वायनाड भूस्खलन: मीनाक्षी पुल के पास लैंडस्लाइड में 3 की मौत, रेस्क्यू जारी
वायनाड के मीनाक्षी पुल के पास भूस्खलन से 3 लोगों की मौत हो गई है। मेप्पाडी में टनल निर्माण स्थल पर मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
केरल के वायनाड जिले से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां मेप्पाडी के पास मीनाक्षी पुल के पास भीषण भूस्खलन हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह घटना उस क्षेत्र में हुई है जहां टनल निर्माण का कार्य चल रहा था। भूस्खलन की खबर मिलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया और मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है ताकि मलबे में दबे संभावित लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
हादसे का विवरण और हताहतों की संख्या
यह दर्दनाक हादसा सुबह के समय लगभग 10 बजे घटित हुआ। ताजा जानकारी के अनुसार, इस भूस्खलन में 3 लोगों की जान चली गई है। मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के फंसे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। राहत कर्मियों ने अब तक अपनी तत्परता दिखाते हुए 6 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। बचाए गए लोगों को उचित उपचार दिया जा रहा है। मीनाक्षी पुल के पास पहाड़ी का एक बहुत बड़ा हिस्सा ढहने के कारण बचाव कार्य में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन टीमें लगातार काम कर रही हैं।
भूस्खलन के पीछे के मुख्य कारण
वायनाड के मेप्पाडी में हुए इस भूस्खलन का मुख्य कारण क्षेत्र में हो रही भारी बारिश को माना जा रहा है। यह हादसा विशेष रूप से वायनाड टनल निर्माण क्षेत्र में मीनाक्षी पुल के पास हुआ। दरअसल, कल्लाडी इलाके में मीनाक्षी पुल के पास टनल की खुदाई का काम चल रहा था। खुदाई के कारण वहां मिट्टी का एक बहुत बड़ा टीला जमा हो गया था। लगातार हो रही तेज बारिश की वजह से यह मिट्टी का टीला और उसके पास की पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया और पहाड़ी और मिट्टी का यह विशाल हिस्सा सड़क और पास में बहने वाली नदी में जा गिरा, जिससे वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए।
मजदूरों और कैंप पर हुआ असर
यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर टनल निर्माण के काम में व्यस्त थे। पहाड़ी के नीचे की ओर प्रवासी मजदूरों के रहने के लिए एक अस्थाई कैंप बनाया गया था। इसके अलावा, स्थानीय मजदूरों को काम पर लाने के लिए वहां 2 बसें भी खड़ी थीं। भूस्खलन इतना भीषण था कि ये दोनों बसें और मजदूरों का अस्थाई कैंप पूरी तरह से मलबे की जद में आ गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि घटना सुबह 10 बजे के करीब हुई, जिससे अधिकांश लोगों को संभलने का मौका मिल गया और वे समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर भागने में सफल रहे। प्रशासन और बचाव दल अब इस बात की पुष्टि करने में जुटे हैं कि हादसे के वक्त वहां कुल कितने लोग मौजूद थे और क्या कोई और अभी भी मलबे के नीचे दबा हुआ है।
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