युद्ध की शुरुआत हुई है, तब से ईरानी मुद्रा लगातार नए निचले स्तरों को छू रही है। मुद्रा में यह ऐतिहासिक गिरावट ऐसे समय में आई है जब युद्ध के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर कड़े प्रतिबंधों, व्यापारिक बाधाओं और क्षेत्रीय तनाव का भारी दबाव बना हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत में तेजी
इस आर्थिक उथल-पुथल के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत अब अधिक गंभीर चरण में पहुंच गई है। इस बातचीत का मुख्य केंद्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना है। अराघची ने ईरानी मीडिया को बताया कि कतर के मध्यस्थ बहुत जल्द अमेरिकी पक्ष से इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करेंगे। उनके अनुसार, अमेरिका की प्रतिक्रिया प्राप्त होने के बाद ही तेहरान में आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।
कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका
विदेश मंत्री अराघची ने यह जानकारी न्यूयॉर्क से रवाना होने से पहले साझा की। वह वहां संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भाग लेने के लिए गए थे और इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान तथा कतर के मध्यस्थों के साथ महत्वपूर्ण मुलाकातें कीं। अमेरिकी और क्षेत्रीय अधिकारियों के हवाले से यह बात सामने आई है कि ये मध्यस्थ ईरान और अमेरिका के बीच चल रही लड़ाई को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान की शर्तें और अमेरिकी रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान द्वारा रखे गए उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिसमें कई शर्तें शामिल थीं। ईरान ने मांग की थी कि अमेरिकी नाकाबंदी हटाई जाए, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी किया जाए और ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाए। ईरान का प्रस्ताव था कि यदि इन शर्तों पर सहमति बनती है, तो वह 7 दिन के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल सकता है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया है।
IRGC की अमेरिकी जनता से अपील
इसी बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता जनरल होसैन मोहेब्बी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी नागरिकों से युद्ध के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने अमेरिकियों से अपनी सरकार पर दबाव बनाने की अपील की और मोहेब्बी ने दावा किया कि युद्ध को समाप्त करने का एकमात्र तरीका यह है कि अमेरिका अपनी हार स्वीकार करे और मध्य पूर्व से पूरी तरह हट जाए। उन्होंने अमेरिका पर यह आरोप भी लगाया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को देश की संपत्ति पर कब्जा करने के एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिका का दावा और चुनाव का असर
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सहयोगियों का मानना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक युद्ध के इस भारी दबाव को सहन नहीं कर पाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध की शुरुआत में इसके कुछ ही हफ्तों में खत्म होने की उम्मीद जताई थी, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि यह युद्ध संभवतः अमेरिका में नवंबर में होने वाले चुनावों के बाद ही समाप्त होगा। इस बीच, युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर अमेरिकी मतदाताओं के बीच भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जो वहां की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
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