राजस्थान विधानसभा सत्र: कांग्रेस का मटके और पोस्टरों के साथ जोरदार प्रदर्शन
राजस्थान विधानसभा के बाहर कांग्रेस और बीएपी विधायकों का प्रदर्शन। ओएमआर घोटाला और प्रसूताओं की मौत पर सरकार को घेरा।
राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर अपने तेवर साफ कर दिए। सदन के बाहर विपक्ष ने मटके और पोस्टरों के जरिए सरकार पर तीखा निशाना साधा। पहले दिन विधानसभा के गेट पर विपक्ष को रोके जाने को लेकर हुए सियासी विवाद के बाद आज कांग्रेस विधायक पूरी एकजुटता के साथ विधानसभा पहुंचे और मुख्य द्वार के बाहर विधायकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस की इस रणनीति ने साफ कर दिया है कि सदन के भीतर सरकार के लिए राह आसान नहीं होने वाली है।
विपक्ष ने उठाए ओएमआर घोटाला और प्रसूताओं की मौत के मुद्दे
कांग्रेस विधायक अपने हाथों में विभिन्न मांगों और आरोपों से संबंधित पोस्टर लेकर पहुंचे थे। इन पोस्टरों के माध्यम से ओएमआर शीट घोटाला, छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग, और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतीक्षा सूची के नियम लागू करने जैसे गंभीर विषयों को उठाया गया। इसके अलावा, राजस्थान में प्रसूताओं की बढ़ती मौत के आंकड़ों को लेकर भी सरकार को घेरा गया और कांग्रेस ने इन संवेदनशील मुद्दों को अपना मुख्य हथियार बनाया है ताकि सदन के भीतर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया जा सके। विधायकों का कहना था कि सरकार जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर बात करने से बच रही है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार को बताया पूरी तरह विफल
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार अपने ढाई साल के कार्यकाल में हर मोर्चे पर विफल रही है और उन्होंने कहा कि जब भी सरकार से महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब मांगा जाता है, तो वह ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। डोटासरा के अनुसार, चाहे वंदे मातरम का मामला हो या कोई अन्य विषय, सरकार का एकमात्र उद्देश्य वास्तविक जनसमस्याओं से जनता का ध्यान हटाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक अब चुप नहीं बैठेंगे और विधानसभा के भीतर सरकार से हर विफलता का हिसाब मांगेंगे।

टीकाराम जूली बोले: ढाई साल में भर गया पाप का घड़ा
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश की जनता अब सरकार की हकीकत को समझ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है और अब विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। जूली ने विधानसभा के गेट पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और विपक्ष को रोकने की कोशिशों की निंदा की। उन्होंने मटके का उदाहरण देते हुए कहा कि इस सरकार के पाप का घड़ा मात्र ढाई साल में ही भर चुका है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनता के मुद्दों को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह पूरी मजबूती के साथ उठाता रहेगा।
भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को बताया राजनीतिक ड्रामा
दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन को महज एक राजनीतिक दिखावा करार दिया है। भाजपा विधायक जितेंद्र गोठवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास जनता से जुड़ा कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है और उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल दिल्ली से मिलने वाले निर्देशों का पालन कर रही है और प्रदर्शन के नाम पर नाटक कर रही है। गोठवाल ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस वंदे मातरम के गायन से बचने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन कांग्रेस चर्चा करने के बजाय सदन से भागने की राजनीति करती है।

भारत आदिवासी पार्टी ने भी किया प्रदर्शन
कांग्रेस के साथ-साथ भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायकों ने भी आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और बेरोजगारी की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। विधायक जयकृष्ण पटेल ने आरोप लगाया कि उन्हें मुख्य द्वार पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोका गया, जो लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधियों का अपमान है और बीएपी विधायकों ने मांग की कि आदिवासी इलाकों में शिक्षा की व्यवस्था सुधारी जाए और प्रथम श्रेणी की नौकरियों में बेरोजगारों को अलग से आरक्षण दिया जाए। इन प्रदर्शनों के कारण विधानसभा परिसर में सुबह से ही भारी गहमागहमी बनी रही।
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