राजस्थान विधानसभा: वंदे मातरम् पर सियासी घमासान, टीकाराम जूली ने सत्ता पक्ष पर लगाया साजिश का आरोप

राजस्थान विधानसभा में वंदे मातरम् गायन पर विवाद। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सत्ता पक्ष पर विधायकों को गेट पर रोकने और साजिश रचने का आरोप लगाया।

Aug 20, 2026 - 23:35
 0  0
राजस्थान विधानसभा: वंदे मातरम् पर सियासी घमासान, टीकाराम जूली ने सत्ता पक्ष पर लगाया साजिश का आरोप

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। सदन की कार्यवाही में कांग्रेस विधायकों के शामिल नहीं होने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। मुख्य विवाद वंदे मातरम् के गायन को लेकर पैदा हुआ, जिसमें सत्ता पक्ष ने विपक्ष की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जबकि विपक्ष ने इसे सरकार की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

सत्ता पक्ष के आरोप और विपक्ष की गैरमौजूदगी

सदन की कार्यवाही के दौरान जब वंदे मातरम् का गायन हुआ, तब कांग्रेस के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। इस स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन से बचने के लिए सदन में नहीं आए। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे राष्ट्रीय परंपराओं का अपमान बताते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े किए। इस मुद्दे ने सदन के बाहर और भीतर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

टीकाराम जूली का पलटवार और ऐतिहासिक संदर्भ

सत्ता पक्ष के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगाना पूरी तरह से गलत और निराधार है। जूली ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के समय से ही अपने अधिवेशनों और कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का गायन करती आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा अब कांग्रेस की देशभक्ति और परंपराओं पर सवाल कैसे उठा सकती है, जबकि कांग्रेस हमेशा से वंदे मातरम् का सम्मान करती रही है।

गेट पर रोके जाने का आरोप और साजिश का दावा

नेता प्रतिपक्ष ने सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक किसी बहिष्कार की वजह से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत सदन में नहीं पहुंच सके। जूली ने बताया कि जब विधायक विधानसभा पहुंचे, तो उन्हें उस गेट पर रोक दिया गया जिसका उपयोग वे सामान्य तौर पर प्रवेश के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि उन्हें क्यों रोका जा रहा है, लेकिन बाद में जब सत्ता पक्ष ने वंदे मातरम् को लेकर आरोप लगाने शुरू किए, तब उन्हें अहसास हुआ कि यह सब उन्हें सदन से बाहर रखने की एक साजिश थी। जूली का दावा है कि यदि गेट बंद नहीं किया जाता, तो सभी विधायक समय पर सदन के भीतर होते।

विशेषाधिकार हनन का नोटिस और लोकतांत्रिक मर्यादा

विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोके जाने की घटना को टीकाराम जूली ने बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस विधायक इस मामले में विशेषाधिकार हनन का नोटिस लेकर आएंगे। जूली ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को उनके कार्यस्थल यानी विधानसभा में आने से रोकना उनके अधिकारों का हनन है और उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी कमियों और कथित भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए जनप्रतिनिधियों और मीडिया पर पाबंदियां लगा रही है। उन्होंने सरकार के इस कदम की तुलना स्कूल जाने से रोकने से की और कहा कि इस तरह के अलोकतांत्रिक कानूनों को वापस लेना ही पड़ेगा।

जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा की मांग

टीकाराम जूली ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता वंदे मातरम् जैसे मुद्दों पर राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि अपने जीवन से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर समाधान चाहती है। उन्होंने मांग की कि विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के लिए रोजगार, प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को प्रदेश में बढ़ते अपराधों और बेरोजगारी पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विधानसभा का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए किया जाना चाहिए।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow