रुपया हुआ मजबूत: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से डॉलर को मिली शिकस्त
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 52 पैसे मजबूत हुआ। जानिए बाजार के ताजा आंकड़े और विशेषज्ञों की राय।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भारतीय रुपए ने जबरदस्त वापसी की है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत की है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे की मजबूती के साथ 94 रुपये 24 पैसे पर पहुंच गया। बाजार खुलने के समय यह 94 रुपये 30 पैसे पर था, लेकिन जल्द ही इसमें सुधार देखा गया। यह तेजी पिछले बंद भाव के मुकाबले काफी महत्वपूर्ण है। इससे पहले बुधवार को भी रुपए में अच्छी बढ़त देखी गई थी, जब यह 21 पैसे मजबूत होकर 94 रुपये 55 पैसे पर बंद हुआ था। इस तरह पिछले दो दिनों के कारोबार में रुपए ने डॉलर के मुकाबले कुल 52 पैसे की शानदार छलांग लगाई है।
सस्ता कच्चा तेल बना रुपए का सबसे बड़ा सहारा
रुपए की इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट है। लगभग चार महीनों के लंबे अंतराल के बाद सस्ता कच्चा तेल एक बार फिर भारतीय मुद्रा के लिए मददगार साबित हो रहा है। गुरुवार को खाड़ी देशों के कच्चे तेल की कीमतें उस स्तर पर आ गईं, जो पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले देखी गई थीं और कच्चे तेल की कीमतों में इस गिरावट की वजह से डॉलर इंडेक्स की मजबूती भी रुपए को कमजोर करने में नाकाम रही। भारत के लिए सस्ता तेल आयात बिल को कम करने में मदद करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होता है और घरेलू करेंसी को मजबूती मिलती है।
विशेषज्ञों की राय और बाजार का विश्लेषण
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव ने बाजार की इस स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट के कारण ही रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 रुपये 30 पैसे पर मजबूती के साथ खुला। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 10 प्रतिशत से ज्यादा और इस पूरे महीने में 21 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। कीमतें अब ईरान संघर्ष से पहले के स्तर से भी नीचे आ गई हैं। हालांकि, यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि रुपए की यह बढ़त एक सीमा तक ही रही क्योंकि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अभी भी 101 दशमलव 50 के आसपास बना हुआ है, जो एक साल के उच्चतम स्तर के करीब है। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने की संभावनाएं बनी हुई हैं।
शेयर बाजार और अन्य आर्थिक आंकड़े
बाजार के अन्य संकेतकों की बात करें तो डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को दर्शाता है, 101 दशमलव 50 पर कारोबार कर रहा था, जिसमें 0 दशमलव 10 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई। वहीं, ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 1 दशमलव 72 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 72 डॉलर 47 पैसे प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल रहा, जहां शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 440 दशमलव 23 अंक चढ़कर 77,435 दशमलव 76 पर पहुंच गया और निफ्टी 137 दशमलव 80 अंक की बढ़त के साथ 24,147 दशमलव 60 पर पहुंच गया। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने रुपए की बढ़त की रफ्तार को थोड़ा धीमा किया। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को नेट आधार पर 1,843 करोड़ 40 लाख रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार में डॉलर की मांग बनी रही।
रुपए के भविष्य पर असर
दो दिनों में 52 पैसे की यह तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। कच्चे तेल की कीमतों का प्री-वॉर लेवल पर आना भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए राहत की बात है और यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह स्थिर रहती हैं या और गिरती हैं, तो आने वाले समय में रुपए में और भी मजबूती देखी जा सकती है। फिलहाल बाजार की नजरें वैश्विक राजनीतिक स्थितियों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसलों पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में मुद्रा बाजार की दिशा तय करेंगे।
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