राजस्थान हाई कोर्ट की सुरक्षा में सेंध: जोधपुर पीठ से SOG के 5 मुकदमों की फाइलें गायब
राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से छेड़छाड़ कर एसओजी के 5 मुकदमों की फाइलें हटाने का मामला सामने आया है।
राजस्थान के उच्च न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था में एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक चूक का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई है। इस तकनीकी सेंधमारी के परिणामस्वरूप, अदालत के डिजिटल रिकॉर्ड से पांच महत्वपूर्ण मुकदमों की फाइलें पूरी तरह से हटा दी गई हैं। फाइलों के इस तरह अचानक गायब होने के कारण निर्धारित समय पर इन मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न हुआ है। बताया जा रहा है कि ये सभी पांच मामले राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप यानी एसओजी से संबंधित थे। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है और इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है ताकि दोषियों की पहचान की जा सके।
सुनवाई से ठीक पहले हुई डिजिटल छेड़छाड़
राजस्थान पुलिस ने बृहस्पतिवार, 13 अगस्त को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए जोधपुर हाई कोर्ट के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में हुई इस छेड़छाड़ की विस्तृत जानकारी साझा की। पुलिस के आधिकारिक बयानों के अनुसार, राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकियों से जुड़े 5 महत्वपूर्ण मामलों को अदालत के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से डिलीट या हटा दिया गया था। जांच में यह बात सामने आई है कि इस अनधिकृत कार्य को अंजाम देने के लिए अदालत के ही एक कर्मचारी की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल किया गया था और इस डिजिटल हेरफेर का सीधा असर यह हुआ कि ये पांचों मामले अदालत की दैनिक वाद सूची यानी कॉज लिस्ट से बाहर हो गए। इसके परिणामस्वरूप, 5 अगस्त को होने वाली इन मामलों की महत्वपूर्ण सुनवाई को रोकना पड़ा। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के साथ यह कथित छेड़छाड़ की घटना सुनवाई की तारीख से ठीक 5 दिन पहले, यानी 31 जुलाई को अंजाम दी गई थी।
अदालती कामकाज में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भूमिका
वर्तमान समय में उच्च न्यायालयों के कामकाज में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम एक रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करता है। अदालतों में इसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन केस की स्थिति की जानकारी अपडेट की जाती है। इसके अलावा, लाइव डिस्प्ले बोर्ड, ई-फाइलिंग की सुविधा, डिजिटल वाद सूची का प्रबंधन और कई महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यवाहियां इसी के भरोसे संचालित होती हैं। विशेष रूप से जमानत याचिकाओं जैसे मामलों में अब कागज रहित यानी पेपरलेस न्यायिक कार्यवाही को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें यह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम अनिवार्य भूमिका निभाता है। ऐसे में इस सिस्टम के साथ छेड़छाड़ होना न केवल सुरक्षा में सेंध है, बल्कि यह पूरी न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता पर भी सवाल खड़े करता है।
पुलिसिया कार्रवाई और अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी
इस डिजिटल चोरी और सिस्टम के साथ हुई छेड़छाड़ की पुष्टि होने के तुरंत बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई। राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) देवेंद्र सिंह भाटी की ओर से इस संबंध में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। इस शिकायत के आधार पर 12 अगस्त को जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय कानून की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिसमें आपराधिक साजिश रचने, चोरी करने और साइबर अपराध से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। कुड़ी भगतासनी थाना प्रभारी सोमकरण ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस की विशेष टीमें इस घटना की तह तक जाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही हैं और पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कर्मचारी की आईडी का उपयोग किसने और किस उद्देश्य से किया था।
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