राहुल गांधी का सरकार से सवाल: दिया जलाने के लिए पैसा है, छात्रों के हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?

राहुल गांधी ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीयों के खर्च और छात्रों के हॉस्टल की कमी को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।

Sep 20, 2026 - 16:35
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राहुल गांधी का सरकार से सवाल: दिया जलाने के लिए पैसा है, छात्रों के हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देश भर में दीये जलाए जाने के आयोजन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इस आयोजन को छात्रों की बुनियादी जरूरतों और उनके संघर्षों से जोड़ते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास उत्सवों और दीयों पर खर्च करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है, लेकिन जब ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए बुनियादी ढांचे और वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात आती है, तो सरकार के पास पैसा नहीं होता।

इंदौर की छात्रा का सवाल और हॉस्टल की समस्या

राहुल गांधी ने रविवार 20 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने इंदौर में आयोजित अपने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा द्वारा उठाए गए दर्दनाक सवाल का उल्लेख किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक छात्रा ने उनसे पूछा कि सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है लेकिन हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं और वह छात्रा गांव से पढ़ाई करने के लिए शहर आई थी, लेकिन सरकारी हॉस्टल की सुविधा न होने के कारण उसे निजी पीजी में रहना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने बताया कि सिर्फ सुरक्षित रहने के लिए छात्रों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और हर महीने किराए की चिंता और बेघर होने का डर छात्रों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

आवास और सुरक्षा के अभाव में पढ़ाई छोड़ती छात्राएं

कांग्रेस सांसद ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि आवास और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई महिला छात्राएं अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि कई लड़कियां सिर्फ इसलिए शिक्षा से वंचित रह जाती हैं क्योंकि उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। राहुल गांधी ने आवास भत्ते के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि यह भत्ता महंगाई के अनुपात में नहीं बढ़ता है और जो थोड़ा बहुत मिलता भी है, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या उनके पास उस बच्ची के इस बुनियादी सवाल का कोई जवाब है।

सिस्टम पर कब्जे का आरोप और संस्थागत विफलता

इससे पहले शनिवार को इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने देश की वर्तमान व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 'देश पर सिस्टम का कब्जा' नाम से एक प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारत के कई प्रमुख संस्थानों पर राजनीतिक, प्रशासनिक, वैचारिक और कारोबारी हितों से जुड़े एक खास नेटवर्क का प्रभाव हो गया है। उन्होंने परीक्षा के प्रश्नपत्रों के लीक होने, संस्थागत कामकाज में गिरावट और अर्थव्यवस्था में कुछ खास निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भूमिका का उदाहरण दिया। उन्होंने अमित शाह के बेटे जय शाह की क्रिकेट प्रशासन में नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया और कहा कि छात्र आज पूछ रहे हैं कि वह क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन कैसे बन गए।

विद्यार्थी बनाम अंधभक्त: राहुल गांधी का दृष्टिकोण

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में 'विद्यार्थी' और 'अंधभक्त' के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को जिज्ञासु छात्रों की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे ऐसे 'अंधभक्त' चाहिए जो कभी सवाल न पूछें। राहुल गांधी के अनुसार, जो व्यक्ति सवाल नहीं पूछता, वह छात्र की भूमिका नहीं निभा रहा है और उन्होंने कहा कि विद्यार्थी वह होता है जो आवाज उठाता है और निडर होकर सवाल पूछता है, जबकि अंधभक्त अपने ही भ्रमों की दुनिया में जीता है और कायर होता है। उन्होंने न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि ये संस्थाएं अपना कर्तव्य निभाने में विफल हो रही हैं क्योंकि सिस्टम पर कुछ खास लोगों का कब्जा है।

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